श्रीलंका ने चीन को दिया तगड़ा झटका, हम्बनटोटा पोर्ट पर नियंत्रण को कैबिनेट ने दी मंजूरी

श्रीलंका की कैबिनेट ने चीन के साथ एक समझौते के तहत देश के दक्षिणी हिस्से में मौजूद हम्बनटोटा बंदरगाह के नियंत्रण और विकास के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस बंदरगाह से चीन अब व्यवसायिक काम तो कर सकेगा, लेकिन इसकी पूरी सुरक्षा पर नियंत्रण होगा श्रीलंका का। जानकारों का कहना है कि इससे चीनी सेना के इस बंदरगाह के इस्तेमाल की अटकलों पर रोक लग गई है।श्रीलंका ने चीन को दिया तगड़ा झटका, हम्बनटोटा पोर्ट पर नियंत्रण को कैबिनेट ने दी मंजूरीअमेरिकी सदन ने रूस, ईरान और उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए मतदान

समझौते के तहत व्यापार लगाने के लिए बंदरगाह के पास की जमीन चीन को देने का श्रीलंका में कड़ा विरोध हुआ था। इस परियोजना का समर्थन कर रहे लोगों का कहना था कि इससे श्रीलंका में विकास होगा जबकि आलोचकों और स्थानीय लोगों ने चीन के बढ़ते दखल को लेकर चिंता जताई थी।

मंगलवार को पारित हुए प्रस्ताव के बारे में सरकार ने कहा कि देश में बड़े पैमाने पर हुए विरोध के कारण सरकार समझौते की शर्तों में बदलाव कर रही है। फिलहाल इस नए समझौते की पूरी जानकारी साझा नहीं की गई है। कैबिनेट प्रवक्ता दयाश्री जयशेखर ने बताया है, “कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर दिया है और अब इसे संसद की मंजूरी चाहिए। हम इस सप्ताह इसे मंजूरी के लिए भेजेंगे।” चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

हम्बनटोटा बंदरगाह का महत्व

  • 150 करोड़ डॉलर से बने हंबनटोटा बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक है। 
  • इस बंदरगाह को चीन की सरकारी संस्था चाइना मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स ने बनाया था। इसमें 85 फीसदी हिस्सेदारी चीन के एक्सिम बैंक की थी। 
  • निर्माण के वक्त से ही ये बंदरगाह विवादों में रहा और इसका विरोध हुआ।
  • तत्कालीन राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे के कार्यकाल में बने इस बंदरगाह में चीन से आने वाले माल को उतारकर देश के अन्य भागों तक पहुंचाने की योजना थी।
  • समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार नए कानून के जरिए श्रीलंका चीन की व्यवसायिक गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है और सुरक्षा का नियंत्रण भी अपने पास रख रहा है।

क्यों हो रहा है विरोध?

  • हम्बनटोटा को चीन का आधुनिक युग का ‘सिल्क रूट’ का कहा जाता है। चीन बंदरगाह के नजदीक ही व्यवसायिक केंद्र बनाने के लिए इसके आसपास की 15000 एकड़ की जमीन लेना चाहता था। चीन की इस कोशिश से आशंका जताई जाने लगी कि चीन इसका इस्तेमाल अपनी सेना के लिए कर सकता है।
  • श्रीलंका में इसके विरोध में प्रदर्शन हुए। एक तरफ लोगों को अपनी जमीन छीने जाने का डर था जबकि राजनेताओं ने चीन को इतनी बड़ी जमीन दिए जाने से देश की संप्रभुता में खतरा बताया।
  • जापान और अमेरिका समेत श्रीलंका के पड़ोसी देशों ने चिंता जताई थी कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल चीनी सेना कर सकती है।

साल 2014 में चीन की एक पनडुब्बी कोलंबो के पास हम्बनटोटा बंदरगाह के पास आ गई थी। इस पर भारत सरकार ने चिंता जताई थी। भारत श्रीलंका को अपना करीबी पड़ोसी मानता है और इस इलाके में चीनी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी का विरोध करता आया है। मई में श्रीलंका ने अपने इलाके में चीन की पनडुब्बी खड़ी करने के एक अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था।

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