भ्रष्टाचार के मामलों की पृथक सज़ा की याचिका पर सुनवाई

 भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों के अपराधों के लिए अलग – अलग सज़ा मिले इस आशय की मांग वाली याचिका पर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.यह याचिका अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है.नई दिल्ली : भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों के अपराधों के लिए अलग - अलग सज़ा मिले इस आशय की मांग वाली याचिका पर आज बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.यह याचिका अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की है.  इस याचिका में मांग की गई है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून, बेनामी संपत्ति निरोधक कानून, मनी लांड्रिंग निरोधक कानून और विदेशी मुद्रा विनिमय कानून में दोषी होने पर सजा एक साथ न चल कर अलग-अलग चले.अलग- अलग अपराध के लिए हर कानून में मिली सजा अलग-अलग काटना जरुरी हो. साथ ही इस याचिका में यह मांग भी की गई कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाए जो कि विकसित लोकतांत्रिक देशों के भ्रष्टाचार निरोधक कानून, बेनामी संपत्ति कानून, मनी लाड्रिंग कानून की जांच-करके सबसे अच्छे उपाय लागू करने का प्रयास करे.  इसके अलावा इस याचिका में भ्रष्टाचार के कानूनों को और सख्त बनाने के साथ ही इन सफेदपोश अपराधियों के प्रति कोई नरम रवैया न अपनाया जाए.याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इन अपराधों का समाज पर बुरा असर पड़ता है.इससे आतंकवाद, नक्सलवाद और तस्करी को बढ़ावा मिलता है.इसी से संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन की आजादी के अधिकार का उद्देश्य प्राप्त करने में परेशानी हो रही है.

इस याचिका में मांग की गई है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून, बेनामी संपत्ति निरोधक कानून, मनी लांड्रिंग निरोधक कानून और विदेशी मुद्रा विनिमय कानून में दोषी होने पर सजा एक साथ न चल कर अलग-अलग चले.अलग- अलग अपराध के लिए हर कानून में मिली सजा अलग-अलग काटना जरुरी हो. साथ ही इस याचिका में यह मांग भी की गई कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाए जो कि विकसित लोकतांत्रिक देशों के भ्रष्टाचार निरोधक कानून, बेनामी संपत्ति कानून, मनी लाड्रिंग कानून की जांच-करके सबसे अच्छे उपाय लागू करने का प्रयास करे.

इसके अलावा इस याचिका में भ्रष्टाचार के कानूनों को और सख्त बनाने के साथ ही इन सफेदपोश अपराधियों के प्रति कोई नरम रवैया न अपनाया जाए.याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि इन अपराधों का समाज पर बुरा असर पड़ता है.इससे आतंकवाद, नक्सलवाद और तस्करी को बढ़ावा मिलता है.इसी से संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन की आजादी के अधिकार का उद्देश्य प्राप्त करने में परेशानी हो रही है.

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