पीरियड आने पर यहां होता है जानवरों जैसा सलूक, प्राइवेट पार्ट से करते हैं…

नई दिल्ली : नेपाल में 15 साल की एक लड़की की मौत हो गई। लड़की के पीरियड चल रहे थे और उसे घर से बाहर निकालकर एक झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

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ठंड की वजह से लड़की ने झोपड़ी में आग जला रखी थी, जिसके धुंए से उसका दम घुट गया और उसकी मौत हो गई। दरअसल, नेपाल में कई जगहों पर ऐसी मान्यता है कि लड़की पीरियड के समय अपवित्र हो जाती है। इस दौरान लड़की को घर के बाहर झोपड़ी में या पशुओं के बाड़े में रहने पर मजबूर होना पड़ता है।

इस प्रथा को छौपदी कहा जाता है, जिसका मतलब है अनछुआ। ये प्रथा सदियों से नेपाल में जारी है।  पीरियड या डिलिवरी के चलते लड़कियों को अपवित्र मान लिया जाता है। इसके बाद उन पर कई तरह की पाबंदिया लगा दी जाती हैं।  वह घर में नहीं घुस सकतीं। पेरेंट्स को छू नहीं सकती। खाना नहीं बना सकती और न ही मंदिर और स्कूल जा सकती हैं।खाने में सिर्फ नमकीन ब्रेड या चावल दिए जाते हैं। अगस्त में आने वाले ऋषि पंचमी फेस्टिवल में महिलाएं नहाकर पवित्र करती हैं। साथ ही, अपने पापों की माफी भी मांगती हैं। छौपदी को नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में गैरकानूनी करार दिया था।

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प्रथा को नहीं माना तो मिलेगी सजाहिंदू धर्म से जुड़ी इस प्रथा का पालन न करने पर सजा के बारे में भी बताया गया है। इस क्षेत्र में ऐसी धारणा है कि महिला द्वारा प्रथा को न मानने पर उसकी फैमिली में मौत हो सकती है। पीरियड में फसल हाथ लगाने पर बर्बाद हो जाती है। खुद से पानी लेने पर सूखा पड़ता है। फल को हाथ लगाने पर वह कभी नहीं पकता।

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लड़कियों ने सुनाए भयानक तजुर्बे16 साल की सोफाल्टा ने पहली बार पीरियड आने की बात पेरेंट्स को डरकर बताई थी। उसके मुताबिक, ‘डर था कि वे लोग उसे गाय के बाड़े में पटक देंगे। मुझे सोचकर डर लग रहा था।’  ‘वहां गोबर बहुत बदबू थी। गंदगी इतनी थी कि वहां एक पल भी रुकना मुश्किल था।’ 

गीता रोकाया ने बताया, ‘अगर हम घर में रुक जाते हैं तो बीमार पड़ जाती हैं, क्योंकि देवता इसकी इजाजत नहीं देते।’ लक्ष्मी राउत ने बताया कि उसे डिलिवरी के बाद उसे और उसके बच्चे को 18 दिन तक बाड़े में रहना पड़ा था। सर्दी के कारण उसके बच्चे को फ्लू से मौत हो गई।

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किराए पर भी लेते हैं बाड़ा

एक्शन वर्क नेपाल की चीफ राधा पौडेल के मुताबिक, वेस्टर्न नेपाल की 95त्न लड़कियां-महिलाएं इस प्रथा को निभाती हैं। इतना ही नहीं, जिन फैमिली के पास गाय का बाड़ा नहीं होता, वह दूसरे के बाड़ों में एक रूम किराए पर लेते हैं। करीब 77 फीसदी लड़कियों-महिलाओं को पीरियड के दौरान अपमान और हिंसा भी सहन करनी पड़ती है।

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