मप्र: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के एलान के बाद सांसद ने किया बवाल

मध्यप्रदेश में हाल ही में जबलपुर सांसद राकेश सिंह को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है जिसके कारण बीजेपी में अंतरकलह शुरू हो गया है. पार्टी के इस फैसले से नाखुश मंडला जिले से बीजेपी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने मंडला विधानसभा से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है जिसके बाद मप्र बीजेपी में उथल पुथल शुरू हो गई है.मंडला: मध्यप्रदेश में हाल ही में जबलपुर सांसद राकेश सिंह को बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है जिसके कारण बीजेपी में अंतरकलह शुरू हो गया है. पार्टी के इस फैसले से नाखुश मंडला जिले से बीजेपी सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने मंडला विधानसभा से चुनाव लड़ने का मन बना लिया है जिसके बाद मप्र बीजेपी में उथल पुथल शुरू हो गई है.  फग्गन सिंह कुलस्ते का यह बयान तब सामने आया है जब. बता दें कि कुलस्ते लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी करते आ रहे हैं लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी है. फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मंडला लोकसभा के अंतर्गत मंडला, डिंडौरी, सिवनी और नरसिंहपुर जिले की 8 विधानसभाएं आते हैं जिसमें उन्होंने मंडला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है.  फग्गन सिंह कुलस्ते ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को प्रस्ताव भेज दिया है और पार्टी जो निर्णय लेगी उस आधार पर काम करने की बात कर रहे हैं. गौरतलब है कि फग्गन सिंह कुलस्ते पांच बार मंडला लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. फग्गन सिंह कुलस्ते बीजेपी के कद्दावर नेता और आदिवासियों के राष्ट्रीय नेता के चेहरे के रूप में जाने जाते है, मगर पार्टी द्वारा लगातार उनकी की गई उपेक्षा से वे नाराज चल रहे है.

फग्गन सिंह कुलस्ते का यह बयान तब सामने आया है जब. बता दें कि कुलस्ते लंबे समय से प्रदेश अध्यक्ष की दावेदारी करते आ रहे हैं लेकिन हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी है. फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मंडला लोकसभा के अंतर्गत मंडला, डिंडौरी, सिवनी और नरसिंहपुर जिले की 8 विधानसभाएं आते हैं जिसमें उन्होंने मंडला विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है.

फग्गन सिंह कुलस्ते ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को प्रस्ताव भेज दिया है और पार्टी जो निर्णय लेगी उस आधार पर काम करने की बात कर रहे हैं. गौरतलब है कि फग्गन सिंह कुलस्ते पांच बार मंडला लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. फग्गन सिंह कुलस्ते बीजेपी के कद्दावर नेता और आदिवासियों के राष्ट्रीय नेता के चेहरे के रूप में जाने जाते है, मगर पार्टी द्वारा लगातार उनकी की गई उपेक्षा से वे नाराज चल रहे है.  

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