संकष्टी चतुर्थी पर विधि विधान से करें गणेश पूजन

जुलाई का महीना शुरू हो चुका है, साथ ही व्रत और त्यौहार भी आज ही शुरू हो रहे हैं जिनके लिए सभी काफी इंतज़ार करते हैं. तो आपको बता दें जुलाई की पहली तारीख को ही संकष्टी चतुर्थी है जिस पर महिलाएं व्रत करती हैं और गणेशजी का पूजन करती हैं और अपनी मनोकामना पूरी करती हैं. संकष्टी चतुर्थी का व्रत सभी संकटों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत होता है. वैसे तो चतुर्थी का व्रत हर महीने ही आता है लेकिन आषाढ़ की चतुर्थी को काफी खास माना जाता है. इस व्रत के बारे में आपको बता देते हैं कैसा करना है.मनोकामना पूर्ति के लिए 11 दूर्वा भगवान गणेश को अर्पित करें.  * इसके बाद आरती कर इस व्रत को खोल लें इससे आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी.मनोकामना पूर्ति के लिए 11 दूर्वा भगवान गणेश को अर्पित करें.  * इसके बाद आरती कर इस व्रत को खोल लें इससे आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी.

इस व्रत पर गणेशजी का पूजन विधि विधान से किया जाये तो हर संकट से मुक्ति मिलती है और ये व्रत सबसे उत्तम व्रत भी माना जाता है. तो चलिए जानते हैं किस विधि से कर सकते हैं आप ये व्रत जिससे गणेशजी आप पर कृपा बनाये रखेंगे.

गणेशजी के व्रत और पूजन के लिए सुबह स्नान कर नियमित पूजा कर लें और इस व्रत के संकल्प ले लें.

इसके बाद आप फलाहार कर सकते हैं या जलाहार पर भी ये व्रत कर सकते हैं.

शाम को शुभ मुहूर्त देखकर गणेशजी का पूजन करें और उनकी आराधना करें.

पूजा के लिए लड्डू, हल्दी, कुमकुम, चावल फल और फूल आदि से पूजा थाल सजा लें उसके बाद पूजा करें.

इसी के साथ गणेशजी को दूर्वा और पीले पुष्प अर्पित करें.

मनोकामना पूर्ति के लिए 11 दूर्वा भगवान गणेश को अर्पित करें.

इसके बाद आरती कर इस व्रत को खोल लें इससे आपकी सभी मनोकामना पूरी होगी.

 

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