यहाँ फिर से वर्जिन बनने के लिए लड़कियां अपना रहीं यह तरीका

हैदराबाद। कम उम्र में वर्जिनिटी खोने के बाद अब शादी से पहले लड़कियां उसे फिर पाने की कोशिश में लगी हैं। पिछले कुछ समय में हैदराबाद में इस तरह कई मामले सामने आए हैं जिनमें लड़कियां डॉक्‍टरों के पास जाकर फिर से अपनी वर्जिनिटी पाना चाहती हैं। इनमें ज्‍यादातर वो लड़कियां हैं जिनकी जल्‍द शादी होने वाली है।

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एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार हैदराबाद के बंजारा हिल्‍स में रहने वाले हेमंता अपनी बेटी को लेकर प्‍लास्टिक सर्जन के पास पहुंचे। उनकी बेटी चाहती है कि डॉक्‍टर उनकी वर्जिनिटी की निशानी मानी जानी वाली हायमन को फिर बना दे। हेमंता की बेटी एक बेडमिंटन प्‍लेयर हैं।

यह अकेला मामला नहीं है बल्कि पिछले कुछ समय में इस तरह के कई केस सामने आए हैं। डॉक्‍टरों के अनुसार वर्जिनिटी फिर पाने के लिए 20-30 वर्ष युवतियां लगातार उनके पास आ रहीं हैं। डॉक्‍टर्स 40 मिनट तक चलने वाले एक छोटे ऑपरेशन के बाद युवतियों को उनकी वर्जिनिटी लौटा देते हैं।

सनशाईन अस्‍पताल के प्‍लास्टिक सर्जन डॉ. भवानी प्रसाद के अनुसार वो एक साल में अब 50 केस संभालते हैं जो पहले केवल 2-3 होते थे। उनके अनुसार हमारे समाज में महिलाओं का मानना है कि अच्‍छी शादीशुदा जिंदगी के लिए वर्जिनिटी होना जरूरी है। लड़कियां मानती हैं कि उनका होने वाला पति कितना भी मॉर्डन हो लेकिन वो अपने लिए वर्जिन पत्‍नी चाहता है।

विर्जिनिटी पाने के लिए युवतियों को जिस ऑपरेशन से गुजरना होता है जिसमें हायमन को फिर से लगाया जाता है। यह जल्‍द ठीक हो जाता है और इसके कोई निशान भी नहीं रहते। हालांकि इसके बाद युवतियों को किसी भी तरह की एक्‍सरसाइज से कुछ हफ्तों तक दूर रहना होता है।

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डांस और गेम्‍स के दौरान भी जा सकती है वर्जिनिटी

डॉक्‍टरों के अनुसार वर्जिनिटी पाने के लिए सिर्फ वो युवतियां ही नहीं आतीं जिन्‍होंने शादी से पहले यौन संबंध बनाकर इसे खोया हो बल्कि कई प्‍लेयर्स और दूसरी युवतियां भी होती हैं। दरअसल हायमन बेहद नाजुक होती है और गेम्‍स के दौरान या डांस करते हुए भी फट सकती है। आमतौर पर पहली बार संबंध बनाने में यह फटती है जिसे वर्जिनिटी की निशानी माना जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया कम समय में हो जाती है लेकिन डॉक्‍टर कहते हैं कि इसे एक्‍सपर्ट की देखरेख में ही करवाया जाना चाहिए।

आंध्र और तेलंगाना प्‍लास्टिक सर्जन एसोसिएशन के अध्‍यक्ष डॉ. सुधाकर के अनुसार अगर यह बेहद जरूरी नहीं हो तो युवतियों को इसे नहीं अपनाया जाना चाहिए।

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