लापरवाही, हादसा या साजिश : जानिए मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसे की पूरी जानकारी…

मुजफ्फरनगर के खतौली में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की 14 बोगियां शनिवार की शाम पटरी से उतर गईं। हादसे में कम से कम 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि 81 से अधिक घायल हुए हैं। शाम करीब 5.40 बजे हुए हादसे के तत्काल बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। थोड़ी ही देर में जिला प्रशासन की टीम, पुलिस और रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच कर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुट गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि रेल मंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार पीड़ितों की हरसंभव सहायता कर रहे हैं। गाजियाबाद से 45 कर्मियों और खोजी कुत्तों के साथ एनडीआरएफ की दो टीमें घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य कर रही हैं। दुर्घटना का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है, लेकिन जहां दुर्घटना हुई है वहां शुक्रवार की रात ट्रैक में क्रैक का पता चला था। सुबह से ही इसकी मरम्मत का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से कई ट्रेनों को एहतियातन धीमी गति से चलाया गया, लेकिन उत्कल एक्सप्रेस की गति काफी तेज थी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने दुर्घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और कहा कि वह खुद हालात पर नजर रख रहे हैं। घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हादसा इतना जबरदस्त था कि तीन बोगियां एक दूसरे के ऊपर चढ़ गईं। बोगियों को काटकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है। दो बोगी ट्रैक से उतरकर तिलकराम इंटर कालेज की दीवार से टकराकर रुकीं। एक बोगी जगत कालोनी गेट के पास स्थित एक मकान में घुस गई। यहां से पांच-छह घायलों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। छह बोगी इंजन के साथ आगे चली गईं, करीब एक किलोमीटर आगे जाकर चालक ने ट्रेन को रोका। हादसे के बाद ट्रेन में सवार यात्रियों में चीख पुकार मच गई। लोगों ने घायलों को बोगियों से निकाल कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। मृतकों में कई महिलाएं और एक बच्ची भी है। इसके अलावा यहां लाए गए 60 घायलों का प्राथमिक उपचार किया गया। गंभीर घायलों को बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज और मेरठ मेडिकल कालेज अस्पताल भेजा गया। कुछ को निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। आसपास के जिलों की एंबुलेंस भी खतौली बुला ली गई हैं। मृतकों की अभी पहचान नहीं हो पाई है। मौके पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि पीड़ितों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराई जा रही है।लापरवाही, हादसा या साजिश : जानिए मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसे की पूरी जानकारी...दर्दनाक हादसा: बस-बाइक में आमने सामने हुई टक्कर, 3 की मौत, मरने वालों में दो महिलाएं…

लेखपाल और सहायक ने कहा, मौत को सामने देख कांप उठी थी रूह

उत्कल एक्सप्रेस में सवार चकबंदी लेखपाल मैन कुमार और सहायक तेजेंद्र ने मौत को काफी करीब से देखा। इन दोनों चश्मदीदों के अनुसार अचानक जोरदार धमाका हुआ तो हम तेज झटका लगने से सीट से नीचे आ गिरे। तेजेंद्र कुमार के अनुसार मौत सामने थी और ट्रेन के पलटने पर आंखें बंद हो गई थीं। मंजर खौफनाक था, जिसे देखकर रूह कांप रही थी। देवबंद निवासी लेखपाल मैन कुमार और देवबंद थाना क्षेत्र के गांव भदपुर निवासी सहायक तेजेंद्र मोदीपुरम के चकबंदी ऑफिस में कार्यरत हैं। शनिवार शाम ये दोनों ट्रेन से देवबंद जा रहे थे। खतौली में ट्रेन में हादसा हो गया। लेखपाल मैन कुमार ने बताया कि वह आराम से बैठे हुए थे तभी जोरदार धमाका हुआ और तेज झटके के साथ ट्रेन रुक गई। कुछ पलों तक तो होश ही नहीं आया। जब संभले तो देखा कि सब एक-दूसरे के ऊपर-नीचे पड़े थे। हम दोनों भी घायल हो चुके थे। किसी तरह बाहर निकले तो देखा कि कई बोगियां पलटी हुई थीं। बच्चे, महिलाएं और पुरुष मदद के लिए चीख रहे थे। दूर-दूर तक खून ही खून दिखाई दे रहा था। चारों तरफ चीख पुकार मची थी। किसी को कुछ नहीं पता था कि कौन कहां है। पेशी कानूनगो संजीव चौहान ने बताया कि हादसे के बाद मैन कुमार ने फोन के माध्यम से सूचना दी थी, जिसके बाद टीम मौके पर गई और घायलों का उपचार कराया गया।

हादसे का मंजर देखकर सहमे लोग
कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे का मंजर देखकर लोग सहम उठे। एक-दूसरे पर चढ़ी बोगियों के अंदर से यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोगों की भीड़ मदद के लिए घटनास्थल पर पहुंच गई। ट्रेन हादसे के शिकार लोगों को पुलिस और मददगारों ने बोगियों के अंदर से यात्रियों को बाहर निकालना शुरूकिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हादसे के वक्त ट्रेन की गति काफी तेज थी। देखते ही देखते 21 बोगियों की एक्सप्रेस ट्रेन के 11 डिब्बे पटरी उखाड़ते हुए उतर गए। तीन बोगियां एक-दूसरे पर चढ़ गई। एक बोगी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। इन बोगियों के भीतर से यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर लोग घटनास्थल पर पहुंचे। हादसे का मंजर देखकर एकत्र भीड़ भी सहम गई। हादसे के थोड़ी देर बाद ही मौके पर पहुंची पुलिस और लोगों ने बोगियों से यात्रियों को निकालना शुरू किया। पुलिस और बचाव कार्य में जुटे लोगों ने यात्रियों के शव और घायलों को बोगी से बाहर निकालकर एंबुलेंस के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया।लापरवाही, हादसा या साजिश : जानिए मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसे की पूरी जानकारी...

अपनों का हाल जानने को बेचैन रहे लोग
कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने पर हर तरफ मची अफरातफरी के बीच लोग अपनों का हाल जानने के लिए बेचैन हो उठे। मेरठ में भी तमाम व्यापारी मुजफ्फरनगर जनपद से सामान लेने आते हैं तो सैकड़ों लोग रोज नौकरी करने आते हैं। इनमें अधिकांश ट्रेन से ही सफर करते हैं। ऐसे में ट्रेन हादसे के बाद सभी में बेचैनी बढ़ गई। मेरठ शहर आसपास के जनपदों में
व्यापार का बड़ा केंद्र है। यहां थोक का व्यापार भी होता है। इसके अलावा तमाम उद्योगों और फर्मों में भी आसपास के जनपदों के लोग काम करते हैं। ये लोग अपने निजी वाहनों के साथ ही बसों और ट्रेन से भी सफर करते हैं। शनिवार को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना पर सभी में हड़कंप मच गया। हर कोई अपने परिचित और करीबी का हाल जानने के लिए
बेचैन हो उठा। तमाम लोग जिनकी रिश्तेदारी मुजफ्फरनगर में हैं, उन्होंने भी फोन कर एक-दूसरे की खैर खबर ली।

