ये हैं चश्मे बद्दूर की डायरेक्टर, 8 साल की उम्र में लिखी थी किताब

सई परांजपे को उन चुनिंदा फिल्म निर्देशकों में गिना जाता है, जिन्होंने आर्ट सिनेमा की गरिमा को बनाए रखा. उनका जन्म 19 मार्च 1938 को मुंबई में हुआ था. सई के पिता रूस के थे और एक वॉटरकलर कलाकार थे. सई बचपन से ही बहुत प्रतिभाशाली थीं. उन्होंने 8 साल की उम्र में ही एक किताब लिख दी थी. उनकी मां एक अभिनेत्री थीं. उन्होंने जानदार मुद्दों को कभी संवेदनशील तरीके से तो कभी रोमांचक अंदाज में पेश किया. उनके जन्मदिन पर जानिए उनकी 4 बेहतरीन फिल्मों के बारे में.ये हैं चश्मे बद्दूर की डायरेक्टर, 8 साल की उम्र में लिखी थी किताब

1- स्पर्श-इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और ओमपुरी ने अभिनय किया था. फिल्म समाज अंधे लोगों को लेकर लोगों की मानसिकता को उजागर करती है. फिल्म में नसीरुद्दीन शाह ने एक अंधे आदमी का किरदार काफी बेहतरीन तरीके से निभाया था. इस किरदार को उनके करियर के सबसे बेहतरीन कामों में गिना जाता है.

2- कथा- इस फिल्म में फारुख शेख, नसीरुद्दीन शाह और दीप्ति नवल ने अभिनय किया था. फिल्म दो दोस्तों की कहानी बताती है. फिल्म ये दिखाती है कि कैसे एक सीधा सरल इंसान तेज और तर्रार जमाने की गति के साथ कदम से कदम मिला कर चलने से पीछे रह जाता है और उसका अपना दोस्त भी उसकी इस सीधेपन का फायदा उठाता है. पर वो ज्यादा देर तक झूठ का सहारा लेकर आगे नहीं बढ़ पाता और अपने ही बनाए मायाजाल में फंसता नजर आता है. 

3- चश्मे बद्दूर- ये फिल्म बॉलीबुड की सबसे बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म में फारुख शेख, दीप्ति नवल, शहीद जाफरी, राकेश बेदी और रवी बासवानी ने अभिनय किया था. फिल्म 3 बेचलर्स की कहानी है जो अपने जीवन में लड़की की जरूरत महसूस करते हैं और अपने-अपने तरीके से लड़की पटाने की कोशिश करते हैं. फिल्म में हल्के- फुल्के लहजे में फारुख और दीप्ति नवल के रोमांस को फिल्माया गया है.

4- दिशा- फिल्म में नाना पाटेकर, शबाना आजमी, ओम पुरी और रघुबीर यादव ने अभिनय किया था. फिल्म अप्रवासी मजदूरों के जीवन और उनकी जटिलताओं पर बनाई गई थी. फिल्म भारत की ओर से इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया का हिस्सा बनी थी.

You May Also Like

English News