शहीद एसपीओ के परिवारों के लिए ट्विटर पर डीजीपी की फंड जुटाने की मुहिम, पहले दिन जुटाए 2.85 लाख

देशवासी जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का सामना करते शहीद हुए 499 स्पेशल पुलिस आफिसरों (एसपीओ) के परिवारों के पुनर्वास के लिए आगे आएं। उनके लिए खड़े हों, जिन्होंने हमारी सुरक्षा के लिए अपनी जान दी है। जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक डॉ एसपी वैद के सोमवार सुबह इस संदेश के साथ शहीद एसपीओ के परिवारों के लिए फंड जुटाने की मुहिम छेड़ते ही पहले दिन शाम चार बजे तक 2.85 लाख रुपये एकत्र हो गए। डीजीपी की अपील काे 398 देशवासियों ने शेयर कर मुहिम को तेजी दी।देशवासी जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का सामना करते शहीद हुए 499 स्पेशल पुलिस आफिसरों (एसपीओ) के परिवारों के पुनर्वास के लिए आगे आएं। उनके लिए खड़े हों, जिन्होंने हमारी सुरक्षा के लिए अपनी जान दी है। जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक डॉ एसपी वैद के सोमवार सुबह इस संदेश के साथ शहीद एसपीओ के परिवारों के लिए फंड जुटाने की मुहिम छेड़ते ही पहले दिन शाम चार बजे तक 2.85 लाख रुपये एकत्र हो गए। डीजीपी की अपील काे 398 देशवासियों ने शेयर कर मुहिम को तेजी दी।   डीजीपी ने इस फंड के तहत शहीद परिवारों के लिए तीन करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस फंड का इस्तेमाल सेंट्रल पुलिस वेल्फेयर फंड कमेटी के जरिए किया जाएगा। डीजीपी इस वेल्फेयर फंड कमेटी के चेयरमैन हैं। डीजी के पीआरओ एसपी मनोज शीरी ने जागरण को बताया कि जुटाए गए फंड का इस्तेमाल शहीद स्पेशल पुलिस आफिसरों के बच्चों को शिक्षा व प्रोफेसनल कोर्स आदि के लिए इस्तेमाल हाेगा। उन्होंने बताया कि समाज फंड जुटाने की मुहिम के प्रति भारी उत्साह दिखा रहा है।   कारगिल विजय दिवस पर सेना ने ली शहीदों से प्रेरणा यह भी पढ़ें राज्य में वर्ष 2010 तक आतंकवाद से लड़ते शहीद होने वाले एसपीओ के परिवार को सिर्फ ढ़ाई लाख रुपये का मुआवजा मिलता थे। अब शहीद के परिवार को अढ़ाई लाख रुपये की विशेष रात, 5 लाख रुपये का मुआवजा व जनता इंश्योरेंस के 10 लाख रुपये मिलते हैं। यह राशि कुल मिलाकर 17.50 लाख रुपये बनती है। अधिकतर एसपीओ समाज के कमजाेर वर्ग से हैं। ऐसे में शहीद परिवारों को आर्थिक सहयोग देने के बाद भी उन्हें सहारा दिया जाता है।  जम्मू कश्मीर में कानून एवं व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्पेशल पुलिस आफिसरों की अस्थाई नियुक्ति की जाती है। वे पुलिस के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ने सिर्फ कानून एवं व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं, अपितु आतंकवाद का सामना भी करते हैं। शहीद होने पर अस्थायी होने के कारण उन्हें वे लाभ नही मिलते हैं जो पुलिस के एक शहीद को मिलते हैं। डीजीपी के सुबह आठ बजे यह मुहिम छेड़ने के साथ ट्विटर पर अभियान को सहयोग देने संबंधी संदेश आने लगे। अलबत्ता कुछ फालोयर्स ने स्पेशल पुलिस अधिकारियों को लेकर स्पष्ट नीति न होने पर सरकार को भी घेरा। उन्होंने लिखा है कि जब एसपीओ, पुलिस कर्मियों के बराबर काम करते हैं, शहादतें देते हैं तो उनके परिवारों के पुनर्वास के लिए बराबर सहयोग क्यों नही दिया जाता है।   जवाहर सुरंग में दरारें, रोका गया ट्रैफिक; वाहनों की लगीं कतारें यह भी पढ़ें जम्मू कश्मीर में इस समय 31 हजार के करीब एसपीओ पुलिस के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्हें हर महीने छह हजार रुपये मानदेय के रूप में दिए जाते हैं। एसपीओ को मिलने वाले मानदेय केंद्र सरकार की ओर से जारी किया जाता है। कुछ समय पहले तक एसपीओ को राज्य में महज 3 हजार रुपये का मानदेय मिलता था। अब उनका मानदेय बढ़ाने के साथ सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पुलिस की ओर से उचित कदम उठाए जा रहे हैं।   पहले ही दिन 136 ने दी सहायता शहीद एसपीओ के परिवारों के लिए फंड जुटाने की मुहिम के पहले दिन 136 देशवासियों ने आर्थिक सहायता दी। पहले ही दिन कास्मिक विजर्ड व स्मिता दीक्षित ने इक्कीस-इक्कीस हजार रूपये दे कर फंड जुटा रही जम्मू कश्मीर पुलिस का उत्साह बढ़ाया। दोनों पहले दिन के टाप डोनर्स थे।

