युवाओं के लिए होगा CM योगी का बजट, चार लाख नौकरियां देने की योजनाओं पर नजर

प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2017-18 को किसान वर्ष घोषित किया था और किसानों को कर्जमाफी जैसी सबसे बड़ी योजना की सौगात दी थी। सरकार 2018-19 को युवा वर्ष घोषित कर सकती है, लेकिन युवाओं को लैपटॉप के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार ने युवा वर्ष में लैपटॉप की जगह नौकरी को प्राथमिकता देने का मन बना लिया है। इसके अलावा खेती-किसानी, सड़क-बिजली-पानी, एक्सप्रेस-वे व नहरों के विकास जैसे कामों पर दूसरे बजट में फोकस होगा।युवाओं के लिए होगा CM योगी का बजट, चार लाख नौकरियां देने की योजनाओं पर नजरसूत्रों ने बताया कि योगी सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसानों की कर्जमाफी के चुनावी वादे पर अमल के लिए 36 हजार करोड़ की योजना तो लागू कर दी, लेकिन पूरे वर्ष आर्थिक तंगी कायम रही। कर्मचारियों को महंगाई भत्ता के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा और सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान ही नहीं किया जा सका। तमाम दावे के बावजूद फील्ड में घोषणाएं तो बहुत हुईं, लेकिन विकास के काम कम ही नजर आए।

सरकार लगातार दूसरे साल हजारों करोड़ की एक योजना लाने का जोखिम नहीं उठा सकती थी। ऐसे में कॉलेज में दाखिला लेने वाले प्रत्येक युवा को लैपटॉप देने के वादे पर अमल किया गया तो चालू वित्त वर्ष जैसे हालात आगे भी जारी रहते। इस योजना पर अमल के लिए एक वित्त वर्ष में करीब 15 हजार करोड़ रुपये चाहिए और एक बार लॉन्च करने के बाद हर साल इसे आगे बढ़ाना मजबूरी होती। ऐसे में सरकार ने फिलहाल इस योजना को टाल दिया है।

जानकारी के मुताबिक, लैपटॉप योजना भले नहीं आएगी लेकिन बजट में सबसे ज्यादा फोकस युवाओं पर रहेगा। सरकार ने 2018-19 में करीब चार लाख नौकरियां देने की योजना बनाई है। इसके लिए सभी भर्ती आयोगों व चयन बोर्ड को पर्याप्त बजट देने की तैयारी है। चार में से तीन भर्ती संस्थाएं सक्रिय हो चुकी हैं। माध्यमिक सेवा चयन बोर्ड के गठन पर भी फैसला जल्द होने की संभावना है।

लड़कियों के लिए कर सकती है इस योजना की घोषणा

इसके अलावा सरकार युवाओं के स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करने के लिए ‘स्टार्ट-अप वेंचर कैपिटल फंड’ की स्थापना और लड़कियों की ग्रेजुएट स्तर तक की नि:शुल्क पढ़ाई के लिए अहिल्याबाई कन्या नि:शुल्क शिक्षा योजना शुरू कर सकती है। युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘एकलव्य क्रीड़ा कोष’ का गठन हो सकता है।

इसके अलावा युवाओं पर फोकस केंद्र की योजनाओं पर प्रदेश में अमल के लिए पर्याप्त बजट देने की तैयारी है। इसके साथ ही आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के अधूरे काम के अलावा, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे व बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे सहित राजमार्ग विकास से जुड़ी योजनाएं एक साथ आगे बढ़ती नजर आएंगी।

किसानों पर फोकस बरकरार
सरकार भले ही किसान कर्जमाफी योजना जैसी भारी-भरकम नई योजना किसानों के लिए नहीं लाएगी, लेकिन खेती-किसानी पर फोकस बरकरार रहेगा। एनपीए किसानों की कर्जमाफी के अधूरे काम को पूरा करने के लिए इस बार भी बजट देने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा दशकों से लंबित सिंचाई से जुड़ी तीन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 3,000 करोड़ से अधिक रकम का प्रस्ताव आ सकता है। दुग्ध विकास, पशुधन व मत्स्य से जुड़ी योजनाएं भी स्थान पा सकती हैं। सरकार मत्स्य पालक कल्याण फंड व पशु स्वास्थ्य बीमा योजना का भी एलान कर सकती है।

केंद्रीय योजनाओं के लिए रहेगा भरपूर पैसा

प्रदेश की नई योजनाएं गिनाने की जगह केंद्र सरकार की योजनाओं को पूरे फोकस के साथ प्रदेश में लागू करने की रणनीति बजट में नजर आएगी। जानकार बताते हैं कि केंद्र की आवास योजना, राष्ट्रीय पेयजल मिशन, बिजली सेक्टर में सौभाग्य व दीनदयाल उपाध्याय जीवन ज्योति ग्राम योजना, पर ड्रॉप-मोर क्रॉप व बीमा योजनाओं के लिए भरपूर बजट का प्रावधान होगा।

पूर्व में केंद्र व प्रदेश में अलग-अलग सरकार होने पर राज्य सरकार केंद्र की योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट प्रावधान करने की जगह उसी तर्ज पर अपनी नई योजनाएं चलाने पर ध्यान देती थी।
 
छोटा होगा बजट भाषण
योगी सरकार के पदारूढ़ होने के बाद राज्यपाल राम नाईक ने विधानमंडल के संयुक्त सत्र में वर्ष 2017 का अभिभाषण पढ़ा था। यह 101 पेज का था। नाईक ने इसे छोटा करने का निर्देश दिया था। राज्यपाल का 2018 का अभिभाषण संक्षिप्त व सारगर्भित रहा और 38 पेज में ही पूरा हो गया।

बताया जा रहा है कि वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल का 2018-19 का बजट भाषण भी अपेक्षाकृत छोटा रहेगा। उनका पहला बजट भाषण 63 पेज का था। इस बार इसके 40 पेज के अंदर रहने की संभावना है। 

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