भूलकर भी न करें ऐसी चीजों से देवी-देवताओं का पूजन, नहीं तो हो सकता है कुछ अशुभ

पूजन सामग्री यदि शुद्ध नहीं होती, तो देवता रुष्ट हो जाते हैं। मिलावटी पूजन सामग्री से पूजा का भी फल नहीं मिलता है। भगवान को प्रसन्न करने के लिए हम नित्य पूजन करते हैं, लेकिन उसका फल हमें नहीं मिलता। पूजा तभी सफल होती है, जब पूजन सामग्री शुद्ध हो। पूजा-पाठ में दीप जलाने का विशेष महत्व होता है। इससे जहां देव प्रसन्न होते हैं, वहीं सकारात्मक ऊर्जा भी आती है। दीप जलाने व हवन के लिए हमेशा शुद्ध देशी घी का ही प्रयोग करना चाहिए। मिलावटी या सस्ते देशी घी में भारी मात्रा में वनस्पति घी व घटिया तेल होता है, जो पूजन के उपयुक्त नहीं होता। ऐसे घी का उपयोग करना अशुभ होता है।भूलकर भी न करें ऐसी चीजों से देवी-देवताओं का पूजन, नहीं तो हो सकता है कुछ अशुभ
दीप जलाने के लिए हमेशा साफ कपास से बनी बाती का ही प्रयोग करना चाहिए। रुई से बनी बाती शुद्ध तो होती ही है, ऐसी बाती का दीपक पूजन में देर तक जलता है और बीच में बुझने का डर नहीं रहता। पूजन में दीपक का देर तक जलना शुभ होता है। दीपक जितनी देर तक जलता है, उससे सकारात्मक ऊर्जा फैलती है। लेकिन आजकल बाजार में ऐसी बाती बेची जा रही है, जो सस्ती जरूर होती है, पर ये दीपक में या तो पूजन के बीच जलते-जलते बुझ जाती है या फिर बहुत तेजी से जलती रहती है। पूजा के बीच दीपक के बुझने से पूजा संपन्‍न नहीं मानी जाती और न ही पूजन का लाभ प्राप्त होता है।
 
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा-पाठ में बांस से बनी अगरबत्ती जलाने से बचना चाहिए, क्योंकि शास्त्रों में बांस जलाना वर्जित माना गया है। बांस केवल अंतिम क्रिया के दौरान ही जलाया जाता है। हवन करने से जहां मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वहीं हवन से होने वाले धुएं से वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणु भी नष्ट होते हैं। हवन सफल हो, इसके लिए सामग्री का शुद्ध होना आवश्यक है। बाजार में आजकल सस्ती व खुली हुई हवन सामग्री उपलब्ध है, जिसे हम थोड़े से लालच के चलते खरीद लेते हैं। मिलावट की वजह से इसका धुआं लाभ के बजाय हानिकारक होता है।
 
हवन के लिए हमेशा शुद्ध हवन सामग्री का प्रयोग करना चाहिए। अशुद्ध सामग्री का प्रयोग करने से देवता नाराज होते हैं। पूजन में अगर लौंग का प्रयोग करते हें, तो लौंग के मुंह पर फूल के आकार जैसी आकृति पूरी होनी चाहिए और यह मोटी होनी चाहिए या सिकुड़ी या टूटी लौंग का प्रयोग करना स्वीकार नहीं होता।

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