डीजीपी ने इस फंड के तहत शहीद परिवारों के लिए तीन करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस फंड का इस्तेमाल सेंट्रल पुलिस वेल्फेयर फंड कमेटी के जरिए किया जाएगा। डीजीपी इस वेल्फेयर फंड कमेटी के चेयरमैन हैं। डीजी के पीआरओ एसपी मनोज शीरी ने जागरण को बताया कि जुटाए गए फंड का इस्तेमाल शहीद स्पेशल पुलिस आफिसरों के बच्चों को शिक्षा व प्रोफेसनल कोर्स आदि के लिए इस्तेमाल हाेगा। उन्होंने बताया कि समाज फंड जुटाने की मुहिम के प्रति भारी उत्साह दिखा रहा है।

राज्य में वर्ष 2010 तक आतंकवाद से लड़ते शहीद होने वाले एसपीओ के परिवार को सिर्फ ढ़ाई लाख रुपये का मुआवजा मिलता थे। अब शहीद के परिवार को अढ़ाई लाख रुपये की विशेष रात, 5 लाख रुपये का मुआवजा व जनता इंश्योरेंस के 10 लाख रुपये मिलते हैं। यह राशि कुल मिलाकर 17.50 लाख रुपये बनती है। अधिकतर एसपीओ समाज के कमजाेर वर्ग से हैं। ऐसे में शहीद परिवारों को आर्थिक सहयोग देने के बाद भी उन्हें सहारा दिया जाता है।

जम्मू कश्मीर में कानून एवं व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए स्पेशल पुलिस आफिसरों की अस्थाई नियुक्ति की जाती है। वे पुलिस के जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ने सिर्फ कानून एवं व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं, अपितु आतंकवाद का सामना भी करते हैं। शहीद होने पर अस्थायी होने के कारण उन्हें वे लाभ नही मिलते हैं जो पुलिस के एक शहीद को मिलते हैं। डीजीपी के सुबह आठ बजे यह मुहिम छेड़ने के साथ ट्विटर पर अभियान को सहयोग देने संबंधी संदेश आने लगे। अलबत्ता कुछ फालोयर्स ने स्पेशल पुलिस अधिकारियों को लेकर स्पष्ट नीति न होने पर सरकार को भी घेरा। उन्होंने लिखा है कि जब एसपीओ, पुलिस कर्मियों के बराबर काम करते हैं, शहादतें देते हैं तो उनके परिवारों के पुनर्वास के लिए बराबर सहयोग क्यों नही दिया जाता है।

जम्मू कश्मीर में इस समय 31 हजार के करीब एसपीओ पुलिस के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। उन्हें हर महीने छह हजार रुपये मानदेय के रूप में दिए जाते हैं। एसपीओ को मिलने वाले मानदेय केंद्र सरकार की ओर से जारी किया जाता है। कुछ समय पहले तक एसपीओ को राज्य में महज 3 हजार रुपये का मानदेय मिलता था। अब उनका मानदेय बढ़ाने के साथ सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पुलिस की ओर से उचित कदम उठाए जा रहे हैं। 

पहले ही दिन 136 ने दी सहायता
शहीद एसपीओ के परिवारों के लिए फंड जुटाने की मुहिम के पहले दिन 136 देशवासियों ने आर्थिक सहायता दी।
पहले ही दिन कास्मिक विजर्ड व स्मिता दीक्षित ने इक्कीस-इक्कीस हजार रूपये दे कर फंड जुटा रही जम्मू कश्मीर पुलिस का उत्साह बढ़ाया। दोनों पहले दिन के टाप डोनर्स थे।

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