मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस: हाईकोर्ट ने मीडिया की तारीफ की, जानिए क्या कहा

पटना हाईकोर्ट ने बालिका गृह यौनशोषण मामले की सीबीआइ जांच की मॉनिटरिंग कर रहे पटना हाईकोर्ट ने मीडिया की तारीफ करते हुए कहा कि मीडिया की वजह से ही इस मामले का खुलासा हो सका। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इसमें मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए। हाईकोर्ट में आज सीबीआइ को मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपना था। मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस: हाईकोर्ट ने मीडिया की तारीफ की, जानिए क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह इस केस की सुनवाई कर रहे थे। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जांच रिपोर्ट नियत तिथि पर नहीं सौंपे जाने पर सीबीआइ को जमकर फटकार लगाई थी और इसके साथ ही जांच के बीच में ही एसपी का तबादला किए जाने पर भी सवाल किया था। 

इसका जवाब देते हुए सीबीआइ ने आज कोर्ट को बताया कि अफसरों की कमी की वजह से ही सीबीआइ एसपी का तबादला किया गया। कोर्ट में कल फिर इस मामले की सुनवाई होगी। कोर्ट यह भी जांच कर रहा है कि सीबीआइ एसपी का तबादला वैलिड ग्राउंड पर किया गया था या कोई और वजह थी? आज की सुनवाई में सीबीआइ के डीआइजी भी मौजूद रहे।

वहीं कोर्ट से जब यह पूछा गया कि बालिका गृह मामले की खबरों को छापा जाए या नहीं। इस पर कोर्ट ने कहा कि इस बारे में कोर्ट का आदेश देख लेना चाहिए। 

बता दें कि इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौनशोषण मामले की जांच की स्‍टेटस रिपोर्ट जमा नहीं करने पर जांच एजेंसी सीबीआई की जमकर खिंचाई की थी और सवाल किया था कि जांच टीम का हिस्सा रहे सीबीआइ के एसपी का ट्रांसफर क्‍यों किया गया?

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर. शाह और न्यायमूर्ति रवि रंजन की खंडपीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया था कि वह 27 अगस्त को मामले में अगली सुनवाई के दौरान अपना जवाब दाखिल करे और उसे अदालत के समक्ष सीलबंद लिफाफे में रखे।

बता दें कि कोर्ट इस मामले में सीबीआई की जांच से नाखुश है और इसके साथ ही पटना हाईकोर्ट ने बालिका गृह कांड की जांच की रिपोर्टिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य के महाधिवक्ता ने अपनी राय से राज्य सरकार को अवगत करा दिया, जिसके बाद समाज कल्याण विभाग ने एक नोटिस भी जारी कर इस केस की खबर दिखाने और छापने पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।

पटना हाईकोर्ट बिहार सरकार के अनुरोध पर मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड की जांच की मॉनिटरिंग कर रहा है।इस बीच अदालत ने जांच की जानकारी लीक होने को लेकर भी अप्रसन्नता जतायी और मीडिया से कहा कि वह इसे प्रकाशित करने से परहेज करे क्योंकि यह जांच के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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