राशन को लेकर उठे बवाल के बाद भी नहीं हुआ इनकी समस्या का कोई समाधान

दिल्ली के मुख्य सचिव के साथ मुख्यमंत्री आवास पर जिस समस्या को लेकर बदसलूकी की गई वो अभी भी जस की तस है. AAP विधायक अजय दत्त और प्रकाश जारवाल के साथ-साथ पूरी पार्टी का दावा है कि वो जनता की राशन संबंधित समस्या का हल तलाशने मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री आवास पर मिले थे. बातचीत झगड़े में बदल गई और झगड़ा बढ़ते-बढ़ते मारपीट में. इसके बाद जो हुआ वो किसी से छिपा नहीं है. इस बवाल के पीछे की वजह अभी भी बरकरार है और हज़ारों लोग राशन से महरूम हैं. आजतक की टीम ने जब अजय दत्त और प्रकाश जारवाल के अलावा दिल्ली के कई इलाकों का जायजा लिया और पाया कि वहां हालात बेहद गंभीर हैं और सरकार व अधिकारियों के झगड़े के बाद हालात और खराब हो गए हैं.

अंबेडकर नगर

अंबेडकर नगर में राशन वितरण को लेकर लोगों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली. इस क्षेत्र में कुछ लोग संतुष्ट दिखे, तो वहीं कुछ इलाकों में महीनों से कई परिवारों को राशन नहीं मिला. यहां सरकारी राशन की दुकान चलाने वाले गिरधारी का कहना है, ‘राशन देने में दिक्कत नहीं है. समस्या पीओएस मशीन की है, कभी-कभी बुजुर्गों के फिंगर प्रिंट मैच नहीं करते, ऐसे में उनको हम आधार कार्ड और पैन कार्ड देख कर राशन देते हैं, पर सरकार को हमारे बारे में सोचना चाहिए. वो आने वाले दिनों में राशन के रेट और घटाने वाले हैं. हमारा खर्चा निकलना मुश्किल हो गया है, आगे तो और भी बुरा हाल होगा.’

देवली

दिल्ली का देवली इलाका पहले ही राजधानी के दूसरे इलाकों से कई मायनों में पिछड़ा हुआ है. यहां ज्यादातर राशन की दुकान बंद ही मिली. लोगों ने बताया कि महीने की 10 तारीख तक राशन मिलता है, उसके बाद राशन नहीं है कह कर दुकानदार दुकानें बंद कर देते हैं. यहां करीब 50 साल से रह रहे राम जी ने बताया, ‘इतने वर्ष में यहां कुछ नहीं बदला. कहने को हम देश की राजधानी में रहते हैं, पर न तो यहां साफ-सफाई की व्यवस्था है और ना ही दूसरी सुविधाएं. ज्यादातर लोगों को राशन मिलता ही नहीं है. घंटों लाइन में लगने के बाद पता चलता है कि अंगूठा मैच नहीं कर रहा. बहुत बुरा हाल है, आखिर ये किसकी गलती है? क्यों पीओएस मशीन खराब पड़ती है, हमारा हक हमसे क्यों छीना जा रहा है इसका जिम्मेदार कौन है?’

संगम विहार

संगम विहार में हालात और भी खराब हैं. राशन की दुकान चलाने वाले अतुल ने बताया कि सभी दुकानदार पर इल्जाम लगाते हैं, पर सरकार दुकानदारों को सीमित मात्रा में राशन देती है. पीओएस मशीन के बारे अतुल ने बताया कि ये मशीन बिना लाइट के चलती नहीं, लाइट हो तो नेटवर्क नहीं होता, लोग सुबह से शाम लाइन में लगते हैं और लाइट नहीं आने से खाली हाथ वापस लौट जाते हैं.

इलाके के लोग हो या सरकारी राशन के दुकानदार सबकी अपनी-अपनी समस्या है, जिसका कोई हल निकलता नहीं दिख रहा. ऐसे में सवाल ये है कि जब राजधानी में ये हालात हैं तो दूसरे राज्यों में क्या स्थिति होगी.

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