ये है बॉलीवुड की सबसे खतरनाक सास, एक थप्पड़ से चली गई थी आंख की रोशनी

हिंदी फिल्मों की सबसे खतरनाक सास के तौर पर मशहूर हुई एक्ट्रेस ललि‍ता पावर ने अपने करियर में कई बेहतरीन फ़िल्में कीं. ललिता पवार अपने आखि‍री समय में अकेली रहीं. 24 फरवरी को उनका निधन हुआ था. फिल्मी पर्दे पर इनको सबसे क्रूर सास का टैग मिला है. हालांकि कुछ सॉफ्ट रोल भी इनके खाते रहे लेकिन पहचान नेगटिव किरदारों से ज्यादा मिली.

18 अप्रैल 1916 को जन्मीं ललिता पवार एक आंख के जाने के बाद ही वैम्प के रोल में आई थीं. इससे पहले वह बॉलीवुड में हीरोइन बनना चाहती थीं. लेकिन उनकी आंख कैसे चली गई ये घटना भी फिल्मों से जुड़ी है. 1942 में आई फिल्म ‘जंग-ए-आजादी’ के सेट पर एक सीन की शूटिंग के दौरान हादसे की वजह से उनकी आंख में चोट लग गई जिससे उनका हीरोइन बनने का सपना हमेशा के लिए टूट गया.

भगवान दादा के थप्पड़ ने ली आंख की रोशनी

अस्सी के दशक के प्रसिद्ध अभिनेता भगवान दादा को इस सीन में अभिनेत्री ललिता पवार को एक थप्पड़ मारना था. थप्पड़ इतनी जोर का पड़ा कि ललिता पवार वहीं गिर पड़ीं और उनके कान से खून बहने लगा. फौरन सेट पर ही इलाज शुरू हो गया. इसी इलाज के दौरान डाक्टर द्वारा दी गई किसी गलत दवा के नतीजे में ललिता पवार के शरीर के दाहिने भाग को लकवा मार गया. लकवे की वजह से उनकी दाहिनी आंख पूरी तरह सिकुड़ गई और उनकी सूरत हमेशा के लिए बिगड़ गई.

फिर भी ललिता पवार ने नहीं मानी हार

लेकिन आंख खराब होने के बावजूद भी ललिता पवार ने हार नहीं मानी भले ही अब उन्हें फिल्मों में हिरोइन का रोल नहीं मिलता था लेकिन यहां से उनकी जिंदगी में एक नई शुरुआत हुई हिंदी सिनेमा की सबसे क्रूर सास की. वैसे बहुत कम लोग जानते हैं कि ललिता पवार अच्छी सिंगर भी थीं. 1935 की फिल्म ‘हिम्मते मर्दां’ में उनका गाया ‘नील आभा में प्यारा गुलाब रहे, मेरे दिल में प्यारा गुलाब रहे’ उस वक्त काफी लोकप्रिय हुआ था.

18 रुपये की मासिक पगार पर किया काम

ललिता पवार ने रामानंद सागर की रामायण में मंथरा का रोल भी किया था. 32 साल की उम्र में ही वह करैक्टर रोल्स करने लगी थीं. ललिता पवार का जन्म नासिक के एक धनी व्यापारी लक्ष्मणराव सगुन के घर में हुआ लेकिन उनका जन्म स्थान इंदौर माना जाता है. 18 रुपये की मासिक पगार पर ललिता ने बतौर बाल कलाकार मूक फिल्म में काम किया था. 1927 में आई इस फिल्म का नाम था ‘पतित उद्धार’.

कैंसर ने ले ली जान

1990 में ललिता पवार को जबड़े का कैंसर हुआ जिसके बाद वो अपने इलाज के लिए पुणे गईं . कैंसर की वजह से न सिर्फ उनका वजन कम हो गया, बल्कि उनकी याददाश्त भी कमजोर होने लगी जिस के कारण 24 फरवरी 1998 को हिंदी फिल्मों की सबसे क्रूर सास अभिनेत्री ललिता पवार का निधन हो गया.

You May Also Like

English News