महाराष्ट्र: चूहा घोटाले के बाद चाय घोटाला, CM के दफ्तर में पी गए 4 करोड़ की चाय

महाराष्ट्र में चूहा घोटाले के बाद अब चाय घोटाला सामने आया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दफ्तर (सीएमओ) में चार साल के दौरान करीब चार करोड़ रुपये की चाय पी गई। यह खुलासा आरटीआई के जरिये हुआ है। इसके बाद मुख्यमंत्री फडणवीस एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं।महाराष्ट्र: चूहा घोटाले के बाद चाय घोटाला, CM के दफ्तर में पी गए 4 करोड़ की चाय

मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने आरटीआई से मिली जानकारी के तहत कहा है कि साल 2015-2016 में मुख्यमंत्री कार्यालय में 57,99,150 रुपये की चाय पी गई। वहीं, 2017-2018 में 3,34,64,904 रुपये की चाय मंगाई गई। इस तरह चार साल में मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में 18,691 कप चाय पी गई या आगंतुकों को पिलाई गई। निरुपम ने सवाल किया कि आखिरकार, मुख्यमंत्री कौन सी चाय पीते हैं जो इतनी महंगी है?

उन्होंने आगे कहा कि चाय पर हुआ खर्च चौंकाने वाला है। यह कैसे संभव है कि सीएमओ में इतनी चाय की खपत होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीएम किस प्रकार की चाय पीते हैं, क्योंकि मैंने ग्रीन टी, येलो टी और इसी तरह के कुछ नाम सुने हैं।

निरुपम ने आगे कहा कि ऐसा लगाता है मानो सीएम और सीएमओ इतना बड़ा बिल बनाने के लिए गोल्डन चाय पीते हैं। एक तरफ महाराष्ट्र में रोजाना ना जाने कितने किसानों की मौत हो रही है और वहीं दूसरी तरफ सीएमचाय पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। 

निरुपम यहीं नहीं रुके और चूहे घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि क्या मंत्रालय के चूहे चाय पीते हैं? उनका यह इशारा सीधे तौर पर पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे के बयान की तरफ था। जिसमें उन्होंने दावा करते हुए कहा था कि उन्होंने महज एक हफ्ते में 319,400 चूहों को मारा है। हालांकि चूहों के मामले पर बाद में मंत्रालय ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने चूहों को मारने के लिए 3,19,400 चूहा नाशक दवाओं का प्रयोग किया है।

सीएमओ ने दी सफाई

निरुपम के लगाए इन सभी आरोपों पर सीएमओ ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने आरटीआई में दी गई जानकारी का गलत प्रयोग किया है। यह रकम सिर्फ चाय पर ही नहीं बल्कि नाश्ता, खाना, मंत्रिमंडल बैठकों में परोसा जाने वाला खाना, सत्कार के लिए इस्तेमाल होने वाले फूलों के बुके, शॉल, गिफ्ट, विभिन्न विभागों की बैठकें और मुख्यमंत्री से मिलने आने वाले शिष्टमंडल के स्वागत आदि पर खर्च हुई है। 

इसके साथ ही मुख्यमंत्री सचिवालय ने कहा कि पहले मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित बैठकों का खर्च संबंधित विभाग उठाते थे। जिसका भुगतान अब मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा किया जाता है। खर्च बढ़ने का एक अन्य कारण है बैठकों की संख्या और महंगाई में हुई वृद्धि। साथ ही मुख्यमंत्री से मिलने आने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।  

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