लाभ का पद मामले की फिर सुनवाई करेगा चुनाव आयोग

 दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा लाभ के पद मामले में विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की आयोग की सिफारिश को अमान्य करने के बाद चुनाव आयोग आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों के खिलाफ ‘लाभ के पद ’ के मामले में चुनाव आयोग आगामी 17 मई से फिर से सुनवाई शुरू करेगा.नई दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा लाभ के पद मामले में विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की आयोग की सिफारिश को अमान्य करने के बाद चुनाव आयोग आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों के खिलाफ ‘लाभ के पद ’ के मामले में चुनाव आयोग आगामी 17 मई से फिर से सुनवाई शुरू करेगा.  आपको बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में लाभ के पद का दोषी बताते हुए आप विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की आयोग की सिफारिश को अमान्य करते हुए आयोग से इस मामले की फिर से सुनवाई करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद अब चुनाव आयोग 17 मई से फिर से सुनवाई शुरू करेगा.आज शुक्रवार को सुनवाई के बारे में सूचित करते हुए चुनाव आयोग ने 17 मई को अपना पक्ष रखने के लिए स्वयं या अपने वकील के माध्यम से पेश होने को कहा है.इस मामले में आयोग ने शीर्ष अदालत में अपील नहीं करते हुए सुनवाई का मौका दिया है .  गौरतलब है कि इस मामले में आप विधायकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका लगाकर दलील दी थी कि आयोग द्वारा पिछले साल मार्च में उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया .जबकि आयोग ने खंडन कर सभी पक्षकार विधायकों को लिखित जवाब देने के लिए दो बार मौका देने की बात कही थी.मार्च 2015 में मंत्रियों के संसदीय सचिव नियुक्त किए गए आप विधायकों की नियुक्ति को सितंबर 2016 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अमान्य घोषित कर दिया था.

आपको बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में लाभ के पद का दोषी बताते हुए आप विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की आयोग की सिफारिश को अमान्य करते हुए आयोग से इस मामले की फिर से सुनवाई करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद अब चुनाव आयोग 17 मई से फिर से सुनवाई शुरू करेगा.आज शुक्रवार को सुनवाई के बारे में सूचित करते हुए चुनाव आयोग ने 17 मई को अपना पक्ष रखने के लिए स्वयं या अपने वकील के माध्यम से पेश होने को कहा है.इस मामले में आयोग ने शीर्ष अदालत में अपील नहीं करते हुए सुनवाई का मौका दिया है .

गौरतलब है कि इस मामले में आप विधायकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका लगाकर दलील दी थी कि आयोग द्वारा पिछले साल मार्च में उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया .जबकि आयोग ने खंडन कर सभी पक्षकार विधायकों को लिखित जवाब देने के लिए दो बार मौका देने की बात कही थी.मार्च 2015 में मंत्रियों के संसदीय सचिव नियुक्त किए गए आप विधायकों की नियुक्ति को सितंबर 2016 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अमान्य घोषित कर दिया था.

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