अंतिम यात्रा’ बना कलिंग उत्कल का सफर
चारों तरफ खून से लथपथ लोग, ट्रेन के कोचों के नीचे दबे शव, चीखती-चिल्लातीं महिलाएं और मदद के लिए दौड़ते लोग। शनिवार देर शाम यह वीभत्स नजारा था खतौली में उस स्थान का जहां भीषण ट्रेन हादसा हुआ। कलिंग उत्कल एक्सप्रेस का सफर कई यात्रियों के लिए अंतिम यात्रा बन गई। सोमवती अमावस्या होने की वजह से दूसरे प्रांतों के लोग भी ट्रेन से धार्मिक नगरी हरिद्वार
जा रहे थे। यात्रियों में महिलाओं की संख्या भी काफी थी। ट्रेन का खतौली में ठहराव नहीं है, लिहाजा ट्रेन हवा से बातें करती हुई कस्बे से होकर गुजरती है। अचानक हादसा हुआ और ट्रेन के डिब्बे बिखरते चले गए। कई डिब्बे तो एक-दूसरे पर चढ़ गए। ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतरे। हादसे का शिकार हुए ज्यादातर डिब्बे बीच से पलटे। रसोई यान का डिब्बा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। दो डिब्बे पटरी किनारे चौधरी तिलराम इंटर कॉलेज में घुस गए। मौके पर नजारा भयावह था। महिलाओं और बच्चों के चीखने-चिल्लाने का शोर मचा हुआ था। कोलकाता के राजेश दास के साथ मोहल्ले की करीब 40 महिलाएं भी कोच एस-1 में सवार थीं, सभी यात्री हरिद्वार स्नान के लिए जा रहे थे। हादसे के किसी तरह राजेश दास बाहर निकले और लोगों की मदद से अपने साथी यात्रियों को बाहर निकाला। चार महिलाएं लापता थीं, उनकी तलाश के लिए वह रोते-बिलखते फिर रहे थे। राजेश दास ने बताया कि ट्रेन तेज गति से दौड़ रही थी। अचानक ब्रेक लगा और डब्बे पटरी से दो-ढाई फुट ऊपर उछल गए। इसके अलावा मध्यप्रदेश के सतना जिले की राजबाला पति के साथ हरिद्वार जा रही थी। हादसे के बाद से उसके पति का कोई पता नहीं है। महिला रोती-चीखती फिर रही थी, लेकिन उसकी मदद करने वाला कोई नहीं था। जैसे ही कोई लाश निकाली जाती, राजबाला दौड़़कर वहां पहुंचती। देर रात तक उसके पति का कोई पता नहीं चल पाया। 

मौत सामने से गुजर गई
गाजियाबाद निवासी कुलदीप यादव उन लोगों में से हैं, जो हादसे में सकुशल बच पाए। कुलदीप ने बताया कि अचानक ट्रेन में झटका लगा और तेज धमाके के साथ डब्बे पटरी से उतरते चले गए। कुलदीप का कहना है कि उनके डब्बे में ज्यादा भीड़ नहीं थी। वह हादसे के बाद बचकर बाहर निकले। बाहर का नजारा देखकर लगा कि मौत सामने से गुजर गई।

मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट में कंट्रोल रूम बना
हादसे के बाद मुजफ्फरनगर के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट परिसर में कंट्रोल रूम स्थापित किया। एडीएम वित्त सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कोई भी व्यक्ति दुर्घटना से संबंधित जानकारी के लिए फोन नंबर 0131- 2436918, 2436103, 2436564 पर संपर्क कर जानकारी का आदान-प्रदान कर सकता है।

500 मीटर तक घिसटते चले गए डिब्बे
हादसे के वक्त ट्रेन की रफ्तार 100 के आसपास थी। एक डिब्बा अचानक पटरी से उतरा तो एक के बाद एक छह डिब्बे पटरी से उतरकर एक दूसरे के ऊपर चढ़ते चले गए। यात्रियों में चीख पुकार मच गई। रफ्तार अधिक होने के कारण डिब्बे पटरी से उतरने के बाद भी करीब 500 मीटर तक घिसटते चले गए। उत्कल एक्सप्रेस के हादसे का शिकार होने की जानकारी लगते ही खतौली और दौराला थाने की पुलिस सबसे पहले मौके पर पहुंची। डिब्बों में फंसे यात्रियों को निकालने के लिए जद्दोजहद हो रही थी। इंजन पटरी पर खड़ा था। ट्रेन के बीच वाले छह डिब्बे एक दूसरे के ऊपर चढ़े थे। उनमें सवार यात्री चिल्ला रहे थे। पीछे के छह डिब्बे भी पटरी पर थे। पलटे डिब्बों से फंसे यात्रियों को निकालने के लिए पुलिस, यात्री और स्थानीय लोग जुट गए। एसओ दौराला धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक, हादसे के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इंजन करीब 500 मीटर तक पलटे डिब्बों को खींचता चला गया।

रेलवे की लापरवाही, यात्रियों में आक्रोश
यात्रियों ने रेलवे पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। आरोप है कि पटरी की मरम्मत कराई जा रही थी। तभी उत्कल एक्सप्रेस वहां से गुजरी। पटरी कटी हालत में मिली हैं। पुलिस ने यात्रियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह आरोप लगाकर हंगामा करते रहे।

बड़ा ट्रेन हादसा
अगर शनिवार को 36 मिनट देर नहीं हुई होती तो हादसे का शिकार जनशताब्दी एक्सप्रेस होती। मेरठ कैंट स्टेशन पर करीब चार घंटे तक खड़ी रही जनशताब्दी एक्सप्रेस को वापस कर वाया हापुड़-मुरादाबाद के रास्ते देहरादून भेजा गया। पुरी (उड़ीसा) से हरिद्वार जाने वाली कलिंग उत्कल एक्सप्रेस का मेरठ सिटी स्टेशन पर आगमन शाम 4 बजकर 51 मिनट का है। यहां ट्रेन का स्टॉपेज 2 मिनट का है। शनिवार को यह ट्रेन 15 मिनट लेट होकर शाम 5 बजकर 8 मिनट पर अपने निर्धारित प्लेटफार्म नंबर 3 पर पहुंची थी। दो मिनट बाद यह ट्रेन 5 बजकर 10 मिनट पर हरिद्वार के लिए रवाना हुई। लेकिन 36 मिनट बाद खतौली पहुंची यह ट्रेन 5 बजकर 46 मिनट पर हादसे का शिकार हो गई। वहीं, दिल्ली से देहरादून जाने वाली सुपर फास्ट जनशताब्दी एक्सप्रेस का सिटी स्टेशन पर आने का समय शाम 4 बजकर 40 मिनट है। शनिवार को यह ट्रेन 36 मिनट की देरी से सिटी स्टेशन पर शाम 5 बजकर 16 मिनट पर पहुंची। उत्कल एक्सप्रेस इससे पहले ही हरिद्वार के लिए रवाना हो चुकी थी। अगर जनशताब्दी एक्सप्रेस लेट नहीं होती तो ये हादसा जनशताब्दी के साथ होता।

लापरवाही ने कराया बड़ा रेल हादसा 
खतौली में हुए रेल हादसे के पीछे रेलवे की लापरवाही भी सामने आ रही है। ट्रैक क्षतिग्रस्त है, यह बात जानकारी में होने के बाद भी विभाग इस हादसे को नहीं रोक पाया, इससे कई सवाल उठ रहे हैं। क्या ट्रैक क्षति का आकलन ठीक से नहीं किया गया। बड़ा सवाल यह उठ  रहा है कि जिस ट्रैक की पटरी को बदला गया था, उस पर तेज रफ्तार से ट्रेन कैसे दौड़ रही थी। सही स्थिति तो जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन यह रेल हादसा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर गया है। बताया जा रहा है कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की रफ्तार करीब 105 किमी प्रति घंटा थी। रेल यात्रियों ने भी बताया कि ट्रेन की स्पीड काफी तेज थी। अचानक ब्रेक लगाए जाने को हादसे की एक वजह बताया जा रहा है। शुक्रवार रात में ही पटरी में क्रेक आ गया था और क्षतिग्रस्त ट्रैक से ही करीब 12 ट्रेनें गुजरीं। रात में रेलवे विभाग को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। जिस कारण रात में शालीमार, इंटरसिटी, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस मालगाड़ी सहित करीब एक दर्जन ट्रेनें इस टूटे हुए ट्रैक से धड़ाधड़ गुजरती रही। शनिवार की सुबह पेट्रोलिंग के दौरान ट्रैक क्षतिग्रस्त होने का पता चला सका। जिसके बाद रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। सभी ट्रेनें को धीमी गति से निकलवाया गया और क्षतिग्रस्त हुए हिस्से को बदला गया। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त ट्रैक या जिस ट्रैक की मरम्मत की जा रही हो, उस पर कासन देकर ट्रेनों को मात्र 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजारा जाता है। अब सवाल है कि कलिंग उत्कल कैसे यहां से 105 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरी। उसे कासन नहीं दिया गया था या फिर ट्रेन के चालक ने कासन नहीं देखा। हादसे से पहले स्टेशन मास्टर राजेंद्र कुमार ने बताया था कि  रेलवे ट्रैक के क्रेक होने की जानकारी मिलने पर उस टुकड़े को बदलवा दिया गया है। ट्रैक अक्सर क्रेक हो जाते हैं। इस पर से ट्रेनों के गुजरने से कोई नुकसान नहीं होता है। ट्रैक को चेक करने को लगातार पेट्रोलिंग की जाती है। उनका बयान ही यह बता रहा है कि उन्होंने उस समय किस तरह से ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने की घटना को लिया था।

