रोस्टर मामले पर जस्टिस चेलमेश्वर बोले- फैसला दूंगा तो 24 घंटे में फिर पलट जाएगा

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर मनमुटाव का मामला सामने आया है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के मास्टर ऑफ रोस्टर के मुद्दे पर दायर की गई शांति भूषण की याचिका पर जस्टिस चेलमेश्वर ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है.देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर मनमुटाव का मामला सामने आया है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के मास्टर ऑफ रोस्टर के मुद्दे पर दायर की गई शांति भूषण की याचिका पर जस्टिस चेलमेश्वर ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है.  इस दौरान जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि 24 घंटे के अंदर ही उनका आदेश पलट दिया जाए. मैं दो महीने बाद ही रिटायर हो रहा हूं. आगे देश खुद ही फैसला कर लेगा. आपको बता दें कि जस्टिस चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद सबसे सीनियर जज हैं.   याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि मेरे लिए कहा जा रहा है कि मैं किसी ऑफिस को हथियाने के लिए ये सब कर रहा हूं. अगर किसी को चिंता नहीं है तो मैं भी चिंता नहीं करूंगा. देश के इतिहास को देखते हुए मैं जाहिर तौर पर इस मामले को नहीं सुनूंगा.  आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस चेलमेश्वर के सामने शांति भूषण की याचिका को मेंशन करते हुए कहा कि उन्होंने चीफ जस्टिस के मास्टर ऑफ रोस्टर को चुनौती दी है. इसमें कहा गया है कि केसों के आवंटन का काम कॉलेजियम के जजों को करना चाहिए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री का डायरी नंबर नहीं दे रही है. इस मामले की सुनवाई वरिष्ठ जजों को ही करनी चाहिए.  जस्ट‍िस कुरियन जोसेफ ने भी लिखी चिट्ठी  इससे पहले गुरुवार सुबह ही जस्टिस कुरियन जोसेफ ने CJI को एक चिट्ठी लिखते हुए कहा था कि सु‍प्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में है और यदि जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार की चुप्पी पर कोर्ट कुछ नहीं करता है तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.  जस्ट‍िस कुरियन जोसेफ ने अपने लेटर में लिखा है कि कोलेजियम द्वारा एक जज और एक वरिष्ठ वकील को तरक्की देकर सर्वोच्च न्यायालय में लाने की सिफारिश को दबा कर बैठे रहने के सरकार के अभूतपूर्व कदम पर यदि कोर्ट ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.  असल में जस्ट‍िस कुरियन कोलेजियम के फरवरी के उस निर्णय का हवाला दे रहे हैं जिसमें वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा और उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्ट‍िस के.एम. जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की गई है.  पहले भी जता चुके हैं विरोध  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के 4 सिटिंग जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी.  इसके अलावा हाल ही जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि अगर CJI दीपक मिश्रा के बाद अगर जस्टिस रंजन गोगोई को CJI नहीं बनाया जाता है तो हमने जो बात कही थी उसपर शक सही था. आपको बता दें कि जस्टिस चेलमेश्वर 22 जून को रिटायर हो रहे हैं तो वहीं दीपक मिश्रा अक्टूबर के महीने में रिटायर होंगे.

इस दौरान जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि वह नहीं चाहते हैं कि 24 घंटे के अंदर ही उनका आदेश पलट दिया जाए. मैं दो महीने बाद ही रिटायर हो रहा हूं. आगे देश खुद ही फैसला कर लेगा. आपको बता दें कि जस्टिस चेलमेश्वर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद सबसे सीनियर जज हैं. 

याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि मेरे लिए कहा जा रहा है कि मैं किसी ऑफिस को हथियाने के लिए ये सब कर रहा हूं. अगर किसी को चिंता नहीं है तो मैं भी चिंता नहीं करूंगा. देश के इतिहास को देखते हुए मैं जाहिर तौर पर इस मामले को नहीं सुनूंगा.

आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने जस्टिस चेलमेश्वर के सामने शांति भूषण की याचिका को मेंशन करते हुए कहा कि उन्होंने चीफ जस्टिस के मास्टर ऑफ रोस्टर को चुनौती दी है. इसमें कहा गया है कि केसों के आवंटन का काम कॉलेजियम के जजों को करना चाहिए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री का डायरी नंबर नहीं दे रही है. इस मामले की सुनवाई वरिष्ठ जजों को ही करनी चाहिए.

जस्ट‍िस कुरियन जोसेफ ने भी लिखी चिट्ठी

इससे पहले गुरुवार सुबह ही जस्टिस कुरियन जोसेफ ने CJI को एक चिट्ठी लिखते हुए कहा था कि सु‍प्रीम कोर्ट का अस्तित्व खतरे में है और यदि जजों की नियुक्ति के मामले में सरकार की चुप्पी पर कोर्ट कुछ नहीं करता है तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.

जस्ट‍िस कुरियन जोसेफ ने अपने लेटर में लिखा है कि कोलेजियम द्वारा एक जज और एक वरिष्ठ वकील को तरक्की देकर सर्वोच्च न्यायालय में लाने की सिफारिश को दबा कर बैठे रहने के सरकार के अभूतपूर्व कदम पर यदि कोर्ट ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा.

असल में जस्ट‍िस कुरियन कोलेजियम के फरवरी के उस निर्णय का हवाला दे रहे हैं जिसमें वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा और उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्ट‍िस के.एम. जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की गई है.

पहले भी जता चुके हैं विरोध

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के 4 सिटिंग जजों जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरीके से काम नहीं कर रहा है, अगर ऐसा चलता रहा तो लोकतांत्रिक परिस्थिति ठीक नहीं रहेगी. उन्होंने कहा कि हमने इस मुद्दे पर चीफ जस्टिस से बात की, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी.

इसके अलावा हाल ही जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि अगर CJI दीपक मिश्रा के बाद अगर जस्टिस रंजन गोगोई को CJI नहीं बनाया जाता है तो हमने जो बात कही थी उसपर शक सही था. आपको बता दें कि जस्टिस चेलमेश्वर 22 जून को रिटायर हो रहे हैं तो वहीं दीपक मिश्रा अक्टूबर के महीने में रिटायर होंगे.

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