वर्ल्ड स्लीप डे: इन पांच उपायों से बनाएं अपनी नींद बेहतर

सोना किसे पसंद नहीं है? कभी गर्मियों की खामोश दोपहर में? कभी सर्दियों की मनोहारी सुबह में? कभी बरसात की रात में जब बरसते पानी की आवाज़ आपके कानों में गुनगुनाती रहती है? कभी दफ्तर में कीबोर्ड पर टिक टिक के शोर में आप सोना चाहते हैं तो कभी गाडी चलाते वक़्त पलकें झपकने लगती है.सोना सेहत के लिए बेहद ज़रूरी तो है लेकिन गलत जगह और गलत समय पर सोने के अलग नुक्सान हो सकते हैं इसलिए ज़रूरी है की आप अपने सोने के वातावरण को बेहतर बनाएं ताकि आप अच्छी नींद लें और घर समय पर पलकें न झपकाएं.

अपनी शामें आप किस तरह बिताते हैं, आपकी नींद इसपर बहुत निर्भर करती है. आज वर्ल्ड स्लीप डे के दिन, हम आपको बता रहे हैं कि कैसे आप अपने सोने के वातावरण व् अपनी नींद को बेहतर बना सकते हैं.

– अपने बिस्तर को अपना दोस्त बनाएं

चाहे आप मुम्बई में किसी छोटे से फ्लैट में रहते हैं या दिल्ली के किसी फार्महाउस में, ज़रूरी है कि आप अपने कमरे को अपनी पसंदीदा चीज़ो से सजाएं, चाहे वो किताबें हों या लैम्प्स. अपने बिस्तर और तकियों को हमेशा साफ़ रखें और बदलते रहे.

– अपने शरीर पर ध्यान दें

ये जानना बेहद महत्त्वपूर्ण है कि आपको क्या काम कब करना अच्छा लगता है. अगर आप सुबह एक्सरसाइज नहीं कर पाए हैं तो शाम को कर लीजिये. खुद को समाय में बांधना ज़रूरी नहीं है. बस ये ध्यान रहे की जब आपके शरीर का तापमान बढा हो तब न सोएं जैसे कि एक्सरसाइज करने और गरम पानी से नहाने से शरीर का तापमान बढ़ता है.

आँखों को उतना ही आराम दें जितना अपनी कमर को देना चाहते हैं

देर रात तक फ़ोन आया टेबलेट में देखते रहने से आंखों की पुतलियों पर ज़ोर पड़ता है और नींद उचट जाती है. कोशिश करें की अगर नींद नहीं आ रही है तो या आँख बंद करके संगीत सुन लें या कोई किताब पढ़ें.

– खाना पेट को खिलाएं जीभ को नहीं

आप डिनर में जो भी खा रहे हों उसे उतनी ही मात्रा में खाएं जितनी भूख है. कई बार आप स्वादिष्ट व्यंजन के लालच में इतना खा लेते हैं कि नींद नहीं आती. इससे आपका वज़न भी कण्ट्रोल में रहेगा और आप अच्छी नींद के साथ खाने को पच भी पाएंगे.

– नींद का बायोलॉजी ही नहीं, गणित भी समझें

आप बहुत बार सोचते हैं ओह! चार बज गया? कोई बात नहीं. मैं तीन घंटे की गहरी नींद लेके सात बजे दफ्तर के लिए निकल लूंगा. जान लीजिये कि छह घंटे की नींद बेहद ज़रूरी है. यदि आप यह नहीं कर रहे हैं तो ढेरों बेमारियों को न्योता दे रहे हैं.

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