‘महागठबंधन नहीं ठगबंधन है’

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर झारखंड बंद करने की बात को लेकर कहा कि विपक्ष के इस बंद को राज्य की जनता ने नकार दिया है. जनता विकास के साथ है, इसलिए जनता को विकास का साथ देने के लिए बधाई. मुख्यमंत्री ने बंद के दौरान गिरिडीह में बच्चों से प्रदर्शन करवाने वाले विपक्ष पर हमलावर होते हुए कहा,जिन बच्चों के हाथों में किताब होनी चाहिए, उन्हें सियासी दल का झंडा थमाया जा रहा है. ये राज्य और राजनीतिक दलों के लिए चिंता की बात है. इस मसले पर कानून अपना काम करेगा. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर झारखंड बंद करने की बात को लेकर कहा कि विपक्ष के इस बंद को राज्य की जनता ने नकार दिया है. जनता विकास के साथ है, इसलिए जनता को विकास का साथ देने के लिए बधाई. मुख्यमंत्री ने बंद के दौरान गिरिडीह में बच्चों से प्रदर्शन करवाने वाले विपक्ष पर हमलावर होते हुए कहा,जिन बच्चों के हाथों में किताब होनी चाहिए, उन्हें सियासी दल का झंडा थमाया जा रहा है. ये राज्य और राजनीतिक दलों के लिए चिंता की बात है. इस मसले पर कानून अपना काम करेगा.    मुख्यमंत्री ने बंद को लेकर विपक्षी दलों को नसीहत देेते हुए कहा कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति को छोड़ कर सकारात्मक राजनीति करे. मिलकर राज्य का विकास करे. बतौर सीएम नकारात्मक राजनीति प्रसिद्धी तो दिला सकती है, लेकिन सिद्धि नहीं. सीएम ने महागठबंधन पर तंज भी कसा और कहा कि एकजूट की बात करने वाले विपक्षी अलग- अलग नजर आये. यह महागठबंधन नहीं ठगबंधन है.  भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है. जबकि बिल में अधिनियम की मूल भावना के साथ कोई छेड़-छाड़ नहीं की गयी है. इस संशोधन के बाद मात्र आठ माह में रैयतों को मुआवजे का भुगतान होगा.

मुख्यमंत्री ने बंद को लेकर विपक्षी दलों को नसीहत देेते हुए कहा कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति को छोड़ कर सकारात्मक राजनीति करे. मिलकर राज्य का विकास करे. बतौर सीएम नकारात्मक राजनीति प्रसिद्धी तो दिला सकती है, लेकिन सिद्धि नहीं. सीएम ने महागठबंधन पर तंज भी कसा और कहा कि एकजूट की बात करने वाले विपक्षी अलग- अलग नजर आये. यह महागठबंधन नहीं ठगबंधन है.

भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष जनता के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है. जबकि बिल में अधिनियम की मूल भावना के साथ कोई छेड़-छाड़ नहीं की गयी है. इस संशोधन के बाद मात्र आठ माह में रैयतों को मुआवजे का भुगतान होगा.

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