मोदी की अगस्त क्रांति के जवाब में अखिलेश के देश बचाओ अभियान…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का चेहरा बनने के लिए इन दिनों कई नेता जद्दोजहद कर रहे हैं. इस कड़ी में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मोदी और योगी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर कर संघर्ष का ऐलान किया है.  अखिलेश भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगाठ के मौके पर 9 अगस्त से ‘देश बचाओ-देश बनाओ’ अभियान की शुरुआत कर रहे हैं. इस आंदोलन के जरिए वो अपनी खोई हुई सियासी जमीन को जहां एक तरफ वापस पाना चाहते हैं तो वहीं दूसरी तरफ मोदी के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष का चेहरा बनकर उभरने की भी कोशिश है.मोदी की अगस्त क्रांति के जवाब में अखिलेश के देश बचाओ अभियान...#GST: मोदी सरकार ने दी बड़ी राहत, इन चीजों पर घटाये टैक्स

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते ही मन के बात कार्यक्रम में कहा था कि अगस्त का महीना एक तरह से क्रांति का महीना है. इस महीने को क्रांति के महीने के रूप में मनाया जाना चाहिए, ताकि देश की युवा पीढ़ी आजादी के लिए हुए क्रांति को समझ सके. एक अगस्त को असहयोग आंदोलन और नौ अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरु हुआ था.15 को देश आजाद हुआ. भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ है. इस आंदोलन से जुडक़र लोग अंग्रेज सरकार के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन का हिस्सा बन गए थे। गांधीजी के कहने पर लाखों लोग करो या मरो के नारे पर खुद को आजादी के लिए झोंक रहे थे।1920 और 1942 में बापू के आंदोलन के दो रूप दिखाई देते हैं. मोदी के इस अगस्त क्रांति का जवाब में सपा प्रमुख अखिलेश यादव मोदी और योगी सरकार के खिलाफ क्रांति का नारा बुलंद कर रहे हैं. इस आंदोलन के जरिए सपा 2019 का चुनावी आगाज मानकर चल रही है.

जनाधार को वापस लाने की कोशिश

2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव को सूबे में काफी करारी हार मिली थी.  उनके पार्टी का जनाधार खिसककर भाजपा के खेमे चला गया है. ऐसे में अखिलेश यादव पार्टी कार्यकर्ता में नई जान फूंककर दोबारा से अपने जनाधार को वापस पाना चाहते हैं, ताकि 2019 की जंग फतह कर सकें.

विपक्ष का चेहरा बनने की जुगत

दरअसल मौजूदा दौर में नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष का कोई ऐसा चेहरा नहीं, जो मोदी का सामना कर सके. जबकि कुछ समय पहले तक लोग नीतीश कुमार को विपक्ष के चेहरे के तौर पर देख रहे थे, लेकिन भाजपा के संग उनके मिल जाने से ये जगह पूरी तरह से खाली है. ऐसे में क्षेत्रीय क्षत्रप के नेताओं में नई उम्मीद जागी है. यही वजह है कि ममता बनर्जी ने जहां 9 अगस्त को अगस्त क्रांति के मौके पर ‘भाजपा भगाओ’ अभियान का आगाज कर रही हैं. तो वहीं अखिलेश यादव ने भी 9 अगस्त से ‘देश बचाओ-देश बनाओ’  अभियान आगाज करने जा रहे हैं. अखिलेश यादव इस बात को बखूबी समझ रहे हैं कि वो मोदी के खिलाफ बिगुल फूंकने में कामयाब हो जाते हैं, तो निश्चत रूप से वो विपक्ष का एक मजबूत चेहरा बन जाएंगे. यही वजह है कि उन्होंने अगस्त क्रांति के दिन को चुना है. जिसका संबंध सीधे देश की आजादी से है. सपा नेता भी ये बात मान रहे हैं कि अखिलेश यादव साफ सुथरी छवि के नेता हैं, उन्होंने पांच साल यूपी के मुख्यमंत्री रहकर जो विकास के काम किए हैं, उतना काम पिछली किसी भी सरकार में नहीं हो सका है. 

सपा के लिए 2019 का चुनावी आगाज

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने आजतक डाट इन से कहा- मोदी सरकार ने तीन साल में देश का बेड़ा गर्क कर दिया है. बीजेपी सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक तौर-तरीके से असहमति की आवाज दबाई जा रही है. योगी राज में किसान तबाह हैं और महिलाएं असुरक्षित हैं. यही नहीं छात्रों और नौजवानों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि अगस्त क्रांति दिवस पर जनता की आवाज को पुरजोर ढंग से उठाई जाएगी. सूबे के सभी जिला मुख्यालय पर सपा कार्यकर्ता  ‘देश बचाओ-देश बनाओ’ अभियान के तहत प्रदर्शन करेंगे. अखिलेश यादव फैजाबाद में खुद भी हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा कि इसके जरिए सपा 2019 का चुनावी आगाज कर रही है. चौधरी कहते हैं कि योगी सरकार के चार महीने अभी गुजरे हैं, लेकिन सूबे की आवाम अखिलेश के कार्यकाल को याद करने लगे हैं.

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