जून में भी इसी जगह क्षतिग्रस्त हुआ था ट्रैक
जिस जगह शनिवार को रेल हादसा हुआ, उसी जगह जून माह में भी ट्रैक क्षतिग्रस्त हुआ था। तब तिलकराम इंटर कालेज में सफाई कर्मी राधेश्याम की सजगता से उस समय बड़ा रेल हादसा टल गया था। इसी जगह फिर से रेल ट्रैक टूट गया और एक बड़ा रेल हादसा हो गया। शनिवार को रेल हादसा तिलकराम इंटर कालेज और जगत कालोनी के पास हुआ है।  गत 10 जून की रात भी इसी स्थान पर रेलवे ट्रैक टूट गया था और रात भर ट्रेनें टूटी पटरी से गुजरती रही थी। 11 जून की सुबह करीब छह बजे तिलकराम इंटर कालेज के सफाई कर्मी राधेश्याम ने क्षतिग्रस्त ट्रैक को देखा। उन्होंने इसकी सूचना आसपास के लोगों को दी। इसी बीच उन्होंने मुजफ्फरनगर की ओर से एक पैसेंजर ट्रेन को आते हुए देखा। आनन फानन में वह दौड़कर  कालेज परिसर स्थित अपने घर से एक लाल कपड़ा लेकर आए और उसे लहराते हुए ट्रेन की ओर दौड़ पड़े थे। उनको लाल कपड़ा लेकर दौड़ता देख, ट्रेन के चालक को खतरे का एहसास हुआ और उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोका, जिसके चलते बड़ा हादसा टल गया था।

रेल हादसा
दुर्घटना के बाद मेरठ- सहारनपुर रूट को बंद कर दिया गया। कुछ ट्रेनों के रद्द होने की सूचना है तो कई ट्रेनों का रूट बदला गया। रेल अधिकारियों के अनुसार  सहारनपुर से मेरठ जाने वाली नौचंदी लिंक एक्सप्रेस और कई पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया गया। अमृतसर जाने वाली गोल्डन टेंपल एक्सप्रेस को दिल्ली से सीधा वाया पानीपत अंबाला निकाला गया। अहमदाबाद मेल, देहरा- बांद्रा एक्सप्रेस को भी नई दिल्ली से वाया शामली -टपरी से सहारनपुर निकाला गया। दिल्ली से मेरठ के रास्ते जम्मू तवी जाने वाली शालीमार एक्सप्रेस को कैंट स्टेशन पर ही रोक दिया गया। मेरठ सिटी स्टेशन पर वापस लाकर शालीमार एक्सप्रेस को रात 8:10 बजे वापस दिल्ली के लिए रवाना कर दिया गया। कैंट स्टेशन पर खड़ी जन शताब्दी एक्सप्रेस को तीन घंटे बाद वापस करके वाया हापुड़-गजरौला से भेजा गया। दिल्ली हरिद्वार पैसेंजर, सहारनपुर पैसेंजर, डीएमयू को मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन पर ही रोक दिया गया। रेल यातायात प्रभावित होने का असर रोडवेज बसों पर साफ दिखाई दिया। बसों में भीड़ बढ़ गयी।

मोदीपुरम के अस्पताल में मची अफरातफरी
खतौली में उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिलते ही मेरठ से काफी संख्या में एंबुलेंस खतौली रवाना कर दी गईं। जहां से घायलों को उपचार के लिए मोदीपुरम स्थित एसडीएस ग्लोबल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में घायलों की चीख पुकार से अफरातफरी का माहौल बना था। देर रात तक घायलों का उपचार चलता रहा। 

दौराला स्टेशन पर यात्रियों का हंगामा
खतौली में ट्रेन हादसे के बाद सभी स्टेशनों पर ट्रेनों के रुकने का सिलसिला शुरू हो गया। रेलवे लाइन पर ट्रेनें खड़ी हो गई। जिसके चलते यात्रियों को भारी परेशानी से गुजरना पड़ा। कैंट स्टेशन पर शालीमार ट्रेन, दौराला में सुपर एक्सप्रेस ट्रेन एवं सकौती में जन शताब्दी ट्रेन ट्रैक पर रोक ली गई।  दौराला रेलवे स्टेशन पर सुपर एक्सप्रेस रुकने के बाद उसमें सवार यात्रियों ने स्टेशन मास्टर से अपने टिकट के रुपये वापस मांगे। स्टेशन मास्टर ने इससे इनकार किया तो यात्रियों ने करीब दो घंटे तक हंगामा किया। सूचना पर पहुंची रेलवे पुलिस ने किसी तरह यात्रियों को समझा बुझाकर शांत किया।

बीती रात भी टूटी पटरी से गुजरीं एक दर्जन ट्रेनें
खतौली में हुए रेल हादसे के पीछे रेलवे की लापरवाही भी सामने आ रही है।  शुक्रवार रात में ही पटरी में क्रेक आ गया था और क्षतिग्रस्त ट्रैक से ही करीब 12 ट्रेनें गुजरीं। शनिवार सुबह पेट्रोलिंग के दौरान ट्रैक क्षतिग्रस्त होने का पता चला। जिसके बाद सभी ट्रेनें को धीमी गति से निकलवाया गया और क्षतिग्रस्त हुए हिस्से को बदला गया था।  ट्रैक क्षतिग्रस्त होने की जानकारी के बाद भी रेलवे विभाग इस हादसे को नहीं रोक पाया, इससे कई सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस समय हादसा हुआ, उस समय कलिंग उत्कल एक्सप्रेस की रफ्तार करीब 105 किमी प्रतिघंटा थी। रेल यात्रियों ने भी बताया कि ट्रेन की स्पीड काफी तेज थी।  इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रैक क्षति की आकलन ठीक से नहीं किया गया। बड़ा सवाल यह है कि जिस ट्रैक की पटरी को बदला गया था, उस पर तेज रफ्तार से ट्रेन कैसे दौड़ रही थी।  ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त ट्रैक या जिस ट्रैक की मरम्मत की जा रही हो, उस पर कॉशन देकर ट्रेनों कम स्पीड से गुजारा जाता है। अब सवाल है कि कलिंग उत्कल को कॉशन नहीं दिया गया था या  ट्रेन के चालक ने कॉशन नहीं देखा। सही स्थिति तो जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन यह रेल हादसा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर गया है। इससे पहले स्टेशन मास्टर राजेंद्र कुमार ने बताया था कि रेलवे ट्रैक के क्रेक होने की जानकारी मिलने पर उस टुकड़े को बदलवा दिया गया है। ट्रैक अक्सर क्रेक हो जाते हैं। इस पर ट्रेनों के गुजरने से कोई नुकसान नहीं होता है। ट्रैक को चेक करने के लिए लगातार पेट्रोलिंग की जाती है। उनका बयान ही यह बता रहा है कि उन्होंने उस समय किस तरह से ट्रैक के क्षतिग्रस्त होने की घटना को लिया था।

चाय की दुकान में घुस गए दो डिब्बे
हादसे के दौरान ट्रेन के दो डिब्बे चौधरी तिलकराम इंटर कॉलेज के गेट पर स्थित एक चाय की दुकान में घुस गए। जगत कालोनी निवासी हरि की चाय की दुकान पर शाम के वक्त तीन-चार ग्राहक चाय पी रहे थे। हरि ग्राहकों के लिए बिस्कुट लेने के लिए दुकान के अंदर से घुसा इसी दौरान ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरते हुए उसकी दुकान और कॉलेज में घुस गए। बुलडोजर पहुंचने पर दुकान की पीछे की दीवार तोड़कर हरि को निकाल लिया गया। हरि ने बताया कि उसकी दुकान पर चाय पी रहे तीन लोगों की मौत हो चुकी है। उधर, खतौली में मौके वेल्डिंग मशीन मिली है। हादसे के बाद से रेलवे कर्मचारियों का अतापता नहीं है। फिलहाल पुलिस हादसे के पीछे किसी साजिश से भी इनकार नहीं कर रही है। हालांकि मौके पर मौजूद एडीजी मेरठ प्रशांत कुमार का कहना है कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा। सभी बिंदुओं पर छानबीन की जा रही है। आतंकी साजिश को भी जांच का बिंदु रखा गया है।

