मर कर जी उठे लोगों ने बताया, कैसा होता है मौत का अहसास…

न्यू यॉर्क। मौत कैसी होती है? किस्से कहानियों में हमने पढ़ा है, मौत हसीन होती है। मौत वो महबूबा है, जिससे एक न एक दिन मिलन हो ही जाता है। हम उसे चाहें भी तो टाल नहीं सकते। मौत तब आती है, जब आपके सभी दुखों का अंत हो चुका है। मौत हमें हमारे इस शरीर से मुक्ति दिलाकर एक नई शुरूआत की ओर ले जाती है। पता नहीं ये बातें किसी ने कब कही होंगी, या किस किस ने क्यों कही होंगी। पर कुछ लोगों के अनुभवों को जानकर तो यही लगने लगा है कि मौत हसीन होती है।मर कर जी उठे लोगों ने बताया, कैसा होता है मौत का अहसास...प्रेमिका ने की खौफनाक साजिश, होने वाले पति के साथ कराया ये काम…

एक सवाल-जवाब वेबसाइट क्योरा पर किसी ने एक सवाल पोस्ट किया। जिसमें उसने पूछा कि ‘मौत का अनुभव कैसा होता है’। जिसके बाद तमाम लोगों ने अपने अनुभव गिनाए।इनमें से जांच के बाद पता चला कि अधिकतर लोग मौत के बेहद करीब जाकर वापस आए हैं। कुछ कई दिनों तक कोमा में रह चुके थे, तो कईयों की सांसें टूटने के बाद जुड़ गई थी। कुछ लोगों का कहना है कि मौत बेहद शांति देने वाली होती है। हमें मौत से नहीं डरना चाहिए।

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तो कुछ का कहना है कि उन्होंने अपनी मौत के बाद जिस दुनिया में कदम रखा, वहां उन्हें वो परिजन मिले, जो उनसे पहले ही मौत को प्राप्त हो चुके थे।वेरा मेगान नाम की लड़की ने मौत के बाद क्या महसूस किया, वो हम अपने पाठकों के सामने रख रहे हैं। मेगान नाम की युवा लड़की ने मौत के बारे में अपने अनुभव को कुछ यूं व्यक्त किया, ‘मेरे लिए मौत आनंददायक, निर्मल, रोमांचक, शांति से भरी और आरामदायक रही। मेगान का कहना है कि वो शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती, कि उनका अनुभव कैसा था।

मेरे पास शब्द नहीं है। बस इतना कह सकती हूं कि वो लम्हे मेरे लिए सबसे शानदार थे।’मेगान जब 11 साल की थी, तो कार्बन मोनोऑक्साइड के जहर से उनकी मौत हो गई थी। ये गैस पानी के हीटर से निकली थी। वो पूर्व सोवियत संघ में रहा करती थी। मेगान कहती हैं कि जब उन्हें मौत को महसूस करना होता है, तो सो जाती हैं। खुद को भारी कपड़ों से ठक लेती हैं और मौत के आगोश में सो जाती हैं।

ऐसा लगता है, जैसे मैं खुद को उन लम्हों के करीब पा रही होती हूं।मेगान अपने मौत के अनुभव के बारे में बताती हैं। वो कहती हैं कि मेरे दिल की धड़कने बेहद तेज हो गई थी, मानो वो रेस कर रहा है। मेरा सिर चकरा रहा हो, मानो वो चकरघिन्नी बन गई हो। ऐसा लगता था, जैसे मेरे सर पर दो बड़े छेद हो गए हों, और मैं अभी मरने जा रही हूं। ये वो समय था, जब मैं मरने जा रही थी। ये मरने से पहले के इंसानी शरीर का तकादा होता है कि वो आने वाले सफर के बारे में दिमाग को बता दे, जो अगले ही पल शून्यता से घिरने वाला होता है। दिमाग को पता चला जाता है कि वो भारी मुसीबत में होता है। जिससे वो खुद ही खुद को बचा सकती है।

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