भ्रष्टाचार के अमरबेल में राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू यादव उलझे…

अमरबेल का नाम तो आपने सुना ही होगा. अमरबेल जिस पेड़ पर होती है. उसे पूरा ढक लेती है. बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू यादव का भ्रष्टाचार भी अमरबेल की तरह है, जिसने पूरे परिवार को अपनी गिरफ्त में ले रखा है.भ्रष्टाचार के अमरबेल में राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू यादव उलझे...जांच में हुआ बड़ा खुलासा: KGMU प्रशासन की गलती से ट्रामा में लगी थी आग…

बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर मचा बवाल लालू यादव के अकूत संपत्ति इकठ्टा कर लेने के लालच का ही नतीजा है कि उनका सबसे होनहार राजनीतिक उत्तराधिकारी अपने सियासी करियर के शुरुआत में ही भ्रष्टाचार के जाल में फंस गया है. ऐसा नहीं है भारतीय राजनीति में किसी नेता के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगे हैं, लेकिन ये ऐसा पहला अनोखा मामला है जब अपने पिता के करतूतों की सजा एक बेटे को भुगतनी पड़ रही है.

भारतीय राजनीति की वंशबेल बहुत समृद्ध है, लेकिन तेजस्वी की तरह किसी को अपने पिता के भ्रष्टाचार की तरह विपक्ष के हमलों का सामना नहीं करना पड़ा. हालांकि ये कहा जा सकता है कि तेजस्वी शुरू से राजनीति की पिच पर नहीं खेल रहे थे और उन्होंने बहुत बाद में राजनीतिक रुझान दर्शाये. इसमें कोई दो राय नहीं लालू के बेटों को मंत्री पद अपने पिता के चलते ही मिला.

दूसरी ओर बीजेपी ने जिस तरीके से बिहार की कुर्सी पर कब्जा जमाने और लालू को कमजोर करने के लिए बिहार में महागठबंधन पर गिद्ध दृष्टि गड़ाई है. उसमें तेजश्वी का घेरे में आना कोई अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं है.

बकौल तेजस्वी यादव, जो आरोप उन पर लगाए जा रहे हैं, उसकी डील उनकी 13-14 साल की उम्र में हुई. तेजस्वी की माने तो ये डील उनके पिता ने की या कराई. अपनी हर संतान का भविष्य सुरक्षित करने के लिए लालू ने अपने लोभ और लालच पर कोई लगाम नहीं लगाई. राजद के मुखिया साम, दाम, दंड और भेद के जरिए संपत्ति बटोरते रहे. लालू के इन्हीं ‘पापों’ का साया उनके बच्चों पर पड़ा है. चारा घोटाला मामले में सुनवाई और सजा का सामना कर रहे लालू के सामने नई चुनौतियां हैं. जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है. लालू और उनके बच्चों का सियासी वजूद खतरे में हैं.

एक नजर उन बड़े मामलों पर जिनमें लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य आरोपी हैं.

1. चारा घोटाला

1990 से 97 के दौरान लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे इसी दौरान बिहार में चारा घोटाला हुआ. माना जाता है कि इस घोटाले में बिहार सरकार के राजस्व में 1000 करोड़ की गड़बड़ी की गई. 30 सितंबर 2013 को 44 अन्य के साथ सीबीआई कोर्ट ने लालू यादव को इस मामले में दोषी ठहराया गया. 2014 में झारखंड हाईकोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले मामले में पेंडिंग चार मामलों को खत्म कर दिया. कोर्ट की दलील थी कि एक मामले में दोषी करार दिए गए व्यक्ति को उन्हीं सबूतों और गवाहों के आधार पर अन्य मामलों में दोषी नहीं ठहराया जा सकता. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई 2017 को चारा घोटाला केस को दोबारा खोल दिया. शीर्ष कोर्ट ने आदेश दिया कि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज चार अन्य मामलों में भी अलग से ट्रायल चलाया जाए.

2. रेलवे होटल घोटाला

सीबीआई ने इस महीने की शुरुआत में 2006 के एक मामले में कथित अनियमितता के आरोप में लालू यादव के खिलाफ केस दर्ज किया है. इसके साथ ही सीबीआई ने लालू और उनके परिवार से जुड़े 12 ठिकानों पर छापा भी मारा. ये सभी ठिकाने दिल्ली, पटना, रांची और गुरुग्राम में हैं. सीबीआई ने आरोप लगाया है कि रांची और पुरी के दो होटलों की देखभाल और मरम्मत के लिए निकाले गए टेंडर में गड़बड़ियां पाई गई हैं. इन दोनों होटलों को टेंडर के जरिए सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था.

3. बेनामी प्रॉपर्टीज

20 जून को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों की जब्त की गई संपत्ति की एक सूची जारी की. आईटी डिपार्टमेंट ने लालू के रिश्तेदारों की 12 संपत्तियां जब्त की हैं. इनमें कुछ लालू की बेटी मीसा भारती की और उनके पति शैलेश कुमार की हैं. साथ ही बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, रागिनी और चंदना यादव की हैं. जब्त की गई संपत्तियों में दिल्ली का एक फॉर्म हाउस और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित एक बंगला भी है. एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन संपत्तियों का मार्केट वैल्यू 175 करोड़ से ज्यादा का है, जबकि इनको 9.32 करोड़ में खरीदा गया था.

4. 8 हजार करोड़ का मनी लॉड्रिंग केस

मई महीने में ईडी ने लालू यादव की बेटी मीसा भारती की कंपनी से जुड़े एक चार्टर्ड एकाउंटेंट को गिरफ्तार किया. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इन पर 8 हजार करोड़ रुपये की मनी लॉड्रिंग का आरोप है.

5. तेजस्वी यादव के खिलाफ केस

लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ बिहार के सबसे बड़े मॉल का प्रमोशन कर रही कंपनी में भारी शेयर रखने का आरोप है.

6. तेज प्रताप यादव के खिलाफ केस

लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के खिलाफ कथित तौर पर जमीन कब्जाने और पेट्रोल पंप रखने का आरोप है.

7. मीसा, रागिनी और हेमा के खिलाफ केस

लालू की तीन बेटियों के खिलाफ भी शेल कंपनियों में डायरेक्टर होने का आरोप है.

8. मंत्री पद देकर जमीन कब्जाने का आरोप

लालू यादव पर राजद नेताओं को मंत्री पद देकर उनकी जमीन कब्जाने का भी आरोप है. इसके अलावा रेलमंत्री रहने के दौरान आम लोगों को नौकरी देकर उनकी जमीन हथियाने का आरोप है. इन मामलों में जमीनें लालू के बेटों को दान की गई हैं.

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