विधानसभा में कैप्‍टन सरकार पेश करेगी शिअद को मुसीबत में डालने रिपोर्ट, राजनीति गर्मायी

पंजाब विधानसभा के मॉनसून सत्र में शिरोमणि अकाली दल की मुसीबत बढ़ सकती है। कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है। सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और बहिबलकलां गोलीकांड पर जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की जांच रिपोर्ट 27 अगस्त को विधानसभा में रखेगी। विधानसभा में इस पर 28 अगस्‍त को बहस होगी।

रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट 27 अगस्‍त को विधानसभा में होगी पेश

बहस के लिए कितना समय दिया जाएगा, यह स्पीकर राणा केपी सिंह की अगुवाई वाली बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की मीटिंग में तय होगा।मंगलवार को कैबिनेट की मीटिंग में इस बात को लेकर चर्चा हुई। बहस करवाने को लेकर सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने सभी मंत्रियों से तैयारी करके आने को कहा। 24 अगस्त को होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में भी इस रिपोर्ट पर चर्चा होगी।

उधर, इस रिपोर्ट में एक प्रमुख गवाह हिम्मत सिंह के मुकर जाने के चलते मामले में मोड़ आ गया है। शिरोमणि अकाली दल इस रिपोर्ट को लेकर अपने आप को घिरा हुआ महसूस कर रहा है। रिपोर्ट में आयोग ने पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर बादल डीजीपी सुमेध सैणी और सीएमओ के कुछ अधिकारियों पर अंगुली उठाई गई है। ऐसे में बहस के दौरान अकाली दल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

मुख्य गवाह के मुकरने से आया मोड़

रिपोर्ट को लेकर प्रमुख गवाह हिम्मत सिंह ने जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने दबाव डालकर रिपोर्ट के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए। गौरतलब है कि हिम्मत सिंह तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरमुख सिंह का भाई है, जो खुद भी एसजीपीसी में ग्रंथी रहा है। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को माफी देने के विरोध में दोनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

ज्ञानी गुरमुख सिंह को हाल ही में एसजीपीसी ने हेडग्रंथी के रूप में बहाल कर दिया गया है, जबकि हिम्मत सिंह बयानों से मुकर गया है। ऐसे में सवाल पैदा होता कि क्या अकाली दल के दबाव में हिम्मत सिंह ऐसा कर रहा है। जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा का कहना है कि बादल परिवार ने हिम्मत पर बयान पलटने का दबाव बनाया है।

झूठ बोल रहा हिम्मत: जस्टिस रणजीत सिंह

जस्टिस रणजीत सिंह ने कहा कि हिम्मत सिंह झूठ बोल रहा है। उसने अंग्रेजी में नहीं बल्कि पंजाबी में बयान दर्ज करवाया था। अंग्रेजी में तो उसने केवल अपने पते पर ही हस्ताक्षर किए हैं। मीडिया में अब उसके मुकरने का कोई अर्थ नहीं है। क्योंकि रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा चुकी है। आयोग ने इसे किसी मामले में समन नहीं किया था और न ही गवाह के रूप में बुलाया था।

रिपोर्ट पर असर नहीं

आयोग के गठन के मामले में जो टर्म एंड रेफरेंस तय की गई थीं, उसमें डेरा सच्चा सौदा की शमूलियत के बारे में कोई बात नहीं थी। आयोग का काम केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, बहिबलकलां और कोटकपूरा में हुए गोलीकांड की जांच करना था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि हिम्मत मुकर गया है, तो भी रिपोर्ट अपनी बात पर स्टैंड करती है क्योंकि यह रिपोर्ट गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और गोलीकांड को लेकर है।

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