राहुल-नीतीश की मुलाकात: पटना लौटते ही तेजस्वी पर ले सकते हैं कोई बड़ा फैसला….

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को दिल्ली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर बिहार में महागठबंधन की सरकार के भविष्य को लेकर बातचीत की। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को बनाए रखने या नहीं रखने को लेकर चर्चा हुई।राहुल-नीतीश की मुलाकात: पटना लौटते ही तेजस्वी पर ले सकते हैं कोई बड़ा फैसला....JDU ने कहा- अब महागठबंधन को बचाए रखने की जिम्मेदारी तीनों पार्टियों की होगी…

सूत्रों ने बताया कि नीतीश ने राहुल के सामने तेजस्वी को लेकर अपने रुख को स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं कर सकते।

राहुल के सरकारी निवास पर हुई इस मुलाकात के बाद नीतीश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिए गए राष्ट्रपति के विदाई भोज में शामिल हुए। नीतीश के इस भोज में शरीक होने के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

जदयू सूत्रों ने बताया कि पटना वापस लौटने के बाद नीतीश गठबंधन पर अंतिम फैसला लेंगे। गौरतलब है कि कांग्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पिछले दिनों नीतीश और घटक राजद प्रमुख लालू यादव से फोन पर बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की थी।

नीतीश ने भी गठबंधन की मजबूती का जिम्मा कांग्रेस पर छोड़ा 

राहुल और नीतीश के बीच बिहार में जदयू, राजद और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार को बचाए रखने और मजबूती देने के लिए कुछ फार्मूलों और विकल्पों पर चर्चा हुई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से शनिवार को हुई मुलाकात में कुछ इसी तरह की बातें सामने आई हैं।
 
पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक नीतीश कुमार राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब आधा घंटा बातचीत हुई। सूत्रों की मानें तो नीतीश गठबंधन की सरकार चलाने के पक्षधर हैं लेकिन हाल के घटनाक्रम में गठबंधन को जो नुकसान पहुंचा है उसे लेकर नीतीश ने अपना स्टैंड कांग्रेस उपाध्यक्ष को बता दिया है। 

बताते हैं कि नीतीश हाल ही बयानबाजी और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर आहत हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने जल्द ही राजद नेता लालू प्रसाद यादव के साथ भी बात कर आए गतिरोध को दूर करने की बात कही है।

नीतीश ने भी गठबंधन की मजबूती का जिम्मा कांग्रेस पर छोड़ा है। नीतीश भी चाहते हैं कि गठबंधन के नेता बैठकर संवाद बढ़ाएं ताकि भविष्य के बड़े राजनीतिक गोल को पूरा किया जा सके। बताते हैं कि नीतीश चाहते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व विपक्षी पार्टियों को साथ लेकर इस मसले में आगे बढ़े। 

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