अभी अभी: इस बड़े मंत्री को लेकर, 300 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा, मरीजो को लेकर शहर में मचा हडकंप

एक ओर चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एवं मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जन्मदिन के मौके पर बुधवार को एसएमएस हॉस्पिटल में फल वितरित कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेजीडेंट, रेजीडेंट और संविदा कर्मी (लैब टेक्नीशियन, कम्प्यूटर ऑपरेटर, प्रयोगशाला सहायक, वार्ड ब्वॉय, ट्रॉलीमैन, इलेक्ट्रीशियन, टेलीफोन ऑपरेटर व हेल्पर) ने काम बंद कर दिया। नतीजतन ओपीडी के 5000 से अधिक मरीजों को परेशान होना पड़ा।
 ओपीडी पर्चियां कटने में ही परेशानी हुई। ओपीडी में जाने के बाद मरीजों को न तो डॉक्टर मिले और ना कोई जांच हो सकी। करीब चार हजार से अधिक मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। 75 से ज्यादा ऑपरेशन नहीं हो सके। 11 हजार तक रहने वाली ओपीडी घटकर 7400 तक रह गई। पहली बार ओपीडी में कोई डॉक्टर नहीं था। ऑपरेशन थियेटर 11 बजे बंद करके डॉक्टर चले गए। कई मरीजों के ऑपरेशन भी टल गए। सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों नेे 9 मार्च को भी कार्य बहिष्कार का निर्णय किया है। ऐसे में गुरुवार को भी मरीजों का परेशान होना तय है। मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल, अधीक्षक सहित तीन सौ डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है।
 
आईसीयू में डॉक्टर नहीं, परिजनों को ही देनी पड़ी ऑक्सीजन
 
सड़क दुर्घटना में घायल हुए कैलाश को परिजन ट्रोमा लेकर आए। यहां जांच के बाद उसे वार्ड में भेज दिया गया। अचानक से तबीयत बिगड़ी तो उसे आईसीयू में ले जाने के लिए कह दिया गया। तड़पते कैलाश को परिजन आईसीयू के लिए लेकर भागे। खुद ही ऑक्सीजन देने के लिए एबुपैक भी परिजनों ने ही संभाला। जैसे-तैसे आईसीयू में पहुंचे लेकिन यहां भी रेजीडेंट डॉक्टर ही मिला, कोई भी सीनियर डॉक्टर नहीं था।
 
डॉक्टरों की मांग- विभाग वापस ले आदेश
 
चिकित्सा विभाग की ओर से 7मार्च को एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले मेडिकल अफसरों को आचार्य, सह-आचार्य और सहायक आचार्य के समतुल्य माना जा सकेगा। इस आदेश के जारी होने के बाद बुधवार को राजस्थान मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन की ओर से आदेश के विरोध में काम बंद कर दिया गया।
 
कर्मचारियों की मांग, नियमित करे सरकार
 
अखिल राजस्थान चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कर्मचारी महासंघ की ओर से बंद रखे गए काम के दौरान मांग रखी गई कि मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध अस्पतालों के लैब टेक्नीशियन, कम्प्यूटर ऑपरेटर, प्रयोगशाला सहायक, वार्ड ब्वॉय, ट्रॉलीमैन, इलेक्ट्रीशियन, टेलीफोन ऑपरेटर व हैल्पर को नियमित किया जाए। कर्मचारियों का वेतन आरएमआरएस से कराया जाए।
 
महासंघ के अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह, महासचिव शक्तिसिंह व अजय भट्ट ने बताया कि कम्प्यूटर ऑपरेटर्स की न्यूनतम मजदूरी में 25 प्रतिशत वेतन वृद्धि की जाए और वेतन हर महीने की सात तारीख को दिलाई जाए। ठेकाकर्मियों की ओर से कम वेतन भुगतान किया जा रहा है, जिसे पूरा दिलाया जाए। वहीं लैब टेक्नीशियन कर्मचारी संघ के महेश सैनी ने बताया कि जिला अस्पतालों को पीपीपी के विरोध में दिए जाने के विरोध में बंद रखा गया है।
 
हटाया जा सकता है हड़ताल करने वालों को
 
हड़ताल पर अस्पताल प्रशासन सख्त कदम उठा सकता है। सभी ठेकेदारों को मौखिक रूप से कार्य व्यवस्था सुचारु करने के निर्देश दिए हैं। डॉक्टर्स की हड़ताल पर एमसीआई कठोर निर्णय ले सकती है।
 
प्रिंसिपल बोले- नए मरीज भर्ती नहीं करेंगे
 
भर्ती मरीजों और इमरजेंसी मरीजों को देखने की व्यवस्था भी की है, लेकिन मरीजों को भर्ती नहीं करेंगें। कोशिश हैं कि सरकार व डॉक्टर्स में वार्ता हो व काम सुचारू हो सके।

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