वॉट्सएप के जरिए सरकारी अस्पतालों में चल रहा ‘गंदा’ धंधा

बिलासपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सिम्स व जिला अस्पताल समेत शहर के अन्य ब्लड बैंक में पीडी (प्रोफेशनल डोनर) सक्रिय हैं। वे मरीज की आवश्यकता और मजबूरी को ध्यान में रखते हुए मनमाने दाम पर खून बेचते हैं। वहीं एक हजार से 20 हजार रुपए तक एक यूनिट खून के लिए वसूल लेते हैं। इसके लिए उन्होंने बकायदा वॉट्सएप में ग्रुप बना रखा है, जिसके जरिए एक-दूसरे से संपर्क में रहकर अवैध कारोबार चलाते हैं।

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सिम्स के ब्लड बैंक में करीब एक सप्ताह पहले एक प्रोफेशनल डोनर को पकड़ा गया। मामले में एक मरीज को खून की आवश्यकता थी, परिजन सिम्स के ब्लड बैंक पहुंचे। पर तत्काल में खून उपलब्ध नहीं होने पर परिजन को खून के लिए इधर-उधर हाथ पैर मारना पड़ा। इस दौरान ब्लड बैंक के पास सक्रिय प्रोफेशनल ब्लड डोनर ने स्थिति का फायदा उठाते हुए उससे संपर्क कर खून की व्यवस्था करने की बात कही और इसके एवज में रुपए लगने की बात कही। इसकी जानकारी ब्लड बैंक कर्मियों को दी गई। उसे पकड़ लिया गया।

इसके बाद से सिम्स प्रबंधन ऐसे प्रोफेशनल डोनरों पर लगाम लगाने जुट गया है। इसके लिए खुफिया तंत्र भी लगाया गया है। वहीं अब प्रबंधन को रिपोर्ट मिली है कि सिम्स सहित शहर के अन्य ब्लड बैंक के आसपास 100 से ज्यादा प्रोफेशनल डोनर सक्रिय हैं, जो वॉट्सएप ग्रुप के माध्यम से खून बेचने का कारोबार कर रहे हैं। किसी भी ब्लड बैंक में मरीज को खून नहीं मिल रहा है तो प्रोफेशनल डोनर उन्हें रुपए के एवज में खून दिलाने का आश्वासन देते हैं। इसके बाद ब्लड ग्रुप की जानकारी लेकर उसे वॉट्सएप ग्रुप में डाली जाता है।

साथ ही बताया जाता है कि सामने वाला कितना संपन्न है। इस जानकारी के बाद प्रोफेशनल डोनर सक्रिय हो जाते हैं और बताए गए ब्लड बैंक में पहुंचकर मरीज के परिजन से संपर्क करते हैं। इस दौरान परिजन की आर्थिक स्थिति का जायजा लेने और उनकी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए खून की कीमत निर्धारित की जाती है। अभी तक ऐसे कई मामले आ चुके हैं, जिसमें ये डोनर परिजन की क्षमता का आंकलन कर एक यूनिट ब्लड के लिए 1 हजार से लेकर 20 हजार रुपए तक वसूल लेते हैं।

हर वक्त रहते है तीन से चार डोनर

यह भी जानकारी लगी है कि शहर के हर ब्लड बैंक के पास हर वक्त तीन से चार डोनर सक्रिय रहते हैं। वे पूरे टीम वर्क के साथ काम करते हैं। जहां कोई संपर्क में आया, उसे पूरी तरह से लूटने का प्लान बनाकर काम करते हैं।

बदलते रहते हैं ठिकाना

वे पूरी प्लानिंग के साथ अपना काम कर रहे हैं। पकड़े जाने का डर उन्हें भी रहता है। लिहाजा सप्ताह या 10 दिन में अपना ठिकाना बदलते रहते हैं। आमतौर पर इनका मुख्य ठिकाना सिम्स और जिला अस्पताल का ब्लड बैंक रहता है।

कई संदिग्धों पर नजर

सिम्स में प्रोफेशनल डोनर के पकड़े जाने के बाद गार्ड तैनात कर दिया गया है। उन्हें आने जाने वालों पर नजर रखने को कहा गया है। अभी तक ऐसे कई संदिग्धों को नोटिस किया गया है जो आए दिन ब्लड बैंक में नजर आते हैं।

एबी निगेटिव मरीज मिला तो चांदी

प्रोफेशनल डोनर की नजर रेयर निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले मरीजों पर ज्यादा रहती है। यदि कोई एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप का मरीज मिल गया तो उनकी चांदी हो जाती है। तब मरीज गरीब हो या संपन्न कम से कम 10 हजार से सौदा शुरू किया जाता है।

प्रोफेशनल डोनर सक्रिय हैं जो वाट्सएप के माध्यम से खून बेचने का धंधा करते हैं। उन पर नजर रखी जा रही है। जैसे ही प्रोफेशनल होने की पूरी तरह से पुष्टि होगी, वैसे ही डोनर को पकड़कर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. बीपी सिंह, एचओडी, पैथोलॉजी विभाग, सिम्स

प्रोफेशनल डोनरों को पकड़ने के लिए ब्लड बैंक में गार्ड तैनात किए गए हैं। साथ ही सीसी टीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। बड़े पैमाने पर प्रोफेशनल डोनर फैल चुके हैं, जो मरीज की मजबूरी का फायदा उठाते हुए खून बेचने का काम कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक शहर में 100 से ज्यादा डोनर सक्रिय हैं। इन पर लगाम लगाया जाएगा। डॉ. रमणेश मूर्ति, प्रभारी एमएस, सिम्स

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