अभी-अभी: योगी ने कहा-यूपी को टूटने नहीं दूंगा चाहे कुछ भी हो जाये….

अपने मंत्रियों से परिश्रम की अपेक्षा रखने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिन सुबह लगभग 3.30 बजे शुरू होता है और आजकल तो रात एक बजे के बाद तक चलता है।

वह मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में समस्याएं अधिक हैं और समय कम क्योंकि उन्हें 2019 में रिजल्ट देना है और जिसके लिए अभी से जूझना होगा। वह कहते हैं, ‘उनके साथ वही चलेगा जो सही तरीके से और तेज चल सकेगा।’ 
यूपी के विभाजन के पक्ष में वह नहीं हैं और जोर देकर कहते हैं कि आगे होने वाली भर्तियों में जिसने भी जाति, धर्म या धन के आधार पर बेईमानी का प्रयास किया, उसे जेल जाना होगा। एक हिंदी अखबार को योगी ने इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में योगी ने क्या कहा आइए जानते हैं।
-मेरा रूटीन वही है जो हर भारतीय का होता है। ब्रह्ममुहुर्त में 3.30 से चार बजे के बीच उठ जाता हूं। पूजा और योग के बाद लगभग डेढ़ घंटे अखबार पढ़ता हूं। फिर ही लोगों से मिलने का क्रम आरंभ हो जाता है। इसके बाद जनता से मिलना और फिर अधिकारियों और मंत्रियों के साथ बैठकें और दफ्तर के काम।
-तीन से चार घंटे। कभी-कभी कम भी।
-देखिए, सब लोग अपने हिसाब से काम करें परंतु हमें जो जनादेश मिला है, वह विश्राम की अनुमति नहीं दे रहा। विरासत में अनेक समस्याएं मिली हैं। हमें, इसलिए कड़ा परिश्रम ही एकमात्र विकल्प है हमारे सामने। 2019 में हमें परिणाम देना है और इसके लिए मेहनत करनी ही होगी। हमारे पास समय कहां है। वैसे मंत्री भी काफी रुचि लेकर काम कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से कहते रहे हैं कि यूपी में बहुत संभावनाएं हैं। हम सकारात्मक ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं। यह तो नेतृत्व पर निर्भर करता है कि वह स्वयं अच्छे काम का कैसा उदाहरण अपने सहयोगियों के सामने रखता है। मैं जनता की सेवा करने के लिए सीएम बना हूं, सत्ता का सुख उठाने के लिए नहीं । जनता के लिए मेरे दरवाजे 24 घंटे खुले है, कोई भी आवाज देगा मैं खुद उसके पास जाउंगा।
-किसी अफसर को केवल हटाने के लिए नहीं हटाना है। हम कोई तबादला या तैनाती हड़बड़ी में नहीं करना चाहते। हम सबको आंक रहे हैं। हां, हमारे साथ तेज चलना होगा और जिस अधिकारी ने पिछली सरकार में गलत काम किए, वह हमारे साथ नहीं चल सकेगा।’  आपने किसानों का कर्ज माफ किया लेकिन, इसका बोझ तो खजाने पर ही पड़ेगा।
-नहीं। जनता पर टैक्स का कोई बोझ नहीं पड़ेगा। पंद्रह वर्षों में किसान की बहुत उपेक्षा हुई है। हमें किसानों को राहत देनी ही थी, इसलिए 86 लाख किसानों के एक लाख रुपये तक के ऋण माफ किए गए। पिछली सरकार ने फिजूलखर्ची और भ्रष्टाचार का रिकार्ड तोड़ दिया था और इसका असर खजाने पर पड़ना ही था। यह बड़ी चुनौती थी जो हमने स्वीकार की।
केंद्र सरकार हमें इस मामले में सहायता देने से मना कर चुकी है लेकिन भाजपा ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था लिहाजा किसान को राहत तो देनी ही थी लेकिन, यह भी तय है कि बाकी जनता पर इसका भार नहीं पड़ना खर्चों का आकलन और धन का प्रबंध करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बना दी गई है। उसकी रिपोर्ट आने दीजिए।
