सरकार बिना पॉवर के काम कैसे करेगी-सत्येंद्र जैन

उपराज्यपाल के दफ्तर में धरना देने के दौरान बीमार पड़ने के बाद 36 घंटे अस्पताल में गुजारने वाले मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अफसर अगर फोन न उठाएं और मीटिंग में न आएं तो कामकाज संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में 36 घंटे तक रहा जिससे काफी रिकवरी हो गयी. हल्का सा भोजन किया, आराम किया और फिर मन नहीं लगा तो सचिवालय चला गया. साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह का गतिरोध हिंदुस्तान में कभी किसी ने नहीं सुना कि अधिकारी मीटिंग में न आयें हों. अगर अफसर फोन न उठायें या मीटिंग में न आयें तो कामकाज संभव नहीं है.जैन ने कहा कि 3 साल से जहां झुग्गी वहीं मकान देना चाहते हैं लेकिन जमीन नहीं दी जाती है. मोहल्ला क्लीनिक 1000 बनाने हैं लेकिन सिर्फ 164 बन पाए क्योंकि जमीन न मिलने को लेकर ही झगड़ा चल रहा है. कई मोहल्ला क्लीनिक बनकर तैयार हैं लेकिन उनमें डॉक्टर और दवाई नहीं है क्योंकि 4 महीने से अधिकारियों की हड़ताल थी, एलजी और पीएम से काम न करने के निर्देश थे.  उन्होंने कहा कि अड़ने वाली कोई बात नहीं है, 4 महीने से सिस्टम ठप था. विधानसभा में बजट के दौरान अधिकारियों से पूछकर ही टाइम लाइन दी गयी थी. लेकिन अधिकारी टाइम लाइन नहीं मान रहे हैं. मैं खुद अफसरों से 10 बैठक करने जा रहा हूं, हालांकि मुख्यमंत्री की बैठकों की जानकारी मुझे नहीं है. जैन ने कहा कि सुरक्षा का कोई मुद्दा है ही नहीं. अधिकारी पुलिस वाले साथ लेकर चलते हैं. मुझे नहीं लगता कि नेताओं या अधिकारियों को सुरक्षा की ज़रूरत है, बल्कि जनता को सुरक्षा की जरूरत है. साथ ही उन्होंने इसे राजनीति करार दिया.

उन्होंने कहा कि बुधवार को 10 अलग-अलग विभागों बैठक बुलाई है, ये अधिकारियों की बजाय मंत्री की चिंता ज्यादा है. उन्होंने कहा, ‘मंत्री या अधिकारी के पहले दिल्ली के नागरिक हैं. दिल्ली के वोटर का हक उत्तर प्रदेश या हरियाणा से कम क्यों हो? दिल्ली में 2 करोड़ लोग रहते हैं जबकि देश के 11 राज्यों की आबादी दिल्ली से कम है, दुनिया के 150 देश ऐसे हैं जिनकी आबादी दिल्ली से कम है. उस दिल्ली को पूर्ण राज्य क्यों नहीं बनाया जाता.’ उन्होंने कहा, ‘एनडीएमसी का इलाका केंद्र अपने पास रख ले, बाकि दिल्ली हमें दे दे. चाहे तो एक सर्वे भी कराया जा सकता है. दिल्ली में हमेशा हमारी सरकार नहीं रहेगी, कोई भी सरकार बिना पॉवर के काम कैसे करेगी.

जैन ने कहा कि 3 साल से जहां झुग्गी वहीं मकान देना चाहते हैं लेकिन जमीन नहीं दी जाती है. मोहल्ला क्लीनिक 1000 बनाने हैं लेकिन सिर्फ 164 बन पाए क्योंकि जमीन न मिलने को लेकर ही झगड़ा चल रहा है. कई मोहल्ला क्लीनिक बनकर तैयार हैं लेकिन उनमें डॉक्टर और दवाई नहीं है क्योंकि 4 महीने से अधिकारियों की हड़ताल थी, एलजी और पीएम से काम न करने के निर्देश थे.

उन्होंने कहा कि अड़ने वाली कोई बात नहीं है, 4 महीने से सिस्टम ठप था. विधानसभा में बजट के दौरान अधिकारियों से पूछकर ही टाइम लाइन दी गयी थी. लेकिन अधिकारी टाइम लाइन नहीं मान रहे हैं. मैं खुद अफसरों से 10 बैठक करने जा रहा हूं, हालांकि मुख्यमंत्री की बैठकों की जानकारी मुझे नहीं है. जैन ने कहा कि सुरक्षा का कोई मुद्दा है ही नहीं. अधिकारी पुलिस वाले साथ लेकर चलते हैं. मुझे नहीं लगता कि नेताओं या अधिकारियों को सुरक्षा की ज़रूरत है, बल्कि जनता को सुरक्षा की जरूरत है. साथ ही उन्होंने इसे राजनीति करार दिया.

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