संसद में सुषमा क्यों बोलीं ऐसा, नहीं बनूंगी पाप की भागीदार, पढ़ें पूरी ख़बर…

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को लोकसभा में इराक में लापता 39 भारतीयों के मुद्दे पर अपना जवाब दिया. सुषमा ने कहा कि उनके पास 39 भारतीयों के मारे जाने या फिर जिंदा होने का कोई ठोस सबूत नहीं है. जब तक उनके पास कोई सबूत नहीं आता है तब तक वह कोई ठोस जवाब नहीं दे सकती हैं. सुषमा ने इस दौरान कई अहम बातें की.

संसद में सुषमा क्यों बोलीं ऐसा, नहीं बनूंगी पाप की भागीदार, पढ़ें पूरी ख़बर...

 लोकसभा में सुषमा के जवाब की कुछ मुख्य बातें…

1. नहीं बनूंगी पाप की भागीदार

सुषमा स्वराज ने अपने बयान में कहा कि बिना किसी सबूत के किसी को मृत घोषित करना पाप है, मैं ये पाप बिल्कुल भी नहीं करुंगी. मुझ पर गुमराह करना का आरोप लगाना गलत है. मैंने जो कुछ भी किया है सदन को विश्वास में लेकर किया है.

2. एक व्यक्ति ने बोला मृत, पर 6 सूत्रों ने कहा जिंदा

24 नवंबर 2014 को मैंने कहा था कि एक व्यक्ति कह रहा है कि वो मार दिए गए हैं, और 6 सूत्र कह रहे हैं कि वो जिंदा हैं तो मुझे क्या उन्हें ढूंढना नहीं चाहिए. मैंने बार-बार सदन से कहा था कि मेरे पास उनके जीवित होने का कोई सबूत नहीं है, ना ही मेरे पास उनके मारे जाने का कोई ठोस सबूत नहीं है. मैं सदन की अनुमति चाहूंगी कि अगर मेरा रास्ता सही है तो हम इसमें आगे बढ़ सके. इसके लिए मुझे बयान भी दिया गया था.

3. जब तक सबूत नहीं, तब नहीं होगी फाइल बंद

हमारे सूत्र ऐसे वैसे नहीं हैं हमें एक देश के राष्ट्रपति, एक देश के विदेश मंत्री ने ये बताया है. मैं 12 बार पीड़ितों के परिवार से मिली हूं, मैंने हर बार कहा कि मेरे पास उनके जीवित रहने की कोई जानकारी नहीं है, मैं सूत्रों के हवाले से ये कह रही हूं. उनकी फाइल तब तक बंद नहीं कर सकते हैं जब तक कोई सबूत ना हो.

4. सूचना मिलते ही मोसुल गए वीके सिंह

9 तारीख को मोसुल आजाद होने की घोषणा की गई, 10 तारीख को हमारे विदेश मंत्री मोसुल पहुंच गए थे. वो 4 दिन वहां पर रहे. वीके सिंह के आने के बाद ही मैंने पीड़ितों के परिवार को बुलाया. वीके सिंह ने कहा था कि हमारे सूत्रों के हवाले से वो लोग वहां पकड़े गए, फिर उन्हें हॉस्पिटल में रखा गया फिर खेती करवाई गई. लेकिन 2016 के बाद से हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं है. हमें जो पता लगा हमनें वही परिवार को बताया.

5. जेल ढहने का मतलब मृत्यु नहीं

सुषमा बोलीं कि तस्वीर बस इतना बताती है कि जेल ढह गई है, लेकिन तस्वीर से ये नहीं पता लगता है कि सभी लोग मार दिए हैं. इराक के विदेश मंत्री ने कहा कि हमारे पास ना ही जिंदा होने या मारे जाने का ठोस सबूत है.

6. उन्हें मृत घोषित करना मेरे लिए आसान

अगर मैं आज उन्हें मरा हुआ घोषित कर दूं तो मेरे लिए आसान है, कोई मुझसे सवाल नहीं पूछेगा. मैं अपना फर्ज निभा रही हूं. सुषमा ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब के 6 परिवार उनसे मिलने आए, और कहा कि 1971 की लड़ाई में उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया था लेकिन 45 साल बाद गांव के पास का व्यक्ति लौट कर आया और कहा कि वो लोग जिंदा हैं. तब से वो परिवार कह रहा है कि हमारे परिवार वालों को वापस लाना चाहिए. सुषमा बोलीं कि एक बच्चा 7 साल का बच्चा 21 साल पहले खेत में अपने पिता के साथ खेलते-खेलते सरहद पार कर गया, उसका नाम नानक सिंह है.

7. खुलासे के दिन का इंतजार करुंगी

लेकिन उसके परिवार वाले कहते हैं कि वो पाकिस्तान में है उसे वापस लाओ. मेजर धनसिंह थापा को पहले शहीद घोषित किया, उन्हें पुरस्कार दिया लेकिन बाद में वो जिंदा निकले. सुषमा ने कहा कि मैं जो भी बात बोलूंगी वो सबूत के साथ बोलूंगी, मैंने कभी नहीं कहा कि वो जिंदा हैं या मारे गए हैं. जब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिलता है मैं कोई नतीजे पर नहीं पहुंच सकते हैं. सिर्फ एक व्यक्ति कह रहा है वो मारे गए और हमारे कई सूत्र कह रहे हैं कि वो जिंदा हैं. कोई सबूत ऐसा मिलेगा जो इसका खुलासा करेगा, मैं उस दिन का इंतजार करुंगी.

8. कंस्ट्रकशन वर्कस थे ये लोग

ये भारतीय लोग वहां पर कंस्ट्रकशन वर्कस थे लेकिन वहां पर फंस गए. सुषमा ने कहा कि सबूत के तौर पर अगर वो हिंदी में अपना नाम और घर का पता लिख कर दें तो हमें मदद मिलेगी. हमें उनकी ओर से पूरा भरोसा दिया गया है. मैंने कभी संसद को गुमराह नहीं किया, मुझे गुमराह करने का क्या फायदा मिलता. गुमराह करने से ना मुझे कुछ मिलेगा ना सरकार को.

9. जेल के वॉर्डन से करेंगे बात

2016 के बाद कोई सूचना नहीं है. लेकिन फिर भी तलाश जारी है. मैंने उनसे अपील की है कि अब जो भी जानकारी दें तो सबूत के साथ दें, बिना सबूत अब मैं परिवार से बात नहीं कर सकती हूं. मैंने उनसे जेल के वॉर्डन से बात करने को कहा है जिससे भारतीयों के बारे में कुछ पता चल सके.

10. हमारी सरकार आने के 20 दिन बाद की घटना

सुषमा स्वराज ने कहा कि मैं शुरू से ही लोकसभा में बयान देना चाहती थी. ये घटना हमारी सरकार आने के 20 दिन बाद की है. उस समय हरजीत ने ये बयान दिया था कि मैं मेरे सामने 39 लोगों को मार दिया गया था, और मैं भाग कर आ गया था. लेकिन हमें ना ही कहीं लाशें मिली, ना ही कोई सूची मिली, और इसलिए हम कैसे कह सकते हैं. हरजीत के बयान में काफी विरोधाभास है, जिस मुद्दे को उठाया गया था. हमने मोसुल के आस-पास तलाशी ली है, मैंने जो कुछ भी किया है वह सदन को विश्वास में लेकर किया

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