रक्षा मंत्री 23 अप्रैल से चीन के दौरे पर

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण 23 अप्रैल से चीन के दौरे पर जाएंगी. वे चीन में आयोजित शंघाई को ऑपरेशन आर्गनाइजेशन (एससीओ) में शामिल होंगी.इस आयोजन में भारत व पाकिस्तान सहित कुल आठ राष्ट्र शामिल होंगेनई दिल्ली : रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण 23 अप्रैल से चीन के दौरे पर जाएंगी. वे चीन में आयोजित शंघाई को ऑपरेशन आर्गनाइजेशन (एससीओ) में शामिल होंगी.इस आयोजन में भारत व पाकिस्तान सहित कुल आठ राष्ट्र शामिल होंगे.  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रक्षामंत्री सीतारमण इस दौरान चीन के कई अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर चीन-भारत के बीच के विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत की सम्भावना है. पडोसी देश भारत से अच्छे संबंधों की खातिर गत सप्ताह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी चीन के राष्ट्रीय सलाहकार के साथ शंघाई में बैठक कर चर्चा की थी. इसमें डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के बीच के संबंध शांति पूर्ण बनाने के लिए विचार -विमर्श किया गया.  इस बारे में भारतीय दूतावास की ओर से कहा गया कि शांति बहाल करने के लिए ऐसी बैठकें दोनों देशों के बीच अक्सर होती रहती हैं. स्मरण रहे कि 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद में भारत व चीन की सेनाएं एक दूसरे के सामने खड़ी रही थीं हालाँकि इस दौरान कूटनीतिक व राजनयिक प्रयासों से विवाद का तात्कालिक हल तो निकाल लिया गया, लेकिन यह विवाद दोबारा न हो अब इस बात पर जोर दिया जा रहा है. वहीं सुरक्षात्मक समानांतर व्यवस्था के तहत सीमा पर दोनों देश रक्षा तैयारियों के साथ लैस है, ताकि फिर से पहले जैसे हालात बनने पर उससे निपटा जा सके..

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रक्षामंत्री सीतारमण इस दौरान चीन के कई अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर चीन-भारत के बीच के विवादास्पद मुद्दों पर बातचीत की सम्भावना है. पडोसी देश भारत से अच्छे संबंधों की खातिर गत सप्ताह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी चीन के राष्ट्रीय सलाहकार के साथ शंघाई में बैठक कर चर्चा की थी. इसमें डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के बीच के संबंध शांति पूर्ण बनाने के लिए विचार -विमर्श किया गया.

इस बारे में भारतीय दूतावास की ओर से कहा गया कि शांति बहाल करने के लिए ऐसी बैठकें दोनों देशों के बीच अक्सर होती रहती हैं. स्मरण रहे कि 73 दिनों तक चले डोकलाम विवाद में भारत व चीन की सेनाएं एक दूसरे के सामने खड़ी रही थीं हालाँकि इस दौरान कूटनीतिक व राजनयिक प्रयासों से विवाद का तात्कालिक हल तो निकाल लिया गया, लेकिन यह विवाद दोबारा न हो अब इस बात पर जोर दिया जा रहा है. वहीं सुरक्षात्मक समानांतर व्यवस्था के तहत सीमा पर दोनों देश रक्षा तैयारियों के साथ लैस है, ताकि फिर से पहले जैसे हालात बनने पर उससे निपटा जा सके.

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