योगी के बजट में हिंदुत्व के साथ विकास की बात, मुस्लिम विरोधी छवि हटाने की कोशिश

योगी आदित्यनाथ सरकार का दूसरा बजट एजेंडे के साथ विकास की बात करता हुआ दिख रहा है। इसमें भगवा टोली के एजेंडे के सरोकारों जैसे गाय, गंगा से लेकर अयोध्या, मथुरा और काशी ही नहीं बल्कि नैमिषारण्य व प्रयागराज तीर्थ (इलाहाबाद) जैसे स्थानों के विकास के सहारे हिंदुत्व के सरोकारों के समीकरण साधने की कोशिश की गई है। साथ ही बौद्ध, जैन और सूफी परिपथ के लिए करोड़ों रुपये की व्यवस्था करके तथा अल्पसंख्यकों के कल्याण की मद में भी बड़ी धनराशि की व्यवस्था करके  भाजपा के अल्पसंख्यक खासतौर से मुस्लिम विरोधी होने के आरोपों को कुंद बनाने का प्रयास किया गया है। बजट में पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विकास पर फोकस करते हुए लोगों को ये भरोसा दिलाने की भी कोशिश की गई है कि चुनाव के दौरान भाजपा की तरफ से लाया गया संकल्प पत्र सिर्फ चुनावी नहीं था। भाजपा सरकार संकल्प पत्र के वादों पर अब अमल के इरादे से आगे बढ़ रही है।योगी के बजट में हिंदुत्व के साथ विकास की बात, मुस्लिम विरोधी छवि हटाने की कोशिश

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युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और उन्हें मुहैया कराने के साथ पिछड़ों के कल्याण पर फोकस सहित खिलाड़ियों, वकीलों तथा महिलाओं के कल्याण व शिक्षा के सरोकारों के लिए कुछ न काम शुरू करके तो कुछ में धन का आवंटन बढ़ाकर भी इसे साबित करने की कोशिश की गई है। वैसे सामान्यत: योगी सरकार का यह बजट लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर बहुत चुनावी नजर नहीं आता है।

पर, बारीकी से नजर डालें और अर्थशास्त्रियों के निष्कर्षों को मानें तो बजट में चुनावी लिहाज से भले ही बहुत लोकलुभावनी बातें न की गई हों लेकिन योगी ने मोदी के मिशन 2019 की चुनौतियों से निपटने की जमीन तैयार करने का ख्याल जरूर नजर आता है। माना यह भी जा रहा है कि योगी सरकार का अगले साल आने वाला बजट चुनावी लिहाज से भाजपा के सामने खड़ी अन्य चुनौतियों से पार पाने में मोदी का साथ देगा। बीच में सरकार एक अनुपूरक लाकर भी इसे धार दे सकती है।

गोवंश की सुरक्षा, संवर्धन और बहुपयोगी बनाने पर जोर

स्लाटर हाउस पर पाबंदी के साथ गोरक्षा के एजेंडे पर सत्ता संभालने वाली सरकार ने इस बजट में गोवंश की सुरक्षा, संवर्धन और उन्हें बहुपयोगी बनाने की राह पर आगे बढ़कर लोगों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि गाय के नाम पर तमाम आरोप लगने के बावजूद वह एजेंडे से टस से मस नहीं होने वाली।

पशु संजीवनी कार्यक्रम के जरिये दुधारू पशुओं की देखभाल, छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए सभी 16 महानगरों में गोशालाओं को मदद, कान्हा गौशाला, पंचगव्य अर्थात गाय के दूध, गोबर, गोमूत्र से हो सकने वाले उत्पादों के लिए अनुसंधान योजना और पं. दीनदयाल उपाध्याय लघु डेयरी योजना के जरिये भी इस काम को आगे बढ़ाया गया है।

बुंदेलखंड में छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र के सभी सात जिलों में एक-एक हजार गोवंश की क्षमता वाले ‘गोवंश वन्य विहारो’ की स्थापना की घोषणा और धन की व्यवस्था गोवंश को बचाने और किसानों की नाराजगी दूर करने की एक पंथ दो काज कोशिश जैसी है।

प्रदेश की 12 पुरानी जेलों में गौशला बनाने के लिए धन की व्यवस्था करके और गोवंश की रक्षा के साथ उनकी सुरक्षा और संवर्धन की संकल्प पत्र की प्रतिबद्धता प्रमाणित करने के लिए गोकुल पुरस्कार सहित नंद बाबा पुरस्कार की घोषणा भी यही साबित करती है।

साधे सरोकारों के समीकरण

पर्यटन और संस्कृति के सहारे हिंदुत्व के सरोकारों का ख्याल रखने का संदेश दिया गया है। हालांकि इनमें कुछ घोषणाएं बीते दिनों में हो चुकी हैं। पर, उन्हें अब बजट में शामिल करके यह बताने की कोशिश की गई है कि सरकार को इस बात का ख्याल है कि चुनाव के दौरान कोई उन पर यह आरोप न लगा सके कि यह भी ‘घोषणा सरकार’ है।

शायद यही वजह रही कि ब्रज तीर्थ विकास परिषद की घोषणा को आगे बढ़ाते हुए इसके संचालन के लिए बजट में धन की व्यवस्था की गई है तो अयोध्या में दिवाली पर हुए दीपोत्सव को अब लगातार जारी रखकर प्रतिवर्ष मनाने के साथ काशी में प्रतिवर्ष देवोत्थानी एकादशी पर होने वाली देव दीपावली और बरसाना (मथुरा) की होली के उत्सव के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था करके भी एजेंडे को धार दी गई है।

रामायण, ब्रज कृष्ण, बौद्ध, सूफी, बुंदेलखंड और जैन परिपथ के लिए धन की व्यवस्था, नैमिषारण्य व अयोध्या का पर्यटन विकास तथा वृंदावन नगर निगम व नगर पंचायत बरसाना की सीमा को पवित्र तीर्थ स्थल घोषित करना भी यही साबित करता है। सवाल उठ सकता है कि बुंदेलखंड का भाजपा के सांस्कृतिक एजेंडे से क्या मतलब? ध्यान रखने की बात है कि बुंदेलखंड में ही वह चित्रकूट है जहां वनवास के दिनों में भगवान राम रुके थे। यहीं कामदगिरि पर्वत और मध्यप्रदेश से लगे हिस्से में गुप्त गोदावरी जैसी धार्मिक महत्व की जगह है।

पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चित्रकूट गए थे और मंदाकिनी की आरती शुरू की थी। कैलाश मानसरोवर भवन की स्थापना के लिए धन का आवंटन, प्रयागराज मेला प्राधिकरण व कुंभ मेला के 50 किलोमीटर परिधि में स्थित पर्यटन स्थलों के विकास के रंग से एजेंडे को चटख करने का प्रयास किया गया है।

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