व्यापम घोटाला: हाईकोर्ट ने कहा, आरोप साबित हुए तो छात्रों के भविष्य की सामूहिक हत्या का केस चलेगा

व्यापम घोटाला के नाम से कुख्यात पीएमटी 2012 में हुए फर्जीवाड़े के सात रसूखदार आरोपियों कि अग्रिम जमानत की अर्जी को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया और सरेंडर किए बिना अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता और न्यायाधीश विजय शुक्ला की खंडपीठ ने गुस्र्वार को फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि व्यापम ऐसा घोटाला है जिसमें आरोपियों ने भले ही किसी की जान नहीं ली हो, लेकिन अगर आरोप साबित हुए तो सैकड़ों छात्रों के भविष्य की सामूहिक हत्या का केस चलेगा। व्यापम घोटाला: हाईकोर्ट ने कहा, आरोप साबित हुए तो छात्रों के भविष्य की सामूहिक हत्या का केस चलेगा
मध्यप्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाला मामले में सीबीआई द्वारा आरोपी बनाए गए चिरायु मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. अजय गोयनका, एलएन मेडिकल कॉलेज के एडमिशन इंचार्ज डॉ. दिव्य किशोर सत्पथी, एलएनसीटी ग्रुप के चेयरमैन जयनारायण चौकसे, पीपुल्स यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. विजय कुमार पंड्या, डॉ. विजय के रमनानी, तत्कालीन डीएमई डॉ. एससी तिवारी और तत्कालीन ज्वाइंट डीएमई एनएम श्रीवास्तव की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज हो गई। इसी के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया। हालांकि अभी आरोपियों के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा है।

कोर्ट के आदेश की अनदेखी 
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश में टिप्पणी की है कि अग्रिम जमानत की अर्जी दायर करने वाले आरोपियों को आत्मसमर्पण का पूरा मौका दिया गया था। लेकिन आरोपियों ने अग्रिम जमानत की आस में इसकी अनदेखी की। कोर्ट ने 21 नवंबर को सीबीआई और आरोपियों को समन जारी कर 23 नवंबर को हाजिर होने को कहा था। आरोपियों के हाजिर नहीं होने पर ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इस मामले में सीबीआई की तरफ से असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल जेके जैन ने अग्रिम जमानत अर्जियों का विरोध किया।

अमीर बच निकते हैं, गरीब फंस जाते हैं, अंगुली कोर्ट पर उठती है 
हाईकोर्ट ने मामले में शुरुआती सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी में कहा था कि मेडिकल कॉलेज के संचालकों के कृत्यों और व्यापम जैसे बड़े घोटाले की वजह से हजारों योग्य छात्र मेडिकल सीटों पर दाखिले से वंचित हो गए और अयोग्य छात्र पैसे के बल पर सीट हासिल करने में कामयाब हो गए। कोर्ट ने कहा कि दाखिले की पूरी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी, जिसके शिकार योग्य उम्मीदवार बने। यह बेहद चिंताजनक बात है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अमूमन ऐसे बड़े घोटालों के ट्रायल के दौरान अमीर आरोपी बच निकते हैं, लेकिन गरीब आरोपी फंस जाते हैं। इसका दुखदायी नतीजा यह होता है कि समाज के सामने न्यायिक व्यवस्था पर अंगुली उठना शुरू हो जाती है। 

 

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