रिटायर्ड जज को महंगा पड़ा कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करना

महाराष्ट्र के एक रिटायर्ड जज को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करना काफी महंगा पड़ गया. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जजों की पैनल से हटा दिया. बता दें, अभय एम थिप्से उन जजों में से एक थे जो महाराष्ट्र सरकार और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के बीच  चल रहे विवाद को सुलझाने वाली कमिटी के सदस्य थे. महाराष्ट्र के एक रिटायर्ड जज को कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करना काफी महंगा पड़ गया. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जजों की पैनल से हटा दिया. बता दें, अभय एम थिप्से उन जजों में से एक थे जो महाराष्ट्र सरकार और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के बीच  चल रहे विवाद को सुलझाने वाली कमिटी के सदस्य थे.   रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज अभय एम थिप्से को कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी मिलने के बाद यह फैसला लिया. उन्हें महाराष्ट्र सरकार और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के बीच राजकोषीय विवाद की मध्यस्थता करने के लिए मनोनीत किया गया था. अभय ने हाल ही में पिछले महीने ही कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी.   कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने वाली बात जब बाकी जजों को पता चली तो उन्होंने स्टेट कॉउंसल से कई सवाल जवाब किए और उस लेटर की मांग की जिसमें थिप्से के कांग्रेस ज्वाइन करने की बात लिखी हो. जजों को वो लेटर हैंडओवर की गई जिसमें लिखा था कि जस्टिस अभय एम थिप्से ने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है. उसके बाद ही यह फैसला लिया गया और उन्हें इस कमिटी से हटा दिया गया. इस तरह का पहला मामला है जब किसी जज को किसी राजनीतिक पार्टी ज्वाइन करने की ऐसी सजा मिली है.

रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज अभय एम थिप्से को कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी मिलने के बाद यह फैसला लिया. उन्हें महाराष्ट्र सरकार और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के बीच राजकोषीय विवाद की मध्यस्थता करने के लिए मनोनीत किया गया था. अभय ने हाल ही में पिछले महीने ही कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी. 

कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने वाली बात जब बाकी जजों को पता चली तो उन्होंने स्टेट कॉउंसल से कई सवाल जवाब किए और उस लेटर की मांग की जिसमें थिप्से के कांग्रेस ज्वाइन करने की बात लिखी हो. जजों को वो लेटर हैंडओवर की गई जिसमें लिखा था कि जस्टिस अभय एम थिप्से ने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है. उसके बाद ही यह फैसला लिया गया और उन्हें इस कमिटी से हटा दिया गया. इस तरह का पहला मामला है जब किसी जज को किसी राजनीतिक पार्टी ज्वाइन करने की ऐसी सजा मिली है. 

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