ट्रेन हादसे में आतंकी साजिश का अंदेशा 
खतौली में उत्कल एक्सप्रेस हादसे में आतंकी साजिश का अंदेशा जताया जा रहा हैं। हादसे का कारण पटरी कटी हालत में मिलना बताया गया है। मामले की जांच के लिए दिल्ली से एक स्पेशल दस्ता, एटीएस और एसटीएफ की टीम मौके पर पहुंच गयी हैं। ट्रेन में फंसे लोगों को निकालने के लिए मेरठ समेत कई जनपदों की पुलिस फोर्स खतौली भेजी गई हैं। पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल एक्सप्रेस शनिवार शाम करीब 5:46 बजे खतौली में पलट गई। ट्रेन के छह डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए। अभी 14 लोगों के मरने और 100 से अधिक लोगों के घायल होने की शुरुआती जानकारी मिल रही है। वेस्ट यूपी में कई जनपद आतंकियों के निशाने पर हैं। स्वतंत्रता दिवस पर भी आतंकी घटना के इनपुट खुफिया विभाग को मिले थे। ट्रेन हादसा होने पर अंदेशा जताया जा रहा है कि यह आतंकियों की साजिश भी हो सकती है। इस अंदेशे को लेकर मेरठ, दिल्ली व लखनऊ में खलबली मची है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल हादसा नहीं हो सकता। आतंकी साजिश की पुलिस और स्पेशल टीम जांच पड़ताल करने में जुटी हैं। हादसे की जानकारी मिलते ही एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार पुलिस टीम के साथ खतौली पहुंचे। एडीजी ने मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर समेत कई जिलों से पुलिस फोर्स को खतौली पहुंचने के निर्देश दिए। ट्रेन में फंसे लोगों को तुरंत निकालकर अस्पताल पहुंचाने को कहा।

हेल्पलाइन नंबर
पीड़ितों की मदद के लिए मुजफ्फरनगर प्रशासन ने एक कंट्रोल रूम की भी व्यवस्था की है जिसके नंबर हैं :
0131-2436918, 0131-2436103 और 0131-2436564,
दिल्ली रेलवे स्टेशन 1072, 01123962389, 23967332
हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन 01124359748, 24239748
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन 01123342954, 23341074
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन 9412715210
मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन 0131 2433099
हरिद्वार 9760534054, 01334227477 to 80
मुरादाबाद 05911072, 05912420324
रुड़की 9760534056

मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख देगी ओडिशा सरकार 
भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने खतौली के पास दुर्घटनाग्रस्त पुरी-उत्कल एक्सप्रेस के मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। दिल्ली में मौजूद पटनायक ने इस मामले पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु से भी बात की और पीड़ित यात्रियों की मदद के लिए सहयोग मांगा। उन्होंने मुख्य सचिव को भी रेल प्रशासन के संपर्क में रहने का निर्देश दिया है। ट्रेन के यात्रियों का हालचाल जानने भुवनेश्वर तथा कटक स्टेशनों पर पहुंचे रिश्तेदारों के लिए ईस्ट कोस्ट रेलवे ने 1072 नंबर का हेल्पलाइन शुरू किया है जहां दुर्घटना से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 

रेल मंत्रालय देगा 3.5 लाख, सीएम योगी देंगे दो-दो लाख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेल दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके साथ ही इस घायलों को प्रदेश सरकार 50-50 हजार रुपये की आर्थिक मदद देगी। यह मदद रेल मंत्रालय से मिलने वाली आर्थिक सहायता से अलग होगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को 3.5 लाख रुपये और गंभीर घायलों को 50 हजार रुपये देने का एलान किया है। इसके अलावा उन्होंने मामूली रूप से घायल प्रत्येक यात्री के लिए 25-25 हजार रुपये की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्य के लिए हेवीवेट क्रेन और गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

541 यात्री सवार थे हरिद्वार व रुड़की जाने वाले   
मेरठ। उत्कल एक्सप्रेस के 19 कोचों में हरिद्वार व रुड़की तक जाने वाले 541 यात्री सवार थे। यह जानकारी पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम ने दी। यहां के अधिकारियों ने बताया कि पुरी से हरिद्वार जाने वाली ट्रेन के एसी टू कोच संख्या ए-1 में 19, एसी थ्री कोच संख्या बी-1 में 7, बी-2 में 22, बी-3 में 26, बी-4 में 30 यात्री सवार थे। इसके अलावा स्लीपर कोच संख्या एस-1 में 21, एस-2 में 24, एस-3 में 17, एस-4 में 25, एस-5 में 19, एस-6 में 58, एस-7 में 64, एस-8 में 32, एस-9 में 43, एस-10 में 50, एस-11 में 42 और एस-12 में 42 यात्री थे।
 

मेरठ के अस्पतालों में आरक्षित किए गए 500 से ज्यादा बेड
खतौली में हुए ट्रेन हादसे केमद्देनजर मेरठ में सरकारी और निजी अस्पतालों में 500 से ज्यादा बेड आरक्षित रखे गए हैं, जबकि सरकारी और निजी 52 एंबुलेंस वहां भेजी गई हैं। सीएमओ और आईएमए के डॉक्टर भी वहां पहुंच गए। इसके अलावा मेडिकल और जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों को अस्पतालों में बुला लिया गया है। जिला अस्पताल में 70 बेड आरक्षित हैं, जबकि मेडिकल में 31 बेड। इनके अलावा सभी निजी बड़े अस्पतालों में 10 से 15 बेड आरक्षित रखने की हिदायत दी गई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार ने बताया कि जरूरत पड़ने पर और भी बेड आरक्षित किए जा सकते हैं। दूसरी तरफ, मेरठ से आईएमए के डॉक्टरों की एक टीम घटनास्थल पर पहुंच गई है। इसकेअलावा वे उन अस्पतालों में भी जाएंगे, जहां घायल भर्ती हैं। इनमें आईएमए अध्यक्ष डॉ. वीरोत्तम तोमर, डॉ. अंबेश पंवार, डॉ. रवि भगत, डॉ. सूर्य, डॉ. उमंग और डॉ. मेधावी तोमर आदि हैं। जिला अस्पताल में एसआईसी समेत सभी डॉक्टर मौजूद थे।
बड़ा रेल हादसा
पापा मेरी ट्रेन पलट गई है। जल्दी आओ। मुझे बचाओ। बेटी का फोन सुनते ही किरनपाल पसीना पसीना हो गए। मुजफ्फरनगर के गांव जागाहेड़ी निवासी किरनपाल ने बताया कि उनकी बेटी सोनिका (21) मेरठ में एलआईसी दफ्तर में काम करती है। शनिवार शाम वह उत्कल एक्सप्रेस से मुजफ्फरनगर आ रही थी। उसके साथ उसकी कुछ सहेलियां भी थीं। रेल हादसा होते ही सोनिका का फोन आया। बोली पापा मेरी ट्रेन पलट गई है। जल्दी आओ ,मुझे बचाओ। वह काफी घबराई हुई थी। ये तक नहीं बता सकी कि ट्रेन कहां पलटी है। सोनिका का फोन आते ही परिवार में कोहराम मच गया। उन्होंने मुजफ्फरनगर अपने रिश्तेदारों के यहां फोन करके जानकारी ली। इसके बाद पता चला कि खतौली में रेल हादसा हुआ है। पूरा परिवार वहां दौड़ा। सोनिका को एक अस्पताल में ले जाया गया था। दूसरे डब्बे में बैठी उसकी दो सहेलियां भी घायल थीं।

गर्भ में ही चली गई मासूम की जान
किरनपाल ने बताया कि सोनिका के साथ ट्रेन में आ रही उसकी एक सहेली तीन माह की गर्भवती थी। हादसे में वह भी घायल हो गई। उसके पेट में भी चोट आई। जिससे उसके गर्भ में पल रहा बच्चा नहीं बच पाया। परिजन उसे निजी चिकित्सकों के यहां ले गए थे। सहेली की जान भी खतरे में थी। घायल सोनिका अपने से ज्यादा अपनी सहेली को लेकर चिंतित थी। 

