ये रही कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया के 19 साल, देखें यादगार तस्वीरें

कांग्रेस में शनिवार से एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है. देश की सबसे पुरानी पार्टी की कमान अब राहुल गांधी संभालेंगे. लेकिन इससे पहले ही सोनिया गांधी ने एक बयान देकर सभी को चौंका दिया. संसद के शीतकालीन सत्र के लिए सदन पहुंचीं सोनिया ने वहां पत्रकारों से कहा कि अब वह रिटायर हो जाएंगीं. हालांकि, पार्टी ने साफ कहा है कि वह सिर्फ अध्यक्ष पद से रिटायर हो रही हैं, राजनीति से संन्यास नहीं ले रही हैं.ये रही कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया के 19 साल, देखें यादगार तस्वीरें
गौरतलब है कि सोनिया गांधी ने ऐसे समय में कांग्रेस की कमान संभाली थी, जब पार्टी मुश्किल में थी. और दोबारा खड़े होने के लिए जूझ रही थी. अब जब वह अध्यक्ष पद से अलविदा ले रही हैं, पार्टी एक बार फिर मुश्किल में है. लोकसभा में कांग्रेस के 45 सांसद हैं, और देश में अब कुछ ही राज्य में कांग्रेस सत्ता में है.

 

आपको बता दें कि यह लगभग दो दशक बाद है, जब कांग्रेस पार्टी को उसका नया पार्टी अध्यक्ष बनेगा. मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी 1998 से पार्टी की कमान संभाल रही हैं. सोनिया 14 मार्च 1998 को पार्टी अध्यक्ष बनी थीं.ये रही कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया के 19 साल, देखें यादगार तस्वीरें
 जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से भी ज्यादा वक्त कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं. वो कांग्रेस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक रहने वाली अध्यक्ष हैं. सोनिया गांधी को कई बार दुनिया की पावरफुल महिलाओं की सूची में शामिल किया गया है.

 

राजीव गांधी की हत्या होने के बाद कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं ने सोनिया से पूछे बिना उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा कर दी, लेकिन सोनिया ने इसे स्वीकार नहीं किया.ये रही कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया के 19 साल, देखें यादगार तस्वीरें
 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी का पद संभालने का आग्रह किया गया था, लेकिन उन्होंने इसे लेने से इंकार कर दिया और कहा कि वे राजनीति से दूर रहना चाहती हैं.

 

उस दौरान राजनीति और राजनीतिज्ञों के प्रति अपनी घृणा और अविश्वास को लेकर उन्होंने कहा था कि मैं अपने बच्चों को भीख मांगते देख लूंगी, परंतु मैं राजनीति में कदम नहीं रखूंगी.ये रही कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया के 19 साल, देखें यादगार तस्वीरें
 हालांकि सोनिया गांधी ने 1997 में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्षा चुनी गयीं. तब से वह कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष थीं. 2004 के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद सोनिया गांधी 16 दलीय यूपीए गठबंधन की नेता चुनी गईं.

 

सितंबर 2010 में वे फिर से चौथी बार कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गई. कांग्रेस पार्टी के 125 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा समय तक अध्यक्ष रहने का भी रिकार्ड उन्हीं के नाम है.
 

19 साल पहले अप्रैल 1998 में जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली, तब भी पार्टी की सियासी हालत कमजोर थी. मई 1991 में राजीव गांधी की हत्या होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया से पूछे बिना उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा कर दी, परंतु सोनिया ने इसे स्वीकार नहीं किया और कभी भी राजनीति में नहीं आने की कसम खाई थी. सोनिया ने राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना के साथ खुद को राजनीति से दूर रखने की कोशिश की.ये रही कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में सोनिया के 19 साल, देखें यादगार तस्वीरें
 

इसके बाद 1996 में नरसिम्हा राव की सरकार जाने के बाद पार्टी की चिंता और बढ़ गई. इस चुनाव में बीजेपी और जनता दल ने भारी बढ़त हासिल की और बीजेपी ने गठबंधन सरकार बनाई.
 

कांग्रेस की हालत दिन-ब-दिन बुरी होती देख सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेताओं के दबाव में 1997 में कोलकाता के प्लेनरी सेशन में कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की, जिसके बाद अप्रैल 1998 में वो कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. इस तरह नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी के रूप में सोनिया गांधी ने कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली.
 

अब जबकि राहुल गांधी को पार्टी की कमान सौंपी गई है, तब भी कांग्रेस की हालत खस्ता है. 2004 और 2009 में सरकार बनाने के बावजूद 2014 में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई.
 

इसके बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, यूपी, उत्तराखंड, गोवा, असम समेत कई सूबों में बीजेपी ने अपने दम पर सरकार बनाई. जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस एक के बाद चुनाव हारती गई. यहां तक कि निकाय चुनावों में भी कांग्रेस अपनी साख नहीं बचा पा रही है.
 

2004 के चुनाव से पहले कांग्रेस की हालत बहुत खराब थी और माना जा रहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री होंगे. हालांकि सोनिया के नेतृत्व में लड़े गए इस चुनाव में यूपीए को अनपेक्षित 200 से ज्यादा सीटें मिली और यूपीए की सरकार बनी. उस वक्त सोनिया गांधी 16 पार्टियों के गंठबंधन की नेता चुनी गईं.
 

उस वक्त सोनिया गांधी ने स्वेच्छा से प्रधानमंत्री नहीं बनने की घोषणा की और सभी नेताओं ने मनमोहन सिंह का समर्थन किया और उन्हें गठबंधन का अध्यक्ष चुना गया.
 

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने फिर यूपीए के लिए देश की जनता से वोट मांगा. एक बार फिर यूपीए ने जीत हासिल की. उस दौरान कांग्रेस नेताओं ने उन्हें काफी समझाने की कोशिश की और पीएम बनने का आग्रह किया लेकिन सोनिया नहीं मानीं.
 

2016 में राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत में सोनिया ने कबूला था कि अभी कांग्रेस के हालात ठीक नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि हां, फिलहाल लोकसभा में हमारे 44 सांसद हैं, लेकिन भरोसा है कि वापसी करेंगे. राजनीति में ये सब चलते रहता है. हार-जीत से पार्टी की नीति नहीं बदलती है.
 

इंटरव्यू में जब इंदिरा गांधी की नरेंद्र मोदी से तुलना की बात पूछी गई तो सोनिया ने कहा कि मैं इस बात से सहमत नहीं हूं, इंदिरा और उनकी राजनीति को मत भूलिए. वो कांग्रेस अध्यक्ष बनी, फिर पीएम बनी. लेकिन उनका मजाक बनाया गया. उन्हें अपमानित किया गया. पार्टी के भीतर ही उन्हें निशाना बनाया गया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, मुकाबला किया और विजय हासिल की.

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