महज 14 की उम्र में ये छात्र बन गया प्रोफेसर, ये है सफलता की कहानी

 ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है।
पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।

उम्र महज एक नंबर से ज्यादा और कुछ नहीं है। सही मायनों में सफलता की कहानी उम्र से नहीं बल्कि आपके हौसले और मजबूत इरादों से लिखी जाती है। जिस उम्र में बच्चे खेलते कूदते है उस उम्र में एक बच्चा ऐसा भी है जो प्रोफेसर बन छात्रों को पढ़ा रहा है। 14 साल के बच्चे ने यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनकर यह बात साबित कर दी है कि किसी भी काम को करने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती।

 

जी हां, हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे नन्हे प्रोफेसर याशा एस्ले की। याशा एस्ले को ह्यूमन कैलकुलेटर के नाम से भी जाना जाता है। यह बच्चा इंग्लैण्ड के लीस्टर यूनिवर्सिटी में गणित का प्रोफेसर है। याशा को शुरू से ही गणित में बहुत रूचि थी। आज को अपने से ज्यादा उम्र के छात्रों को गणित पढ़ा रहे हैं।

याशा जब तेरह साल के थे तभी यूनिवर्सिटी ने उनसे संपर्क किया था। याशा एस्ले ने यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनकर यह बात साबित कर दी है कि किसी भी काम को करने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती है। इतना ही नहीं याशा यूनिवर्सिटी में छात्रों को पढ़ाने के साथ-साथ यहां से अपनी डिग्री भी ले रहे हैं। 

याशा कहते हैं कि मुझे नौकरी मिलने से ज्यादा अच्छा यह लगता है कि मैं दूसरे छात्रों की मदद करना चाहता हूं और उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद कर सकता हूं।  इतनी कम उम्र में याशा ने दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की है कि किसी के पास ज्ञान, दूसरों की मदद और आगे बढ़ने की लालसा हो तो दुनिया उसका साथ देने में पीछे नहीं हटती।

याशा की कहानी की पढ़कर एक ही बात साबित होती है की हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता और न हीं सफलता सिर्फ चेहरे की झुर्रियों से तय होती है। यदि मजबूत आत्मबल और इच्छाशक्ति से साथ आगे बढ़ें तो इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं है, उम्र तो महज एक दिखावा है जिसे हमने एक नंबर दे दिया है।

 

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