एक जोर का झटका लगा फिर बोगी में लगने लगे सिर
खतौली रेल हादसे में घायल हुए 19 लोगों को मेडिकल, जिला अस्पताल, आनंद और कैलाशी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनका कहना है कि इनके डिब्बे में जोर का झटका लगा और फिर सिर ट्रेन की बोगी में लगने लगे। बेहोशी सी छाने लगी। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो गया। हाहाकार मचा था। मेडिकल अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती 13 घायलों में जगदीश (50), बनारसी दास (60)  और नत्थीदास (60) मुरैना मध्यप्रदेश के रहने वाले हैं, जो हरिद्वार जा रहे थे। इनके अलावा ब्रज किशोर (55) निवासी कुशवा कालोनी, जग्गा रोड आगरा, मंजू (35) पत्नी परविंदर निवासी मंदौर मुजफ्फरनगर, सोनिका (15) जगेरी, मुजफ्फरनगर हैं। मुश्ताक (37) निवासी पौड़ी गढ़वाल, गोलमा (65) करौली राजस्थान से हैं, अरुण (22) निवासी कंकरखेड़ा, राजाराम (45) और रोशन (26) निवासी मुबारिक पुर मुजफ्फरनगर, व एक 50 वर्षीय महिला बेहोश है। राजाराम, रोशन और महिला की हालत गंभीर है। प्रेमवती (60) निवासी ग्वालियर प्रगति नगर, हरिद्वार जा रही थीं। इनके अलावा ब्रजपाल सिंह (68) निवासी रुड़की कैलाशी अस्पताल में भर्ती हैं। दिव्या गर्ग (26), इनकी बेटी गुनगुन डेढ़ साल और बेटा अनिरुद्ध (4) घायल हैं, आनंद अस्पताल में भर्ती हैं। दिव्या के पति अंकित गर्ग नई सड़क शिवालिक बैंक में मैनेजर हैं। शास्त्रीनगर में रहते हैं, इनका परिवार सहारनपुर का रहने वाला है। ये सहारनपुर जा रहे थे। इनके अलावा दो घायल जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं, इनमें परमाल (50) और रामजीलाल (60) हैं। दोनों राजस्थान करौली केरहने वाले हैं।

घायलों का हाल जानने पहुंचे जनप्रतिनिधि-अधिकारी
मेरठ। संभल की रहने वाली राज्यमंत्री गुलाब देवी, विधायक सोमेंद्र तोमर और विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल घायलों का हाल जानने मेडिकल अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों से घायलों का बेहतर इलाज करने को कहा। रात करीब सवा 11 बजे सांसद, जिलाधिकारी और एसएसपी मेडिकल पहुंचे और घायलों का हाल जाना। 

घायलों को बचाने के लिए आगे सभी धर्मों के लोग 
मेरठ। मेडिकल अस्पताल पहुंचे घायल जगदीश, बनारसीदास और नत्थीदास के साथी  मुनीदास त्यागी, बालकदास, भगीरथदास और आत्मदास ने बताया कि वे बाल-बाल बचे हैं। चीख-पुकार मची थी। लोगों ने बहुत मदद की। हिंदू-मुस्लिम सभी थे बचाने में। अगर लोग इस तरह मदद न करते तो और भी जानें जा सकती थीं। लोगों ने काफी मदद की। कोई पानी लेकर आ रहा था तो कोई घायलों को उठाकर ले जा रहा था।

रेल हादसे के बाद मौके पर पहुंचे मंत्री
मेरठ मेडिकल अस्पताल: 
1. जगदीश (50), 2. बनारसीदास (60)  और 3. नत्थीदास (60) निवासी मुशीका बाग, मुरैना, मध्यप्रदेश
4. रोशन (26) पुत्र चंद्रकिशोर निवासी मुबारिकपुर, मुजफ्फरनगर
5. सोनिका (15) पुत्री किरणपाल, जगेरी, मुजफ्फरनगर
6. मंजू (35) पत्नी परविंदर निवासी मंदौर, मुजफ्फरनगर
7. ब्रजकिशोर शर्मा पुत्र रामस्वरूप (55) निवासी कुशवा कालोनी, जग्गा रोड, आगरा
8. राजाराम (57) पुत्र सरदार सिंह निवासी मुरैना, मुंशी का बाग, मध्यप्रदेश
9. अरुण (23) पुत्र चंद्रभान (23) निवासी कंकरखेड़ा मेरठ
10. गोलमा (65) पत्नी जगमोहन निवासी करौली राजस्थान
11. प्रेमवती (60) निवासी ग्वालियर प्रगति नगर, हरिद्वार
12. मुश्ताक (37) निवासी पौड़ी गढ़वाल
13. एक 50 वर्षीय महिला बेहोश है

कैलाशी अस्पताल में भर्ती
1. ब्रजपाल सिंह (68) निवासी रुड़की
आनंद अस्पताल में भर्ती
दिव्या गर्ग (30) पत्नी अंकित गर्ग निवासी शास्त्रीनगर, बेटी गुनगुन डेढ़ साल और बेटा अनिरुद्ध (4)।

मेडिकल अस्पताल में भर्ती घायल
1. परमाल (50) और 2. रामजीलाल (60) निवासी करौली, राजस्थान
एसजी ग्लोबल हॉस्पिटल, पल्लवपुरम (मेरठ) में भर्ती
1. नरोत्तम निवासी ग्राम पीपरी जिला मुरैना
2. संतराम पुत्र शिव नारायण निवासी बमानी खेड़ा पलवल, हरियाणा
3. गयासो देवी पत्नी राजेंद्र निवासी खिजूलपुरा, ग्वालियर
4. अंगद पुत्र रमेत (60) निवासी कानापुरा, करौली, राजस्थान
5. विनोद पुत्र गिरीरामज निवासी करौली, ग्राम भरताल, राजस्थान
6. गिरीराज पुत्र राम नारायण ग्राम, सराय निवासी माधोपुर, राजस्थान
7. राजाराम निवासी मुरैना, मध्यप्रदेश

एसजी ग्लोबल से दिल्ली किया गया रेफर
1. बिजेंद्र निवासी भरगंवा गली नई मंडी, मथुरा

मुजफ्फरनगर में स्वामी कल्याणदेव राजकीय जिला चिकित्सालय में देर रात तक 40 से ज्यादा घायल रेलयात्री भर्ती हो चुके हैं। कई गंभीर रूप से घायल यात्री अभी अज्ञात में हैं। घायलों की सूची देखें। 
1- खालिद पुत्र यामीन 
2- दिलशाद पुत्र असगर 
3- कमला देवी  
4- दिनेश शर्मा पुत्र हरिदत्त 
5- करणसिंह पुत्र रामनरेश 
6- मनोज कुमार 
7- प्रदीप शर्मा पुत्र लक्ष्मण शर्मा 
8- दीपक रानी पुत्री कुशलपाल 
9- सारिक नसीम पुत्री नसीमुद्दीन 
10- सुहैल पुत्र जुबैर 
11- विशाल पुत्र अनिल 
12- लक्ष्मण पुत्र पन्नू 
13- परशु  
14- प्रभु पुत्र कौशल 
15- प्रेमवती पत्नी राधा चरण 
16- जमनादास पुत्र राजाराम 
17- चंद्रो सोनी पत्नी फूलचंद 
18- गणेश प्रसाद तिवारी पुत्र सुग्रीव प्रसाद 
19- अनिल पुत्र ईश्वरदयाल शर्मा 
20- मुबारिक पुत्र आजाद 
21- बसंती शर्मा पत्नी बाबूलाल शर्मा 
22- रेखा शर्मा पत्नी प्रदीप शर्मा 
23 नारायण शर्मा पुत्र बाबूलाल 
24- छविराम पुत्र नंदलाल 
25- हरिप्रसाद पुत्र मुरली 
26- मलिक मंडल पुत्र जग्गा 
27- मुरारी लाल पुत्र शुभम लाल शर्मा 
28- अतुल कुमार पुत्र धर्मपाल 
29- सुभाष पुत्र मुरारी लाल 
30- मुश्ताक अली पुत्र रखा 
31- गिरधारी पुत्र अंगूरी 
32- मौहब्बत अली पुत्र अजमल 
33- यमुनादास  
34- शांति पत्नी गणेश 
35- उमेश प्रसाद तिवारी 
36- संदीप पुत्र रामपाल 
37- सुनील पुत्र श्रीनिवास 
38- छोटीराम पुत्र नंदलाल 
39 राजेश शर्मा पुत्र आशा राम 
40- इंतजार पुत्र आबिद 

