रामविलास वेदांती ने कहा- एनजीओ को डॉलर दिलाने के लिए अयोध्या मुद्दे पर सक्रिय हैं रविशंकर

भाजपा के पूर्व सांसद और श्रीराम जन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास वेदांती ने अयोध्या विवाद के समाधान के लिए सक्रिय श्रीश्री रविशंकर पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि रविशंकर ढकोसला कर रहे हैं। वे मंदिर के साथ मस्जिद बनवाना चाहते हैं जबकि संतों और हिंदुओं को यह स्वीकार नहीं।रामविलास वेदांती ने कहा- एनजीओ को डॉलर दिलाने के लिए अयोध्या मुद्दे पर सक्रिय हैं रविशंकरअभी-अभी: गुजरात चुनाव को लेकर BJP ने जारी की पहली लिस्ट, 70 नामों का किया ऐलान

उनका प्रयास समाधान के लिए नहीं बल्कि अपने एनजीओ को विदेशों से पैसा दिलाने के लिए है। वह जिन लोगों से बात कर रहे हैं उनमें ज्यादातर का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। विवाद का समाधान इस मामले में संघर्ष कर रहे संतों-महात्माओं से बात करने से होगा। डॉ. वेदांती के सवालों का जवाब दे रहे थे।

सवाल- आप श्रीश्री रविशंकर का विरोध क्यों कर रहे हैं?
जवाब- श्री श्री हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि अयोध्या में एक और मस्जिद बनवाकर उदारवादी चेहरे के साथ अपनी छवि को विदेशों में कैश कराया जाए। मुस्लिम देशों सहित अन्य देशों से अपने एनजीओ के लिए धन उगाही की जाए। उनकी गतिविधियों से उन लोगों को पीड़ा हो रही है जिन्होंने मंदिर आंदोलन के दौरान लाठी-गोली खाई। रविशंकर जिस तरह मंदिर के साथ मस्जिद बनवाने की साजिश में सक्रिय हैं, ऐसे आदमी का विरोध न करें तो क्या स्वागत करें।

सवाल- पर, भाजपा के लोग भी कह रहे हैं कि समझौते का रास्ता सबसे ठीक है?
जवाब- मैं कहां कह रहा हूं कि समझौते का रास्ता गलत है। पर, सवाल यह है कि अब समझौता किस बात का होगा। न्यायालय ने संबंधित स्थल पर मंदिर मान लिया है। विवाद अब जमीन के बंटवारे का है। हमारे लिए यह जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि आस्था का स्थल है। आस्था का बंटवारा नहीं हो सकता। रविशंकर की कोशिशें सिर्फ सियासी और स्वार्थ के तहत लग रही हैं।

जो दल सत्ता में रहा उसके साथ खड़े रहे हैं श्रीश्री

सवाल- सियासी कैसे कह सकते हैं?
जवाब- श्रीश्री का पुराना इतिहास देख लीजिए। जो दल सत्ता में रहा, उसके साथ खड़े हुए। अब भाजपा सत्ता में है तो मंदिर मुद्दे पर सक्रियता दिखाकर मलाई काटना चाहते हैं।

सवाल- मान लीजिए उनकी बात पर दूसरा पक्ष सहमत हो जाए?
जवाब- मुझे पता है कि समाधान का रास्ता कितना टेढ़ा है। नाम नहीं लूंगा लेकिन अयोध्या के एक सज्जन जिस तरह मंदिर निर्माण के नाम पर कई वर्षों से देश से लेकर विदेशों तक जाकर चंदा वसूली कर रहे हैं। दुष्प्रचार करके अपनी पंडागीरी चला रहे हैं। उसी तरह का काम रविशंकर करना चाहते हैं।

सवाल- आप कैसे कह सकते हैं कि श्रीश्री के दिल में खोट है?
जवाब- ऐसा न होता तो श्रीश्री कोई फॉर्मूला बताते। वे मंदिर व मस्जिद एक साथ बनाना चाहते हैं। यह अयोध्या के संतों और हिंदुओं को मंजूर नहीं। हमारा स्पष्ट मत है कि अयोध्या की शास्त्रीय सीमा में अब कोई मस्जिद नहीं बन सकती। बाबर के नाम पर तो कतई नहीं। उचित होगा कि रविशंकर भ्रम न फैलाएं। अगर वह नहीं मानेंगे तो हिंदू श्रद्धालुओं और संत-महात्माओं को उनके विरोध में उतरना पड़ेगा।

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