वो बातें जो देश सुनना चाह रहा था लेकिन मोदी ने कहा नहीं

आजादी के 71वें समारोह के लिए लाल किले के प्राचीर पर एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने उसी अंदाज में दिखे. रंगीन साफा और कुर्ता. प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले के प्राचीर से ऐसा बहुत कुछ कहा जो देश की 125 करोड़ से अधिक जनसंख्या सुनना चाहती थी. ऐसा बहुत कुछ वह अपने पहले तीन भाषणों में कह चुके थे. लेकिन इस बार देश को वह सुनना था जो सवा सौ करोड़ जनसंख्या सुनना चाहती थी. लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा बहुत कुछ नहीं कहा जिसे सुनने का इंतजार आजादी के जश्न के बाद भी किया जा रहा है.

वो बातें जो देश सुनना चाह रहा था लेकिन मोदी ने कहा नहीं

आजादी के महापर्व पर प्रधानमंत्री के चार भाषणों से एक बात साफ है कि इस बार प्रधानमंत्री के भाषण में मिनट के साथ-साथ जोश कम था. इस मौके का पूरा देश बेसब्री से इंतजार कर रहा था. प्रधानमंत्री का वादा भी था कि साल के कामकाज का पूरा ब्यौरा देने के लिए वह अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इस बार प्रधानमंत्री ने वह बोला जो उनके मुताबिक देश की आबादी सुनना चाह रही थी. और क्या-क्या सुनना चाहता था देश?

1. कब मिलेगी भीड़तंत्र के अन्याय से आजादी?

2. कब मिलेगी खस्ताहाल स्वास्थ सेवा से आजादी?

3. कब मिलेगी आर्थिक अनिश्चितता से आजादी?

4. कब मिलेगी कीमतों में उछाल से आजादी?

5.कब मिलेगी पड़ोसी मुल्कों के ठंडे कारोबार से आजादी?

6.कब मिलेगी पब्लिक स्कूल में एडमीशन की कतार से आजादी?

7.कब मिलेगी बेरोजगारी से आजादी?

8.कब मिलेगी किसान आत्महत्या से आजादी?

9.कब मिलेगी वोट बैंक की राजनीति से आजादी?

10. कब मिलेगी सामाजिक भेदभाव से आजादी?

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