कॉशन लगा होता तो नहीं होता ट्रेन हादसा  

यह हादसा रेलवे विभाग की लापरवाही से हुआ है। बगैर कॉशन के ट्रेन की पटरी पर तीन दिन से काम चल रहा था। इसकी शिकायत स्थानीय लोगों ने रेलवे अधिकारियों से की थी। लोगों का कहना है कि अगर पटरी पर कॉशन लगा होता तो यह हादसा नहीं होता। ‘अमर उजाला’ ने इस लापरवाही को कई बार प्रकाशित भी किया था। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि लोगों की मौत का जिम्मेदार रेलवे विभाग हैं। कई दिनों से रेलवे की पटरी पर काम चल रहा था। पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो लोगों ने उनका घेराव कर लिया। लोगों ने कहा कि अब अधिकारी सिर्फ मौत का तमाशा देखने आए हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद किसी रेलवे अधिकारी की आंख नहीं खुली। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझा बुझाकर शांत किया। लोगों ने 12 जून और 12 अगस्त में अमर उजाला के खतौली में रेलवे ट्रैक पर लापरवाही का समाचार प्रकाशित करने की बात भी अधिकारियों से कही। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच कराकर आरोपी रेलवे के अधिकारियों पर कार्रवाई कराई जाएगी। 

क्या है कॉशन : रेलवे के अधिकारियों ने बताया है कि पटरी पर निर्माण के दौरान कॉशन (चेतावनी/सावधानी) बरतने के लिए लाल झंडी, सिग्नल या कोई अन्य संकेतक लगाए जाते हैं, ताकि वहां से गुजरने वाली ट्रेन की स्पीड 20 किमी से भी कम हो। धीमी गति में ट्रेन वहां से आसानी से निकाली जाती हैं। कॉशन को देखकर ट्रेन के चालक समझ जाते हैं कि पटरी पर निर्माण चल रहा है। कई
दिनों से रेलवे कर्मचारी पटरी पर काम कर रहे थे। लेकिन कहीं कोई संकेतक नहीं लगा था। कुछ लोगों ने ट्रेन की गति काफी अधिक बताई। यही लापरवाही शनिवार को हादसे का सबब बताई जा रही है। 

पटरी की मरम्मत हो रही थी : एडीजी जोन प्रशांत कुमार का कहना है कि लोगों ने शिकायत की है कि पटरी की मरम्मत कराई जा रही थी, जिससे यह हादसा हुआ हैं। रेलवे के अधिकारियों पर लोगों ने लापरवाही और बगैर सिग्नल के काम कराने का आरोप लगाया है। इसकी जांच कराई जा रही है। इस हादसे का कौन जिम्मेदार है, इसका खुलासा जांच रिपोर्ट के बाद होगा।

जान बची तो लाखों पाए  : उत्कल एक्सप्रेस से बिहार के लखीसराय जिले के सात लोगों को भी हरिद्वार जाना था। लेकिन जनरल कोच में भारी भीड़ होने के चलते ये सातों लोग नहीं चढ़े और इन्होंने ट्रेन छोड़ दी। सिटी स्टेशन पर बैठे इन सात यात्रियों जयनेंद्र, डब्लू, रामकुमार, पंकज, धर्मेंद्र, चंदन व पिंटू ने अमर उजाला को बताया कि वे गाजियाबाद में कारपेंटर हैं। उन्हें पहले अपने साथियों से मिलने सुबह मेरठ आना था। शाम को उत्कल एक्सप्रेस से हरिद्वार जाना था। इसलिए जनरल टिकट भी गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से ही ले लिए थे। शाम को जब ट्रेन पकड़ने सिटी स्टेशन पहुंचे तो ट्रेन में भारी भीड़ थी। सात लोग व काफी सामान होने के चलते वे नहीं चढ़ सके। उन्होंने दूसरी ट्रेन से जाने के लिए उसे छोड़ दिया। जबसे उत्कल के हादसे की सूचना मिली है तो ऊपर वाले का शुक्र मना रहे हैं कि जान बच गई। 

तीसरा इमरजेंसी ब्रेक लगते ही पटरी से उतरी उत्कल  
मेरठ-सहारनपुर रेल मार्ग पर खतौली स्टेशन से छह सौ मीटर आगे रेलवे टीम तीन दिन से ग्लूड ज्वाइंट बदलने के लिए काम कर रही थी। इस दौरान ब्लाक न मिलने की वजह ट्रेन आ गई और बिना कॉशन के तेज गति होने के कारण एस सेवन कोच ऊपर वायर से टकराया। जिसके बाद चालक ने तीन बार इमरजेंसी ब्रेक लगाए। तीसरे ब्रेक पर पटरी उखड़ी और ट्रेन की बोगियां पटरी से उतरती चली गईं। रेलवे ट्रैक पर मरम्मत कार्य में पांच कर्मचारी लगे हुए थे। यात्री लेखपाल मैन कुमार ने बताया कि चालक ने तीन बार इमरजेंसी ब्रेक लिए। ब्रेक इतनी तेज थे कि दो बार ट्रेन बच गई। लेकिन तीसरी बार ट्रेन तेज गति होने के कारण पलट गई। इसका बड़ा कारण ट्रेन की गति तेज होना था। स्थानीय लोगों ने मरम्मत के दौरान बोर्ड लगाने के लिए कहा था। लेकिन रेलवे अधिकारियों ने इसे नहीं सुना। जिसका नतीजा यह निकला कि बड़ा रेल हादसा हो गया। सवाल उठता है कि जब मरम्मत का काम चल रहा था और कर्मचारी ट्रैक पर थे  तो फिर ट्रेन को तेज गति से गुजरने क्यों दिया गया। पहले से ही कॉशन या दूसरे एहतियाती इंतजाम क्यों नहीं किए गए। गनीमत थी कि इंटरसिटी एक्सप्रेस की स्पीड कम थी तो वह थोड़ी देर पहले निकल गई थी। बताया गया कि ग्लूड ज्वाइंट में तीन दिन पहले परेशानी आयी थी, जिसे बदलने के लिए काम किया जा रहा था।  

पटरी टूटकर दूर जाकर गिरी  
यात्रियों के अनुसार ट्रेन की स्पीड इतनी तेज थी कि पटरी टूटकर दूर जाकर गिरी। पटरी उत्कल एक्सप्रेस की तेज स्पीड के कारण पूरी तरह से उखड़ गई थी। पटरी उखड़ने के बाद बड़ा हादसा होने पर ही वहां पर चीख पुकार मच गई। (नोट: यह जानकारी एक ठेकेदार और यात्री ने दी( यात्री ट्रेन में सवार था और ठेकेदार घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर था। 

खतौली और सकौती क्षेत्र के बीच रेलवे लाइन पर करीब सात किलोमीटर का टुकड़ा मयाद पूरी कर चुका है। यहां ट्रैक की हालत लगातार ट्रेनों के संचालन की नहीं रही हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन इससे पूरी तरह अनजान बना रहा। जिसका नतीजा शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद सामने आया।  

अमर उजाला ने 12 अगस्त के अंक में प्रमुखता से ‘कमजोर ट्रैक पर दौड़ रहीं ट्रेनें’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जिसके माध्यम से खतौली में लगातार क्रैक हो रहे ट्रैक और उसके कारणों को दर्शाया गया। खतौली और सकौती के बीच सात किलोमीटर तक रेलवे लाइन का टुकड़ा बेहद कमजोर हो गया है। इस दूरी में रेलवे प्रशासन द्वारा अनेक बार मरम्मत कर ज्वाइंट, नट-बोल्ट कसे गए हैं। खतौली के तिलक नगर, नई तहसील के साथ सफेदा फाटक के निकट लगातार ट्रैक क्रैक होने की घटनाएं सामने आई थी। हालांकि रेलवे प्रशासन खुद स्वीकार कर चुका है कि यहां रेलवे ट्रैक कमजोर है। जिसे बदलने की प्रक्रिया शुरू करने को प्रपोजल मांगा गया है। घटना से सात दिन पूर्व अमर उजाला ने रेलवे को चेताया था, मगर बावजूद इसके कमजोर ट्रैक से ही स्पीड में ट्रेनों को निकाला जा रहा था। जिसके चलते शनिवार को भयावह हादसा सामने आया है।

