मोदी की अग्निपरीक्षा, सिद्धारमैया की कसौटी पर

कर्नाटक का घमासान मोदी बनाम सिद्धारमैया की टक्कर का चोला पहन रहा है. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि आंतरिक सर्वे में पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. इसलिए बीजेपी मुसीबत से बाहर निकलने के लिए मोदी की रैलियों का सहारा लेगी. नेता ने बताया, ’29 अप्रैल से मोदी 5 बार कर्नाटक आएंगे और 15 से 17 रैलियों को संबोधित करेंगे. इस रणनीति ने हमारे लिए गुजरात में काम किया था. हमने उनकी (मोदी) वजह से ही हर जगह सरकार बनाई है.’बेंगलुरु: कर्नाटक का घमासान मोदी बनाम सिद्धारमैया की टक्कर का चोला पहन रहा है. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि आंतरिक सर्वे में पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. इसलिए बीजेपी मुसीबत से बाहर निकलने के लिए मोदी की रैलियों का सहारा लेगी. नेता ने बताया, '29 अप्रैल से मोदी 5 बार कर्नाटक आएंगे और 15 से 17 रैलियों को संबोधित करेंगे. इस रणनीति ने हमारे लिए गुजरात में काम किया था. हमने उनकी (मोदी) वजह से ही हर जगह सरकार बनाई है.'  बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने प्रदेश में एक मजबूत जमीनी रणनीति बनाई थी, लेकिन उसे जेडीएस और कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की 'अप्रोचेबल' और 'प्रो-पुअर' इमेज की वजह से मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. विश्लेषक हरीश रामास्वामी बंबई-कर्नाटक (उत्तर-पश्चिमी) क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, जहां पर बीजेपी को ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है. उनका कहना है कि मोदी की रैलियों से बड़ा फर्क पड़ सकता है, बशर्ते वह कांग्रेस के 'लिंगायत' समुदाय को अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा देने के मुद्दे पर अपना कार्ड खेल दें.  कांग्रेस की रणनीति मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और एआईसीसी के महासचिव के सी वेणुगोपाल और उनकी टीम के नेतृत्व में बनाई जा रही है. उनका मानना है कि वे मोदी-शाह की जोड़ी को सत्ता हासिल करने से रोक सकते हैं. वही सिद्धारमैया की ताकत का कर्नाटक में अपना बोल बाला है.

बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने प्रदेश में एक मजबूत जमीनी रणनीति बनाई थी, लेकिन उसे जेडीएस और कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की ‘अप्रोचेबल’ और ‘प्रो-पुअर’ इमेज की वजह से मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है. विश्लेषक हरीश रामास्वामी बंबई-कर्नाटक (उत्तर-पश्चिमी) क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, जहां पर बीजेपी को ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है. उनका कहना है कि मोदी की रैलियों से बड़ा फर्क पड़ सकता है, बशर्ते वह कांग्रेस के ‘लिंगायत’ समुदाय को अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा देने के मुद्दे पर अपना कार्ड खेल दें.

कांग्रेस की रणनीति मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और एआईसीसी के महासचिव के सी वेणुगोपाल और उनकी टीम के नेतृत्व में बनाई जा रही है. उनका मानना है कि वे मोदी-शाह की जोड़ी को सत्ता हासिल करने से रोक सकते हैं. वही सिद्धारमैया की ताकत का कर्नाटक में अपना बोल बाला है. 

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