विधायकों को बोर्ड व निगम चेयरमैन बनाने का रास्ता साफ

पंजाब सरकार ने विधायकों को बोर्ड व कारपोरेशन का चेयरमैन बनाने का रास्ता साफ कर दिया है। कैप्‍टन अमरिंदर सिंह सरकार ने अतिरिक्त लाभ की कुछ श्रेणियों को अनिवार्य भत्तों में बदल दिया गया है। इससे बोर्ड या कारपोरेशन का चेयरमैन नियुक्त होने वाला विधायक ‘लाभ के पद’ के दायरे में नहीं आएगा। उन्हें अयोग्य करार नहीं दिया जा सकेगा। इस संबंध में विधानसभा में पेश किए जाने वाले बिल को कैबिनट की बैठक में मंजूरी दे दी गई।

बिल में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी, विधानसभा में पेश होगा

पंजाब कैबिनेट ने द पंजाब स्टेट लेजिस्लेचर (प्रीवेंशन ऑफ डिसक्वालीफिकेशन संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी है। 24 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस बिल को पेश किया जाएगा। तीन तिहाई बहुमत होने के कारण सरकार को इस बिल को पास करवाने में कोई परेशानी नहीं आएगी

पंजाब सरकार ने लाभ की श्रेणियों को ‘अनिवार्य भत्तों’ में बदला, यह होंगे बदलाव

संशोधन में अनिवार्य भत्तों को ‘संवैधानिक संस्था’ और ‘असंवैधानिक संस्था’ में परिभाषित किया गया है। अनिवार्य भत्तों का मतलब ऐसी राशि से होगा, जो पद पर मौजूद व्यक्ति को रोजमर्रा के काम, यात्रा व आवास के लिए दी जाएगी। इस संशोधन से विधायक चेयरमैन के पद पर रहते हुए अतिरिक्त भत्ते लेने के योग्य माने जाएंगे। हालांकि वेतन उन्हें विधायक का ही मिलेगा। लाभ के पद की श्रेणियों में विस्तार किया जाएगा।

कौन-कौन आ सकेंगे दायरे में

मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्य मंत्री या उप मंत्री, चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन, राज्य योजना बोर्ड के पदाधिकारी, विधानसभा में मान्यता प्राप्त पार्टी ग्रुप के नेता व डिप्टी नेता, विधानसभा में चीफ व्हिप, डिप्टी चीफ व्हिप या व्हिप के पद शामिल हैं।

अन्य कोई पारिश्रमिक नहीं

बिल के संशोधन के अनुसार इस पद पर तैनात व्यक्ति को अनिवार्य भत्तों को छोड़ कर अन्य कोई पारिश्रमिक नहीं मिलेगा।

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