महागठबंधन: तेजस्वी-नीतीश के बीच 45 मिनट तक चली मीटिंग के बाद, क्या टल गया इस्तीफा?

बिहार में महागठबंधन के बीच चल रहे सियासी घमासान के बीच मंगलवार शाम कैबिनेट मीटिंग हुई. खबर है कि मीटिंग में तेजस्वी ने अपना पूरा पक्ष रखा. ये बैठक करीब 45 मिनट तक चली.महागठबंधन: तेजस्वी-नीतीश के बीच 45 मिनट तक चली मीटिंग के बाद, क्या टल गया इस्तीफा?अभिनेत्री की खुदकुशी, खोल नहीं थी दरवाजा तोड़ा तो पंखे से लटकी मिली लाश…देखें #PHOTOS

नीतीश के सामने तेजस्वी की दलील

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार से सीधे मुलाकात में अपनी सफाई दी. तेजस्वी ने खुद को बेकसूर बताया. तेजस्वी ने नीतीश कुमार को बताया जब उन पर आरोप लगे थे तब वो सरकारी पद पर नहीं थे.  ऐसे में प्रिवेन्शन ऑफ करप्पशन एक्ट में वो कैसे दोषी हैं. तेजस्वी ने ये भी बताया कि वो सीबीआई केस के खिलाफ कोर्ट जाएंगे और अग्रिम जमानत की अपील करेंगे. तेजस्वी ने कहा अगर उन्हें जमानत नहीं मिली, तब वो दोषी हैं. वहीं अगर जमानत मिल गई या कोर्ट ने केस खत्म कर दिया तो फिर इस्तीफे का क्या मतलब होगा.

टल गया तेजस्वी का इस्तीफा

बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव की इन दलीलों के बाद उनका इस्तीफा फिलहाल टल गया है. अब कोर्ट के फैसले के आधार पर तेजस्वी के खिलाफ कोई कदम उठाया जाएगा.

इससे पहले एक बार जेडीयू आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को हठधर्मी छोड़ते हुए गठबंधन धर्म का पालन करने की नसीहत दे चुकी है. वहीं दूसरी आरजेडी भी अपने रुख पर कायम है. आरजेडी की दलील है कि जब केंद्रीय मंत्री उमा भारती का नाम बाबरी मस्जिद विध्वंस की साजिश में आता है और उनके खिलाफ केस चलाने की इजाजत दी जाती है तो उनसे इस्तीफा क्यों नहीं मांगा जाता. आरजेडी का मानना है कि तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप इतने गंभीर नहीं हैं कि पद से इस्तीफा दिया जाए. 

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ऐसे में सुशासन बाबू की छवि को बरकरार रखने के लिए एक तरफ जहां नीतीश कुमार पर तेजस्वी को कैबिनेट से बर्खास्त करने का दबाव है, वहीं गठबंधन जारी रखते सरकार बचाना भी उनके लिए बड़ी चुनौती है. यही वजह है कि जेडीयू इस बात पर जोर दे रही है कि आरजेडी खुद ही तेजस्वी यादव का इस्तीफा ले.

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