यहां शहतूत के साथ ही अब इस पेड़ से भी होगा रेशम का उत्पादन, जानिए

किसान आने वाले दिनों में मणिपुरी बांज से रेशम का उत्पादन कर सकेंगे। रेशम विभाग भीमताल ब्लॉक के वन पंचायतों में मणिपुरी बांज के पौधे लगाने जा रहा है। इसकी शुरुआत 15 जुलाई से होगी। ब्लॉक रेशम विभाग को वन पंचायतों की खाली भूमि उपलब्ध कराएगा, जहां वह 30 हजार मणिपुरी बांज के पौधे लगाएगा। ब्लॉक इन पौधों की सुरक्षा के लिए मनरेगा के तहत सुरक्षा तार भी लगाएगा।रेशम विभाग के उप निदेशक अरविंद ललोरिया ने बताया कि रेशम विभाग इस बरसात में वृहद पौधरोपण कर रहा है। इसमें अकेले जहां भीमताल ब्लॉक की वन पंचायतों में पहली बार मणिपुरी बांज का रोपण होगा, वहीं 73 हजार शहतूत के पौधों का भी रोपण किया जाएगा।

पर्वतीय क्षेत्रों में यह काम पहली बार किया जा रहा है। इसके लिए रेशम विभाग ने तैयारी लगभग पूरी कर ली है। बांज के पौधे कुसुमखेड़ा हल्द्वानी स्थित फॉर्म में तैयार किए गए हैं। विभाग की माने तो तसर रेशम का उत्पादन करने से कास्तकारों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। वर्तमान में नैनीताल जनपद में विभाग ने शहतूत की पहली फसल से 15,895 किलोग्राम कोयों का उत्पादन किया है। दूसरी फसल सितंबर-अक्टूबर में लगाई जाएगी।

यह उत्पादन कोटाबाग, रामनगर, हल्द्वानी और भीमताल के 85 ग्राम सभाओं के 780 परिवारों ने मिलकर किया है। पर्वतीय क्षेत्रों में मणिपुरी बांज के पौधरोपण के बाद कास्तकारों की संख्या में बढ़ोतरी तो होगी ही, रेशम का उत्पादन भी बढ़ेगा। तसर कोयों का उत्पादन अभी तक केंद्रीय रेशम बोर्ड की भीमताल इकाई द्वारा किया जाता था। राज्य रेशम विभाग द्वारा पहली बार इसका उत्पादन किया जा रहा है। 

परंपरागत बांज से भिन्न है मणिपुरी बांज 

रेशम विभाग की माने तो पर्वतीय क्षेत्रों के बांज मणिपुरी बांज से भिन्न हैं। रेशम के कीट परंपरागत बांज को ठीक प्रकार से नहीं खा पाते हैं। परंपरागत बांज की पत्ती जल्दी गिर जाती है और कठोर हो जाती है। जब कि मणिपुरी बांज की पत्ती नरम और काफी अधिक समय तक पेड़ में रहती है। 

रेशम विभाग के उप निदेशक अरविंद ललोरिया ने बताया कि रेशम विभाग इस बरसात में वृहद पौधरोपण कर रहा है। इसमें अकेले जहां भीमताल ब्लॉक की वन पंचायतों में पहली बार मणिपुरी बांज का रोपण होगा, वहीं 73 हजार शहतूत के पौधों का भी रोपण किया जाएगा। 

 

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