यहां है भगवान शिव का ससुराल जहां सावन में करते हैं वास

सावन का महीना शुरू होने वाला है इसी अवसर पर हम आपको बता देते हैं भगवान शिव के ससुराल के बारे में जिसके बारे में कई लोग नहीं जानते होंगे. भगवान शिव और माता सती की कथा तो सभी जानते हैं. नहीं जानते हैं तो आइये बता देते हैं उस कथा के बारे में और कहाँ है ये मंदिर जहां पर एक महीने तक भगवान शिव वास करते हैं. बता दें, हरिद्वार के समीप बसे कनखल में दक्षेश्वर महादेव मंदिर है. ये मंदिर माता सती के पिता दक्ष प्रजापति के नाम पर है लेकिन मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैसावन का महीना शुरू होने वाला है इसी अवसर पर हम आपको बता देते हैं भगवान शिव के ससुराल के बारे में जिसके बारे में कई लोग नहीं जानते होंगे. भगवान शिव और माता सती की कथा तो सभी जानते हैं. नहीं जानते हैं तो आइये बता देते हैं उस कथा के बारे में और कहाँ है ये मंदिर जहां पर एक महीने तक भगवान शिव वास करते हैं. बता दें, हरिद्वार के समीप बसे कनखल में दक्षेश्वर महादेव मंदिर है. ये मंदिर माता सती के पिता दक्ष प्रजापति के नाम पर है लेकिन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. विडियो :- 30 जुलाई को होगा सावन का पहला सोमवार, ऐसे करें पूजा  माता सती के भस्म होने की कथा सभी अच्छे से जानते हैं. उन्होंने भगवान शिव से अपने पिता की आज्ञा के विरुद्ध विवाह किया था जिसके चलते दक्ष ने उन्हें और भगवान शिव को विराट यज्ञ का निमंत्रण नहीं भेजा. भगवान शिव के मना करने पर भी सती अपने पिता के घर चली गई और जब बिना निमंत्रण के सती वहां पहुंची तो दक्ष ने उनका और भगवान शिव का काफी अपमान किया जिसके चलते सती ने स्वयं की ज्वाला से खुद को भस्म कर लिया. जब इसका ज्ञान भगवान शिव को हुआ तो उन्होंने क्रोध में आकर दक्ष का सिर काट दिया. लेकिन बाद में क्षमा मांगने पर भगवान शिव ने उन्हें बकरे का सिर लगाया और क्षमा किया.      वैदिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव श्रावण मास में अपनी ससुराल कनखल में पूरे एक माह तक रहते हैं. इतना ही नहीं भगवान शिव के साथ सभी पृथ्वी पर आ जाते हैं और उनके साथ ही वास करते हैं. इस मंदिर में आप देख सकते हैं, यज्ञ कुण्ड मंदिर में अपने स्थान पर ही स्थापित है जिसे सती कुंड कहा जाता है. मंदिर के समीप गंगा किनारे ‘दक्षा घाट‘ है, जहां मंदिर में आने वाले श्रद्धालु स्नान करते हैं. इतना ही नहीं इस मंदिर में भगवान शिव की बड़ी सी मूर्ति भी है जिसमें उनके हाथों में माता सती भी है.  सावन सोमवार में करें ये काम नहीं होंगे भोले नाराज़

 माता सती के भस्म होने की कथा सभी अच्छे से जानते हैं. उन्होंने भगवान शिव से अपने पिता की आज्ञा के विरुद्ध विवाह किया था जिसके चलते दक्ष ने उन्हें और भगवान शिव को विराट यज्ञ का निमंत्रण नहीं भेजा. भगवान शिव के मना करने पर भी सती अपने पिता के घर चली गई और जब बिना निमंत्रण के सती वहां पहुंची तो दक्ष ने उनका और भगवान शिव का काफी अपमान किया जिसके चलते सती ने स्वयं की ज्वाला से खुद को भस्म कर लिया. जब इसका ज्ञान भगवान शिव को हुआ तो उन्होंने क्रोध में आकर दक्ष का सिर काट दिया. लेकिन बाद में क्षमा मांगने पर भगवान शिव ने उन्हें बकरे का सिर लगाया और क्षमा किया. 

वैदिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव श्रावण मास में अपनी ससुराल कनखल में पूरे एक माह तक रहते हैं. इतना ही नहीं भगवान शिव के साथ सभी पृथ्वी पर आ जाते हैं और उनके साथ ही वास करते हैं. इस मंदिर में आप देख सकते हैं, यज्ञ कुण्ड मंदिर में अपने स्थान पर ही स्थापित है जिसे सती कुंड कहा जाता है. मंदिर के समीप गंगा किनारे ‘दक्षा घाट‘ है, जहां मंदिर में आने वाले श्रद्धालु स्नान करते हैं. इतना ही नहीं इस मंदिर में भगवान शिव की बड़ी सी मूर्ति भी है जिसमें उनके हाथों में माता सती भी है.   

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