लिंक रद्द होने से यात्री परेशान 
सहारनपुर से आने वाली लिंक नौचंदी के रद होने से उसमें रिजर्वेशन कराने वाले यात्री परेशान रहे। ए-1 कोच में रिजर्वेशन कराने वाले लखनऊ निवासी विवेक और दीनदयाल शर्मा सिटी स्टेशन पर खड़े थे। बताया कि यहां पहुंचने पर जानकारी मिली है कि लिंक रद्द है। अब वे क्या करे। उनका रिजर्वेशन तो उसी में था। नौचंदी को मेरठ से इलाहाबाद भेजा जा रहा है। इसमें उनका रिजर्वेशन नहीं है। अधिकारी भी कुछ नहीं कर रहे हैं। 

स्काउट भी गए राहत के लिए 
सिटी स्टेशन से खतौली के लिए राहत कार्य में हाथ बंटाने के लिए स्काउट छात्र भी रवाना हुए। इसमें हिमांशु धींगरा, ओमांक, कपिल, सुरजीत व गोपाल नेगी शामिल रहे। इसके अलावा गाजियाबाद से भी स्काउट लीडर अनिल सहगल व राहुल सहगल टीम के साथ मौके पर पहुंचे।  

लापरवाही की हद, चार घंटे बाद पहुंची एआरटी  
रेल हादसे के बाद तुरंत मौके पर पहुंचने वाली एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (एआरटी) को दिल्ली से खतौली तक पहुंचने में चार घंटे का समय लग गया। इससे बड़ी लापरवाही और क्या हो सकती है। आउटर और स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों को भी निकालने में भी काफी समय लिया गया। यात्री ट्रेनों में बैठे परेशान होते रहे। उत्कल एक्सप्रेस रेल हादसा शाम 5 बजकर 46 मिनट पर हुआ। इसकी जानकारी तुरंत बाद ही रेलवे कंट्रोल को मिल गई थी। सोशल मीडिया पर भी खबर आग की भांति फैल गई। लोग एक्सीडेंट की भयावह तस्वीरें वायरल कर रहे थे। लेकिन रेलवे अधिकारी सुप्त अवस्था से बाहर नहीं आए। यहां तक कि उच्चाधिकारियों को भी खतौली तक पहुंचने में घंटो लगे। वहीं, एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन भी चार घंटे देरी से रात करीब पौने दस बजे घटनास्थल पर पहुंची। 

कोई खतौली दौड़ा तो कोई स्टेशन की ओर 
खतौली रेल हादसे की सूचना के बाद लोग अपनों की कुशलता जानने को चिंतित रहे। कुछ तो अपनों  को कुछ देर पहले ही स्टेशन तक छोड़कर गए थे। घर पहुंचते ही हादसे की खबर आ गई। फोन मिलाया लेकिन नहीं मिला। कुछ तुरंत खतौली दौड़े तो कुछ स्टेशन की ओर। शास्त्री नगर निवासी जतिन ने बताया कि उनके बडे़ भाई नितिन प्राइवेट जॉब करते हैं। संडे की छुट्टी है।  शनिवार को उनका अचानक हरिद्वार जाने का प्रोग्राम बन गया। वे उत्कल एक्सप्रेस के जर्नल डिब्बे से हरिद्वार के लिए रवाना हो गए । वे खुद  स्टेशन तक छोड़कर गए । वह उन्हें छोड़कर घर पहुंचे ही थे कि ट्रेन हादसे की खबर आ गई। भइया का फोन मिलाया लेकिन नंबर नॉट रिचेबल बता रहा था। परिवार के कुछ लोग खतौली रवाना हो गए थे। वे खुद मेरठ स्टेशन पर जानकारी लेने आए, लेकिन यहां
कंट्रोल रूम नहीं था वह भी हड़बड़ाहट में खतौली रवाना हो गए । 
नई दिल्ली के मंगलौलपुरी निवासी सुरेंद्र मित्तल भी इसी ट्रेन से हरिद्वार गए थे। उनका भी फोन नंबर नहंी मिल पा रहा था। चिंतित परिजनों ने सूरजकुंड रोड पर रहने वाले अपने रिश्तेदारों को इसकी खबर दी तो वह सिटी स्टेशन पर जानकारी लेने पहुंचे, लेकिन तुरंत ही खतौली के लिए रवाना हो गए । इसी तरह कई ओर लोग हड़बड़ाहट में ट्रेन से हरिद्वार गए अपने परिचितों के
बारे में जानकारी लेने स्टेशन आए थे। इनके परिचितों के मोबाइल भी नहीं मिल पा रहे थे इसी वजह से ये लोग चिंतित थे। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी थी कि मेरठ में भी कंट्रोल रूम बनाया जाना चाहिए था। ये लोग इतने घबराए थे कि अपना नाम पता भी पूरा बताने से हिचक रहे थे।

कोई जानबूझकर नहीं करता गलती
रेल हादसे में घायल राजस्थान के मुरैना जिले के पीपरी गांव निवासी वृद्ध नरोत्तम का पौत्र शिवकुमार रेलवे में ही गैंगमैन है। नरोत्तम को पल्लवपुरम के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रेलवे से हादसे की सूचना मिलने पर उनका परिवार मेरठ के लिए रवाना हो गया। शिवकुमार ने बताया कि उनके बाबा हरिद्वार जा रहे थे। शिवकुमार ने बताया कि वह खुद गैंगमैन है। उसे पता है कि कोई भी कर्मचारी जानबूझकर गलती नहीं करता। चूक हो जाती है। ये घटना भी भूलवश हुई है। 

पूरी रात दौड़ीं बसें, एआरएम ने संभाला मोर्चा
खतौली में उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से बाधित हुए रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों का आवागमन रुक गया। जिसके चलते ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी हो गई। आरक्षण के साथ दैनिक यात्रियों ने गंतव्य जाने के लिए रोडवेेज की ओर दौड़ लगा दी। डिपो से हादसे के बाद पूरी रात रोडवेज सेवा सुचारु की गई।  
एआरएम बीपी अग्रवाल, अनुशासन पटल प्रभारी अनुज त्यागी, संचालन प्रभारी राजकुमार तोमर समेत डिपो के तमाम अधिकारी डिपो पर पहुंचे। जो बसें डिपो में खड़ी थी, उन्हें तत्काल रोड पर उतार दिया गया। चंद मिनटों में ही डिपो पर यात्रियों की भीड़ के कारण हालात बेकाबू हो गए। डिपो अधिकारियों ने रेल हादसे के शिकार हुए लोगों की मद्द के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी कर पूरी रात बस सेवा प्रारंभ कराई। एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि निगम के साथ अनुबंधित बसों को भी सहारनपुर, देहरादून, दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद के अलावा अन्य मार्गों पर लगा दिया गया। डिपो से शनिवार पूरी रात बसे चलाई गईं।

