राष्ट्रपति चुनाव: मीरा कुमार 6 जुलाई को जाएगी बिहार, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष से नहीं है मुलाकात की कोई योजना…

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार का आगामी 6 जुलाई को अपने बिहार दौरे के क्रम में राजद और कांग्रेस के विधायकों एवं सांसदों से मिलेंगी पर उनकी प्रदेश के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से मुलाकात की कोई योजना नहीं है।राष्ट्रपति चुनाव: मीरा कुमार 6 जुलाई को जाएगी बिहार, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष से नहीं है मुलाकात की कोई योजना...राष्ट्रपति चुनाव: AAP की गठबंधन पार्टी ने रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का किया ऐलान…

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने बताया कि मीरा कुमार आगामी 6 जुलाई को पटना पहुंचने पर उसी शाम कांग्रेस और लालू प्रसाद की पार्टी राजद के विधायकों और सांसदों से संयुक्त रूप से मिलेंगी और उनकी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिन्होंने एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का समर्थन करने का मन बना लिया है। 

उन्होंने कहा कि अगले दिन मीरा कुमार अपने पैतृक गांव भोजपुर जिला के चंदवा जाएंगी। उन्होंने बताया कि मीरा कुमार बिहार से झारखंड के लिए रवाना होने के पूर्व आगामी 8 जुलाई को मीडिया से मुखातिब होंगी। विपक्षी दलों द्वारा राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए जाने के बाद मीरा कुमार की बिहार की यह पहली यात्रा होगी।

बिहार की महागठबंधन सरकार में शामिल नीतीश कुमार की पार्टी जदयू जहां राजग उम्मीदवार और प्रदेश के पूर्व राज्यपाल रहे राम नाथ कोविंद का राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन कर रही है। वहीं इस सरकार में शामिल राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार मीरा कुमार हैं।

मीरा कुमार ने पूर्व में यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि उन्होंने सभी दलों के सांसदों और विधायकों को लिखकर अपनी आत्मा की आवाज के अनुसार राष्ट्रपति पद को लेकर आगामी 17 जुलाई को होने वाले मतदान के दौरान राय प्रकट करने की अपील कर चुकी हैं ।

नीतीश के राजग उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का उनके व्यक्त्वि के कारण समर्थन किए जाने पर महागठबंधन के टक दलों के बीच आरोपप्रत्यारोप का दौर चला था। राजद प्रमुख ने जहां इसे भारी भूल बताया था वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा था एक विचारधारा रखने वाले एक निर्णय लेते हें पर जिनकी कई विचारधारा होती है वे कई निर्णय लेते हैं।

नीतीश ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा था ‘बिहार की बेटी’ को हरा के लिए क्यों चुना गया। यूपीए सरकार के कार्यकाल के दो बार अवसर आए थे उस समय क्यों नहीं उन्हें उम्मीदवार बनाया ।

आजाद की टिप्पणी पर जदयू ने पलटवार करते हुए कहा कि वह किसी की ‘पिछलग्गु’ नहीं है ।

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