शिक्षक भर्ती घोटाले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन में- एक निलंबित, पांच को हटाया

प्रदेश के सभी परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 68500 शिक्षकों की भर्ती में अनियमितताएं उजागर होने पर बैकफुट पर आई सूबे की सरकार ने डैमेज कंट्रोल के लिए कदम बढ़ाते हुए कार्रवाई की है। शिक्षक भर्ती का लिखित इम्तिहान आयोजित करने के लिए जिम्मेदार संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकारी की सचिव डॉ. सुत्ता सिंह को मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबित करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनिक जांच शुरू कर दी गई है। 

सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद के पद पर लंबे समय से जमे संजय सिन्हा से यह कुर्सी छीन ली गई है। रजिस्ट्रार, विभागीय परीक्षाएं जीवेंद्र सिंह ऐरी को हटाकर उन्हें कौशांबी के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर भेजा गया है। शिक्षक भर्ती में बरती गईं अनियमितताओं की जांच के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव चीनी एवं गन्ना विकास संजय आर. भूसरेड्डी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।

सुत्ता सिंह के निलंबन के बाद परीक्षा नियामक कार्यालय के पीछे शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेजों को जलाकर नष्ट करने का मामला सामने आया है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में स्कैन कापियां लेने पहुंचे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेजों को जलाया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब उन्होंने कापियों और अन्य जरुरी दस्तावेजों को जलाने से रोकने की कोशिश की तो उन्हें बाहर भगा दिया गया।हालांकि अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ अभ्यर्थी अधजले कागजात अपने साथ लेकर गए हैं। जिसे वे कोर्ट के समक्ष पेश भी करेंगे। कापियों के जलाने के वक्त अभ्यर्थियों ने मोबाइल के क्लिपिंग भी बनायी थी। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेंजों और कापियों के जलाये जाने को लेकर जांच के आदेश दे दिए गए है।

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