यहां एक ही नाम से जारी किए गए हैं दो-दो राशन कार्ड, जानिए

केंद्र सरकार की ओर से गरीब परिवारों के लिए चलाई गई राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसवाइ) में फर्जीवाड़ा हो रहा है। एनएफएसवाइ योजना में एक नाम से दो-दो राशन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। विभाग भले ही डुप्लीकेसी का हवाला देकर उपभोक्ताओं पर दोष मढ़ रहा हो, लेकिन चौंकाने वाली बात ये सामने आई है कि उपभोक्ताओं को मालूम ही नहीं कि उनके नाम से दूसरा राशन कार्ड कब जारी हुआ। यही नहीं, उन्हें महीनों से खाद्यान्न भी वितरित नहीं हो रहा है। इससे एक बार फिर राशन कार्डों में फर्जीवाड़े के आरोपों को बल मिलता नजर आ रहा हैखाद्य एवं नागिरक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव आनंद वर्धन का कहना है कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यदि इस तरह की शिकायतें हैं तो यह बेहद गंभीर  हैं। इस संबंध में डीएसओ को जांच के लिए कहा जाएगा।

दरअसल, पांच राशन कार्ड ऐसे प्रकाश में आए, जिन पर डुप्लीकेसी के नाम पर फर्जीवाड़े के आरोप लगाए जा रहे थे। इन आरोपों की पड़ताल के लिए जब कार्डधारकों के स्थानीय पते पर जाकर पूछताछ की गई तो तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उपभोक्ताओं से जब राशन कार्ड दिखाने को कहा गया तो उन्होंने राशन कार्ड दिखा दिया। लेकिन, जब उन्हीं के नाम से दूसरा एनएफएसवाइ कार्ड दिखाया गया तो वो भी हैरान रह गए। कार्डधारकों ने कहा कि उन्हें दूसरा राशन कार्ड बनने की कोई जानकारी नहीं है। बल्कि उन्हें तो महीनों से राशन ही नहीं मिल रहा। कार्डधारकों ने आरोप लगाया कि राशन विक्रेता उनके हक के राशन में गड़बड़झाला कर रहे हैं। 

केस नंबर 1

कांवली निवासी कार्डधारक बेबी देवी के पति विनोद कुमार ने बताया कि उन्हें तीन महीने से राशन नहीं मिला। राशन विक्रेता हर महीने नए-नए कारण बताकर उन्हें वापस लौटा देता है। उन्हें राशन कार्ड बनने की कोई जानकारी नहीं है। गरीबों का हक मारना बहुत गलत है। 

केस नंबर 2

कांवली निवासी कार्डधारक वरिशा के पति अनवर ने बताया कि उन्हें छह महीने से राशन नहीं मिला है। उन्होंने कभी एनएफएसए राशन कार्ड के लिए आवेदन नहीं किया। इसकी जांच होनी चाहिए। 

30 फीसद कार्ड फर्जी होने का दावा 

उत्तरांचल सरकारी सस्ता विक्रेता गल्ला एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र गुप्ता ने दावा किया है कि जिले में करीब 30 फीसद राशन कार्डों में फर्जीवाड़ा है। एसोसिएशन पिछले तीन वर्षों से इन कार्डों की जांच की मांग कर रही है। 

खाद्य एवं नागिरक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव आनंद वर्धन का कहना है कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। यदि इस तरह की शिकायतें हैं तो यह बेहद गंभीर  हैं। इस संबंध में डीएसओ को जांच के लिए कहा जाएगा। 

 
 
 
 

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