-मंशा तो पूरा कर्ज माफी की थी पर पिछली सरकारों के भ्रष्टाचार और आर्थिक अराजकता के नाते ऐसा संभव नहीं हो सका। वैसे एक लाख की कर्ज माफी से भी दो साल से मौसम से परेशान किसानों को बड़ी राहत मिली है। किसानों के हित के लिए सरकार ने और भी कदम उठाए हैं। हमने पहली बार पांच हजार गेहूं क्रय केंद्र खोले हैं।
इसका लाभ भी दिख रहा है क्योंकि किसान को बाजार में 1700 रुपये से अधिक का मूल्य मिलने लगा है। दलालों और आढ़तियों को किसानों का शोषण अब नहीं करने दिया जाएगा।
-यह बड़ा व मार्मिक मुद्दा है और हमारी प्राथमिकताओं में है। 1998 में सांसद होने के बाद से संसद के हर सत्र में मैंने इसे उठाया। इस बीमारी का बड़ा कारण उस बड़े क्षेत्र में शुद्ध पेयजल न मिलना है। केंद्र की कई योजनाएं ऐसी हैं जिनके सही अमल से लोगों को साफ पानी दिलाया जा सकता है। हम यही सुनिश्चित करने जा रहे हैं। अब दोनों जगह हमारी सरकारें हैं, इसलिए इस काम में कोई कठिनाई नहीं आने वाली। हम इसका निदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
-भाजपा ने ही तीन राज्य बनाए-उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़। उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है। केंद्र ने यहां के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं दीं, लेकिन उन्हें जमीन पर नहीं उतारा जा सका। दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के नाते आज अवसर आया है कि हम प्रदेश को चमका सकें। यूपी जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा और अनेक विशिष्टताओं वाला राज्य है। हम विभाजन करके उत्तर प्रदेश को उसके इस गौरव से वंचित नहीं करेंगे। वैसे भी यहां के लोग बेहद क्षमतावान हैं।
-उपासना नहीं है धर्म। दोनों में अंतर है। विवाद तब होता है जब उपासना की विधियों को धर्म मान लिया जाता है। सनातन धर्म जीवन पद्धति है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ भी इसे जीवन पद्धति मान चुकी है। धर्म हमें हमारे कर्तव्यों का भान कराता है। सदाचार व नैतिक मूल्यों के मार्ग पर बढ़ाने में सहायक होता है धर्म। धर्म व्यापक अवधारणा है। महर्षि अरविंद की एक बात मुझे बहुत ठीक लगती है कि धर्म का आधार राष्ट्र है।धर्म व मानवता की रक्षा ही धर्म है जबकि सबसे बड़ा पाप है राष्ट्र की क्षति।
-गांधी ने रामराज्य की कल्पना की थी। गोस्वामी तुलसी दास ने दैहिक, भौतिक और आध्यात्मिक प्रगति के आधार पर लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना की कल्पना की। हमारे यहां सर्वे भवंतु सुखिन:, सर्वे संतु निरामया: कहा गया, वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा थी लेकिन, कुछ लोगों ने इसे भी संकीर्णता के दायरे में रखा। जानबूझकर वेदों के पवित्र मंत्रों को चरवाहों का गान कहा गया और देश को जादू टोने तक सीमित रखा गया। यह नहीं था भारत। हमें दोनों पक्षों को देखना होगा। धर्म व राजनीति का संतुलन करना होगा। देश के प्राचीन वैभव की पुनस्र्थापना करनी होगी परंतु नए विचारों के साथ तालमेल भी बैठाना होगा। कर्तव्य से धर्म को जोड़ेंगे तो कभी अकर्मण्यता नहीं आने पाएगी।
माना जा रहा है सारा विपक्ष मिलकर भाजपा के विरोध में कोई गठबंधन बना ले, उसके पहले आपको आगे करके भाजपा भविष्य की राजनीति को अस्सी बनाम बीस पर ले गई है?
