सरकारी आवास मामले में SC ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

भारत में पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या इनके समकक्ष का कोई पदाधिकारी अपना पद त्यागने का हक़दार है या नहीं ? इस मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी.  आज अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए पूर्व पदाधिकारियों को सरकारी आवास देने के प्रावधान को रद्द कर दिया है. शीर्ष अदालत के आदेश अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि  मंत्री और मुख्यमंत्री, पद पर रहते हुए एक निशुल्क सरकारी आवास के हकदार हैं, पद छोड़ने के 15 दिन के भीतर उन्हें सरकारी मकान खाली करना होगा. अदालत ने कहा है कि पद छोड़ने के बाद वे साधारण नागरिक बन जाते हैं, इसलिए उन्हें सरकारी आवास में रहने का कोई हक़ नहीं है. भारत में पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री या इनके समकक्ष का कोई पदाधिकारी अपना पद त्यागने का हक़दार है या नहीं ? इस मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी.  आज अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए पूर्व पदाधिकारियों को सरकारी आवास देने के प्रावधान को रद्द कर दिया है. शीर्ष अदालत के आदेश अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि  मंत्री और मुख्यमंत्री, पद पर रहते हुए एक निशुल्क सरकारी आवास के हकदार हैं, पद छोड़ने के 15 दिन के भीतर उन्हें सरकारी मकान खाली करना होगा. अदालत ने कहा है कि पद छोड़ने के बाद वे साधारण नागरिक बन जाते हैं, इसलिए उन्हें सरकारी आवास में रहने का कोई हक़ नहीं है.    लोकप्रहरी नाम के एनजीओ ने उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला दिए जाने के नियम को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे पुरे देश का मामला मानते हुए कहा था कि ये सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी निवास दिए जाने के प्रावधान पर सुनवाई की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में विस्तृत सुनवाई की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के लिए वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम को अमाइक्स क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया था.  गौरतलब है कि लोक प्रहरी के महासचिव और पूर्व नौकरशाह एस. एन. शुक्ला शिकायकर्ता के तौर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. बता दें कि साल 2016 के अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के उस आदेश को ख़ारिज कर दिया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन भर मुफ्त सरकारी आवास देने की व्यवस्था की गई थी. लेकिन उसके बाद भी अखिलेश यादव, मायावती जैसे पूर्व मुख्यमंत्री अभी भी सरकारी आवास में रह रहे थे, किन्तु अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद सभी पूर्व पदाधिकारियों को सरकारी आवास खाली करना होगा.
 
लोकप्रहरी नाम के एनजीओ ने उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री को बंगला दिए जाने के नियम को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसे पुरे देश का मामला मानते हुए कहा था कि ये सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी निवास दिए जाने के प्रावधान पर सुनवाई की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले में विस्तृत सुनवाई की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के लिए वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम को अमाइक्स क्यूरी (न्याय मित्र) नियुक्त किया था.

गौरतलब है कि लोक प्रहरी के महासचिव और पूर्व नौकरशाह एस. एन. शुक्ला शिकायकर्ता के तौर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. बता दें कि साल 2016 के अगस्त महीने में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के उस आदेश को ख़ारिज कर दिया था, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को जीवन भर मुफ्त सरकारी आवास देने की व्यवस्था की गई थी. लेकिन उसके बाद भी अखिलेश यादव, मायावती जैसे पूर्व मुख्यमंत्री अभी भी सरकारी आवास में रह रहे थे, किन्तु अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद सभी पूर्व पदाधिकारियों को सरकारी आवास खाली करना होगा. 

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