अमावस्या पर हरिद्वार में स्नान करने जा रहे थे लोग
उत्कल एक्सप्रेस में ज्यादातर घायल और मृतक हरिद्वार में अमावस्या पर्व पर गंगा स्नान की इच्छा लिए घर से निकले थे, मगर हादसे की चपेट में आ गए। मुरैना के प्रदीप शर्मा और ग्वालियर के नारायण बताते हैं कि दुर्घटना के बाद ट्रेन में करंट दौड़ गया था, बीस मिनट तक कोई भी ट्रेन के आसपास बचाव के लिए नहीं आ सका।  उत्कल एक्सप्रेस देश के दो मुख्य धार्मिक स्थलों को जोड़ती है। उड़ीसा के जगन्नाथपुरी से हरिद्वार जा रही ट्रेन में तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ थी। साधु संतों के साथ सत्संग टोलियां द्वितीय श्रेणी की स्लीपर बोगियों में सवार थीं। एक झटके में ट्रैक से उतरकर बिखरी बोगियों में हा-हाकार मच गया। स्वामी कल्याणदेव राजकीय जिला चिकित्सालय में आए घायलों के मुताबिक अमावस्या पर्व पर हरिद्वार में गंगा स्नान और कर्मकांड के लिए पहुंच रहे, कई प्रांतों के लोग ट्रेन में थे। मुरैना के प्रदीप शर्मा की पत्नी और पुत्री घायल हुए हैं। प्रदीप ने बताया कि हरिद्वार में भागवत का पाठ कराना था। भगवान की कृपा है कि परिवार में कोई हताहत नहीं हुआ। दुर्घटना के बाद बीस मिनट तक कोच एस टू में कोई नहीं पहुंचा। कोच में करंट दौड़ने से मौत सामने दिखने लगी थी। आसपास की रिहायस से भी लोग बचाव के लिए काफी देर तक हिम्मत नहीं जुटा सके। ग्वालियर  के नारायण शर्मा बताते हैं कि दस यात्रियों की टोली के साथ हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए जा रहे थे। उड़ीसा के पूरी के मधु मंडल शुक्रवार की रात तीन मित्रों के साथ उत्कल एक्सप्रेस के एस वन कोच में निकले थे, उन्हें हरिद्वार में हर की पैड़ी पर डुबकी लगानी थी। उन्हें अभी तक अपने बिछडे़ दो साथी नहीं मिले। ट्रेन की पेंट्री में कामगार मुरैना के करण सिंह तोमर और त्रिवेंद्र ने बताया कि सबसे पहले ट्रैक से इंजन उतर गया। बाद में पेंट्री कार भी उतर गई। हादसा ट्रैक टूटने की वजह से होने की आशंका है। घायलों में शामिल कई यात्रियों का कहना है कि तेज रफ्तार उत्कल में चैन पुलिंग की गई है। घायलों में उड़ीसा और मध्यप्रदेश के यात्री सबसे ज्यादा हैं।

अलर्ट पर रखे गए अस्पताल
ट्रेन हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन में खलबली मच गई। हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरनगर के साथ आसपास के जिलों मेरठ, बागपत, शामली और सहारनपुर के अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा गया। इन जिलों की एंबुलेंसों को भी मौके पर भेजा गया। हादसे के बाद घायलों को आनन-फानन में अस्पतालों में पहुंचाया गया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राइवेट अस्पतालों को भी मैसेज करा दिया गया कि जरूरत पड़ने पर मरीजों को भर्ती कराया जा सकता है। सरकारी अस्पतालों में सभी स्टाफ को ड्यूटी पर बुला लिया गया। मुजफ्फरनगर के अलावा शामली, मेरठ, बागपत, बिजनौर और सहारनपुर की एंबुलेंसों को भी मौके पर रवाना कर दिया गया। हादसा स्थल के आसपास एंबुलेंसों को लगाया गया। घायलों को तत्काल उनमें डालकर अस्पताल भेजा जा रहा था। मेरठ में सर्वाधिक व्यवस्था होने की वजह से ज्यादातर घायलों को मेरठ भेजा गया। बेगराजपुर के मेडिकल कॉलेज में भी घायल भर्ती कराए गए। पूरे जिले का फोर्स मौके पर बुलाया गया। मेरठ, शामली और बागपत का पुलिस फोर्स को भी कॉल कर लिया गया। सबसे ज्यादा दिक्कत अनावश्यक भीड़ के पहुंचने पर हुई। पुलिस को भीड़ को हटाने में खासी मशक्कत का सामना करना पड़ा। शहर के जिला अस्पताल के अलावा खतौली और मेडिकल कालेज में भी घायल भर्ती कराए गए हैं। ज्यादातर घायल बाहर के मुसाफिर हैं। स्थानीय घायलों की संख्या कम है।  

प्रशासन ने बसों का किया रूट डायवर्ट
ट्रेन हादसे के बाद बोगियों से निकली यात्रियों की भीड़ नगर की सड़कों पर आ गई थी, जिससे जीटी रोड, जानसठ रोड पर यात्रियों की भीड़ अपने घरों को जाने के लिए इधर उधर अन्य वाहनों में बैठने के लिए भटक रही थी। प्रशासन ने नगर में जाम की स्थिति न बन जाए इसलिए हाईवे पर भैंसी कट से नगर में आने वाले वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया था। सभी वाहनों को सीधे हाईवे से
निकाला गया। उधर, जानसठ रोड का यातायात भी डायवर्ट करके मिल रोड से सफेदा बाइपास की ओर निकाला गया। 

बोगी घुसने से परिवार के लोगों की चीख निकली 
ट्रेन हादसे में जगत कालोनी निवासी चौधरी जगत सिंह के मकान में एक बोगी जा घुसी। मकान में बोगी घुसने और तेज धमाके की आवाज से परिवार के लोगों की चीख निकल गई थी। परिवार में मौजूद लोग काफी देर तक तो यह नहीं समझा सके कि हुआ क्या है। काफी देर बाद पता चला कि ट्रेन हादसा हुआ है और एक बोगी दीवार तोड़कर मकान में आ घुसी है। गनीमत यह रही कि पूरी बोगी मकान में नहीं घुसी। अगर बोगी मकान में पूरी घुस जाती तो परिवार के लोगों की भी जान जा सकती थी। 

ट्रेन हादसे से कॉलोनी के लोग भी सहमे 
ट्रेन हादसा को लेकर जगत कॉलोनी के लोग भी सहम गए थे। अपनी कालोनी के सामने जिस किसी भी व्यक्ति ने दिल दहला देने वाले ट्रेन हादसे का नजारा देखा वह सहम गया था।  

बच्चों की दुआ ने बचा ली जिंदगी 
उत्कल एक्सप्रेस भयावह हादसे के बाद नाते-रिश्तेदार अपनों का कुशलक्षेम जानने के लिए खतौली पहुंच गए। दिल्ली निवासी राहुल गोयल शहर के कृष्णापुरी में अपनी ससुराल आ रहा था। जैसे ही दुर्घटना की सूचना पत्नी अंजू और बच्चों को मिली, तो सब बदहवास हो गए। राहुल ने बताया कि ट्रेन में तेजी से ब्रेक लगने के कारण कोई संभल नहीं पाया। हर तरफ चीख पुकार मच गई।
भगवान का शुक्र है कि बच गए।  हादसे के साक्षी राहुल गोयल को आभास भी नहीं था कि खतौली स्टेशन से निकलते ही उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना का शिकार हो जाएगी। राहुल ट्रेन में सवार मुजफ्फरनगर में उतरने वाले यात्रियों को कुछ मिनट बाद ही गंतव्य पर पहुंचने का इंतजार था। खतौली से ट्रेन क्रॉस हो रही थी, तभी अचानक ट्रेन में तेज आवाज के साथ ब्रेक लगे और बोगियां हवा में लहरा गई। हर तरफ चीख-पुकार मची थी। डिब्बों में खून बिखरा था। जैसे ही बोगियां एक-दूसरे पर चढ़कर ठहरी, जिंदा बचे यात्री जहां भी रास्ता मिला कूद गए। मौत के डर से अपनों को भी यात्री संभाल नहीं पाए। बुजुर्गों और बच्चों के चेहरों पर डर तारी था। राहुल उत्कल एक्सप्रेस में दिल्ली से सवार हुआ। उसे मुजफ्फरनगर उतरना था। यहां कृष्णापुरी उसकी ससुराल है। हादसे की सूचना फोन पर दी तो पत्नी अंजू और उसका साला शिवम घबरा गए। शिवम बाइक से खतौली पहुंचा और राहुल को लेकर शहर आया। राहुल ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि बच गए। बच्चों की दुआओं ने मौत के मुंह से वापस खींच लिया। मौत के भंवर से बच कर शहर पहुंचे राधेलाल ने कहा कि कई बोगियां पूरी नष्ट हो गई हैं। पैंट्रीकार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। एक बोगी हवा में लहराकर रेल लाइन के बराबर में बनी बस्ती में घुस गई। ट्रेन की स्पीड तेज थी और कुछ मिनटों के बाद ही हमें उतरना था। हादसे की यात्रियों को कल्पना नहीं थी।  

You May Also Like

English News