यदि ‘AAP’ मैदान में न होती तो कांग्रेस को न मिलती बंपर जीत

पंजाब विधान सभा चुनाव में जीत की मजबूत दावेदार मानी जा रही आम आदमी पार्टी (आप) के कई शीर्ष नेता चुनाव हार गए और पार्टी चुनाव में जीत प्राप्त करने वाली कांग्रेस से काफी पीछे दूसरे स्थान पर रही। आप को 20 सीटों पर जीत मिली लेकिन वह शिअद-भाजपा गठबंधन को तीसरे स्थान पर खिसकाने में सफल रही। आप की चुनाव प्रचार समिति के प्रभारी एवं पार्टी से सांसद भगवंत मान, पार्टी संयोजक गुरप्रीत सिंह घुग्गी, पत्रकार से नेता बने जरनैल सिंह, कानूनी प्रकोष्ठ के प्रभारी हिम्मत सिंह जरनैल और डॉ. बलबीर सिंह को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। मान को जलालाबाद से शिरोमणि अकाली दल सुप्रीमो एवं उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के हाथों हार का सामना करना पड़ा जबकि शेरगिल को मजीठा से बिक्रम सिंह मजीठिया ने हराया। जरनैल सिंह ने दिल्ली में राजौरी गार्डन विधानसभा सीट से विधायक के तौर पर इस्तीफा दे दिया था ताकि वह लांबी से पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और अमरिंदर सिंह के खिलाफ चुनाव में खड़े हो सकें।

1984 में हुए सिख विरोधी दंगा पीड़ितों के लिए लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एच एस फुल्का, आप प्रवक्ता सुखपाल सिंह खैरा, पत्रकार से नेता बने कंवर संधू, कारोबारी प्रकोष्ठ प्रभारी अमन अरोड़ा, हरपाल सिंह चीमा, मनजीत सिंह और प्रोफेसर बलजिंदर सिंह चुनाव जीते। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में आप सरकार ने राज्य में चार लोकसभा सीटें जीतकर सबको हैरान कर दिया था। बाद में पार्टी ने अपने दो सांसदों को निलंबित कर दिया था। बसपा, वाम दल माकपा एवं भाकपा, अपना पंजाब पार्टी और तृणमूल कांग्रेस अपना खाता नहीं खोल सकीं।

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