-तीन साल से केंद्र में भाजपा की सरकार है। तीन वर्ष से प्रधानमंत्री देश के समग्र विकास के लिए जूझ रहे हैं।महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, किसान और अल्पसंख्यक कोई हो, सबका हित सोचना व करना ही हमारा लक्ष्य है। सच तो यह है कि तुष्टीकरण के नाम पर अभी तक उत्तर प्रदेश में लोगों को बांटा जा रहा था। समाजवाद के नाम पर परिवारवाद और जातिवाद को पुष्ट किया जा रहा था। ऐसा करने वालों के दिन अब लद चुके। कोई किसी जाति-धर्म-वर्ग का हो, हम सबको सुरक्षा की गारंटी देंगे और तब लोकतंत्र चमकेगा। समाज को बांटना अब संभव नहीं। इसलिए कोई गठबंधन बन जाए, भाजपा पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ने जा रहा।
-पूर्वांचल में जब मैं कि६ााव न मानने वाली लड़कियों पर तेजाब फेंका गया और कभी किसी और तरह से उन्हें परेशान किया गया। लड़कियों को सताने की यह समस्या जितनी दिखती है, यह उससे कहीं अधिक विकट है। जो समाज अपनी बेटियों और बहनों को सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता, वह न उदार हो सकता है और न सफल। रही रोमियो शब्द की बात तो यह हमारे संकल्प पत्र में लिखा था। तब किसी ने क्यों नहीं कहा। किसी भी अभियान के साथ ऐसा शब्द जोड़ा जाता है जो अपनी बात समझा सके।
-अब भर्तियां बिल्कुल पारदर्शी होंगी। इसके लिए भर्ती आयोगों में नियुक्तियां ईमानदारी से की जाएंगी। जातिवाद या पैसे के बल पर कोई परीक्षा पास नहीं की जा सकेगी। जिस अधिकारी को ऐसा करते पाया गया, उसे फिर जेल ही जाना होगा।
शुरुआत अच्छी हो जाए तो आगे भी अच्छा ही चलता है। एक तो हमारे दल में ऐसा कुछ होगा नहीं। यदि हुआ तोअनुशासन के नियम सबके लिए एक जैसे ही होंगे। हम वातावरण बदलने आए हैं। यही असली बदलाव होगा।शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य समेत सभी क्षेत्रों में समय के साथ आपको आमूलचूल बदलाव दिखेगा।
-यह बात मेरे दिमाग में है। पशुपालन और बागवानी के क्षेत्र में भी योजनाएं बन रही हैं। खेती-बाड़ी तीनों का संयुक्त रूप है। तीनों की बेहतरी से ही किसान आगे बढ़ेगा।
-ऐसी बात नहीं है। हम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसलों का पालन करेंगे। जो भी इसके नियमों का उल्लंघन करेगा, कार्रवाई होगी। फिर वह चाहे किसी वर्ग से हो। नियमों का पालन हर क्षेत्र में कराया जाएगा।
-हां। समय मिला तो कुछ नया पढ़ने का प्रयत्न करता हूं। रुचि का जो भी नया साहित्य मिलता है, उसे पढ़ता हूं। रुचि के विषयों पर लिखता भी हूं।
कभी नहीं। न समय है और न रुचि।
हमारी पीठ में हर काम सिस्टम से होता है। और भी लोग हैं जो वहां का काम देखते रहेंगे। यहां लखनऊ में व्यवस्था ठीक हो जाए तो फिर मैं भी बीच-बीच में वहां जाता रहूंगा।
-सब कुछ तो वैसा ही है। हां, वातावरण बदल रहा है। भौतिक वस्तुओं को इधर-उधर कर देने से परिवर्तन नहीं आता। बदलाव वातावरण बदलने से आता है। काम हो रहा है।

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