मासूमों की जान जा रही, लेकिन डॉक्टर- कर्मचारी नदारद

मंडल के चार जिलों के अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज नहीं हो रहा है। इसका खुलासा कमिश्नर अनिल कुमार की छानबीन से हुआ। कमिश्नर की ओर गठित टीमों की जांच में 40 डॉक्टर और 171 कर्मचारी गैरहाजिर मिले हैं। कमिश्नर ने पूरी जिम्मेदारी मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) पर तय की और फटकार लगाते हुए स्पष्टीकरण मांगा है। संबंधित डॉक्टर, कर्मचारियों के वेतन रोकने की कार्रवाई की भी की जाएगी।मासूमों की जान जा रही, लेकिन डॉक्टर- कर्मचारी नदारदअभी अभी: प्रधानमंत्री मोदी का मजाक उड़ाने पर तन्मय भट्ट पर हुई एफआईआर दर्ज

गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर के उप जिलाधिकारी ने अपने-अपने तहसील क्षेत्र में अस्पताल, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। कमिश्नर के आदेश पर देखा कि इलाज के इंतजाम ठीक हैं या नहीं। मौके पर पहुंचे अफसरों को स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त मिलीं। बड़ी संख्या में डॉक्टर, कर्मचारी नदारद मिले। इंसेफेलाइटिस के मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पा रही है। बताते चलें कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ही 83 बच्चों की मौत हो चुकी है। कमिश्नर और डीएम लगातार मीटिंग पर मीटिंग कर रहे हैं। समय से इलाज मिल सके, इसलिए जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी पर संसाधन बढ़ाने के साथ ही डॉक्टरों, कर्मचारियों को अस्पतालों पर समय से पहुंचने और गंभीरता से इलाज करने की हिदायत दे रहे, मगर डॉक्टरों, कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा।

चौपाल लगाकर करें जागरूक
गुरुवार को भी कमिश्नर ने बैठक कर सीएमओ और डीपीआरओ को इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए गांवों, ब्लॉक मुख्यालयों में फिर से प्रभातफेरी, चौपाल लगाकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए। इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर पर भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या कम मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने स्वाइन फ्लू एवं डेंगू से बचाव के लिए प्रत्येक रविवार को कूलर ड्राई-डे मनाने को कहा। इस दिन अभियान चलाकर कूलर के पानी को सूखाने और उसकी सफाई कराने के निर्देश दिए।

सतर्क रहने के लिए प्रधानों को डीएम की पाती
इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए डीएम राजीव रौतेला की तरफ से सभी प्रधानों को पत्र लिखा जा रहा है। इसके माध्यम से गांव के सभी लोगों के निरोगी रहने की कामना करते हुए डीएम ने प्रधान से पानी के बहाव और नाली की समुचित व्यवस्था कराने के साथ ही साथ नियमित सफाई कराने की अपील की है। ग्रामीणों को खुले में शौच करने पर रोक लगाने के साथ ही साथ उन्हें शौचालय बनवाने के लिए जागरुक करने को कहा। साथ ही यह भी बताने को कहा है कि सरकार इसके लिए 12 हजार रुपये की मदद भी कर रही है। इसी तरह कहीं पर भी पानी एकत्रित न होने तथा सीएमओ की तरफ से सभी गांवों को मिलने वाले अनटाइड फंड से गांवों में दवाओं का छिड़काव कराने को कहा जा रहा है।

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