युवतियां पहले खुद लड़के से शारीरिक सबंध बनाएंगी, फिर कर देंगी रेप का मुकदमा

प्‍यार में किए गए वादों और प्रेमी के साथ देखे गए सपनों के बाद जब यह रिश्‍ता टूटता है तो दर्द होता है। लेकिन टूटते रिश्‍तों के साथ मुंबई में एक नए तरह का मामला सामने आया है जहां ब्रेकअप के बाद युवतियों ने अपने पूर्व प्रेमी द्वारा दुष्‍कर्म किए जाने की शिकायतें दर्ज करवाई हैं। यह युवतियां प्‍यार में तो सहमति से अपने प्रेमी से यौन संबंध बनाती हैं लेकिन ब्रेकअप के बाद उसी प्रेमी पर दुष्‍कर्म के आरोप लगाती हैं।

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जस्टिस विद्यासागर कनाडे और नूतन सरदेसाई की डिविजन बेंच ने एक 20 वर्षीय युवती द्वारा दायर याचिका जिसमें उसने एफआईआर निरस्‍त करने की मांग की थी उस पर सुनवाई करते हुए कहा इस तरह के मामलों में आरोपियों को जेल भेजा जाना चाहिए।

बेंच ने कहा कि हमने नोटिस किया है कि पिछले कुछ समय में इस तरह के केसेस तेजी से सामने आए हैं जिसमें सहमति से यौन संबंध बनाने के बाद युवतियां अपने पूर्व प्रेमियों पर दुष्‍कर्म के आरोप लगाती हैं। बेंच ने आगे कहा कि एफआईआर दर्ज करवाते समय युवतियां अक्‍सर कहती हैं कि उनके प्रे‍मी द्वारा किए गए वादों पर भरोसा कर उन्‍होंने अपने प्रेमी से सहमति के साथ यौन संबंध बनाए और अगर जिन युवतियों को ऐसा भरोसा नहीं मिला उन्‍होंने यौन संबंधों से दूरी रखी।

एक अंग्रेजी अखबार की खबर के अनुसार बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि इस तरह के कई मामलों में आरोपियों को कम से कम 6 महीने या एक साल तक जेल में रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं जिनमें लड़कियां ब्रेकअप के बाद अपने प्रेमी पर दुष्‍कर्म का आरोप लगाते हुए‍ शिकायतें दर्ज करवा रही हैं।

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अक्‍सर ऐसी शिकायतें सामने आती हैं जिनमें महीनों या सालों तक प्‍यार में रहते हुए युवतियां यौन संबंध बनाती हैं और फिर जब रिश्‍तें में खटास आती है तो वो अपने प्रेमी या पूर्व प्रेमी पर दुष्‍कर्म का आरोप लगाने लगती हैं। अदालत ने रिमार्क किया कि जब कोई युवती इस तरह की‍ शिकायत के साथ पुलिस के पास पहुंचती है तो कानून के अनुसार पुलिस को कार्रवाई करने की जरूरत है।

कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि अविवाहित जोड़ें के बीच सहमति से बने यौन संबंध गलत नहीं हैं और हाल में कुछ कानूनों ने इसे मान्‍यता दी है। बेंच ने कहा कि लेजिस्‍लेशन ने इस तरह के रिश्‍तों को घरेलू हिंसा एक्‍ट के तहत लिवइन रिलेशन का नाम दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों में जांच एजेंसियों को एक बार सोचना चाहिए कि वो कैसे इनसे निपटेगीं।

 

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