इस तरह मोदी सरकार एक साल में बचाएगी 40,000 करोड़ रुपये

फ्लिपकार्ड, अमेजन और स्नैपडील जैसी ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स के साथ काम करने वाले प्रोफेशनल एक बड़े ई-कॉमर्स के साथ जुड़ सकते हैं। यह गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस या जीईएम सरकारी होगा। जीईएम सरकार के लिए सामान्य उपयोग की चीजें जैसे लैपटॉप, फर्नीचर और ऑटोमोबाइल की खरीद करेगा। इसके अलावा यह सरकार के लिए रेंट पर कैब लेने की सर्विस को भी देखेगा। यह सरकारी केंद्रीय खरीद विभाग डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ सप्लायर्स एंड डिस्पोजल (डीजीएसडी) की जगह लेगा। जिसे इस साल के अंत तक खत्म कर दिया जाएगा। यह पोर्टल सराकर का होगा। इसे एक स्पेशल परपज व्हीकल (SPV)के माध्यम से चलाया जाएगा। इसमें नौकरशाह और प्रोफेशनल दोनों शामिल होंगे। इन प्रोफेशनलों को सरकार प्राइवेट सेक्टर से लाएगी।

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एक अधिकारी ने बताया कि SPV के अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स होंगे। इसमें 66 परमानेंट पोस्ट होंगी। इसमें बाकी के प्रोफेशनल मार्केट के जानकार होंगे। जब भी प्रोफेशनलों की जरूरत होगी तभी लोगों को हायर किया जाएगा। बिजनेस के विशेषज्ञों और सर्विस के विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाएगी। निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करने का आदेश केंद्रीय मंत्रिमंडल के 31 अक्टूबर तक डीजीएसडी को बंद करने के आदेश के बाद आया है। जीईएम का उद्देशय खरीद में पार्दर्शिता लाकर सामान की खरीद में बचत करना है।

एक सरकारी अनुमान के मुताबिक जीईएम में सामान की कीमत टेंडर, रेट कॉन्ट्रेक्ट और सामान सीधे खरीदने की अपेक्षा कीमत 15 से 20 फीसदी कम रह सकती है। इसके मुताबिक पूरे साल में सरकार के लिए सामान्य उपयोग का सामान खरीदने और सर्विस में करीब 40,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। सरकार ने डीजीएसडी को 1991 और 2010 में भी बंद करने की सोची थी लेकिन इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं होने की वजह से ऐसा नहीं किया जा सका। SPV जुलाई से काम करने लगेगा। अधिकारी ने बताया कि कुछ निदेशालय के कुछ अधिकारी जीईएम के साथ काम करते रहेंगे और कुछ को किसी दूसरे सरकारी विभाग में भेज दिया जाएगा।

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